प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बीएससी एग्रीकल्चर का कोर्स बैन करने की मांग पर दिया धरना
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अमर उजाला ब्यूरो
ढांड। प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बीएससी एग्रीकल्चर के कोर्स को बैन करने की मांग पर मंगलवार को कृषि महाविद्यालय कौल में विद्यार्थी धरने पर बैठे। छात्र-छात्राओं ने एचएयू प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
छात्राओं ने कहा कि इससे पहले बीएससी एग्रीकल्चर कोर्स महज एचएयू विश्वविद्यालय ही करवाता था मगर अब प्रवेश परीक्षा करवाकर हरियाणा में ही खुली दो अन्य प्राइवेट यूनिवर्सिटी में दाखिला करवाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। दोनों ही प्राइवेट यूनिवर्सिटी कैथल और बहादुरगढ़ में खोली जा रही है। ऐसे में वहां न तो विश्वविद्यालयों के पास खेती करने के लिए जगह है और न ही इंफ्रास्ट्रक्चर है। ऐसे में स्टूडेंट्स वहां प्रैक्टिकल का काम न के बराबर ही कर पाते हैं। दूसरा उन विश्वविद्यालयों की फीस भी ज्यादा है, इसके कारण बहुत से विद्यार्थी दाखिला ले पाने में भी असमर्थ हैं। छात्रों ने कहा कि शहरी क्षेत्र के विद्यार्थी जिन्हें गेहूं और बाजरे के बीच का फर्क नहीं पता होता उन्हें भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी कृषि एक्सपर्ट बनाने का दावा करती हैं। इससे पहले भी पंजाब की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बीएससी एग्रीकल्चर का कोर्स शुरू करवाया था और वहां से पास आउट होने वाले विद्यार्थियों को नौकरी ही नहीं मिली, क्योंकि प्रायोगिक तौर पर वो कुछ नहीं सीख सके। छात्रों ने कहा कि वो कर्नाटक की तरह ही अपने आंदोलन को जारी रखेंगे जब तक उनकी मांग को मान नहीं लिया जाता। उन्होंने बताया कि इसी तरह का प्रस्ताव कर्नाटक में भी लागू किया गया था और करीब दो महीने तक हुए छात्र आंदोलन के बाद उनकी मांग को मानते हुए प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बीएससी एग्रीकल्चर के कोर्स को बैन कर दिया गया। सीनियर छात्र आशीष सागवाल ने बताया कि कृषि विकास अधिकारी संगठन हरियाणा व भूमि संरक्षण अधिकारी हरियाणा भी बीएससी एग्रीकल्चर के छात्र-छात्राओं के समर्थन में उतर आए हैं। इन संगठनों के सदस्यों ने आज बीएससी एग्रीकल्चर कोर्स के प्राइवेटाइजेशन पर रोक को लेकर हिसार के उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा है। इस मौके पर संगठन के सदस्यों के अलावा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे।
कृषि महाविद्यालय कौल के प्रिंसिपल डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि बीएससी एग्रीकल्चर के विद्यार्थियों की मांग उन्होंने रजिस्ट्रार के माध्यम से एचएयू के उच्चाधिकारियों को अवगत करवाई है।