डीएसपी राजकुमार को आज राष्ट्रपति से मिलेगा सम्मान
उपद्रवियों का डटकर किया था सामना, खेल कोटे से भर्ती डीएसपी 10 दिनों में मामला सुलझाने में माहिर
कमल बहल
कैथल। जिले में दो अप्रैल को हुए उपद्रव में उपद्रवियों के पत्थरों का डटकर सामना करने वाले डीएसपी रामकुमार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित करेंगे। उपद्रव के दौरान डीएसपी ने स्वयं उपद्रवियों के पत्थरों को झेलते हुए टांग पर चोट भी खाई थी। साथ ही अपनी सेवा में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।
सात जिलों में 24 थानों में बतौर इंस्पेक्टर रहे तैनात
डीएसपी रामकुमार ने 16 वर्ष के पुलिस विभाग की ड्यूटी में सात जिलों में 24 थानों में बतौर इंस्पेक्टर तैनात रहकर ड्यूटी कर चुके हैं। इसमें उन्होंने अपहरण, मर्डर, लूट के अन्य सैकड़ों मामलों को वर्कऑउट कर सुलझाया है। वे केवल 10 दिनों में मामला को सुलझाने में माहिर हैं। डीएसपी रामकुमार ने बताया कि वे जिला यमुनानगर के गांव जिनरेहड़ी के निवासी हैं। उन्होंने वर्ष 2002 में खेल कोटे से बतौर एएसआई भर्ती हुए। वे लगातार छह साल तक एएसआई रहे। इसके बाद वे वर्ष 2008 में एसआई बने। एसआई रहते हुए भी कई गंभीर मामलों को सुलझाया। वर्ष 2008 में इंस्पेक्टर बने। इसके बाद उन्होंने सात जिलों के 24 थानों में तैनात रह कई गंभीर मामलों को सुलझाया। इसके बाद 2017 में डीएसपी का पद मिला।
यमुनानगर में बदमाशों को काबू कर दी थी लोगों को राहत
डीएसपी ने बताया कि उन्होंने इंस्पेक्टर रहते हुए यमुनानगर में पांच से अधिक खौफनाक बदमाशों को गिरफ्तार कर लोगों को राहत दी थी। इसके साथ ही वर्ष 2015 में कुरुक्षेत्र में एक व्यापारी के बेटे के अपहरण के मामले बदमाश ने चार करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। इसमें एक महीने से पहले ही बदमाश को गिरफ्तार कर लिया था। अंबाला में दो बदमाशों द्वारा पांच साल के बच्चे की हत्या की थी। उसे महज 20 दिन में सुलझाया था। वे हरियाणा पुलिस में भर्ती होने से पहले सीएसएफआई में चार साल तक बतौर सब इंस्पेक्टर भी रहे चुके हैं।
जूडो के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हैं डीएसपी : डीएसपी रामकुमार ने बताया कि वे जूडो के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने लगातार 15 साल तक इस खेल में विभिन्न प्रतियोगिता में भाग लिया है। वे जूडो में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्लैक बेल्ट भी जीत चुके हैं।
बचपन में पुलिस को देख होता था गर्व महसूस
डीएसपी रामकुमार ने बताया कि जब वे स्कूल में पढ़ाई करते थे तो उन्हें पुलिस की वर्दी में कर्मचारी को देखकर उन पर गर्व महसूस होता था। इसमें उनके अंदर देश सेवा की भावना भी जागृत होती थी। उन्हें नहीं मालूम था कि वे पुलिस की नौकरी करेंगे। उस समय उनका उद्देश्य केवल खेल में बेहतरीन प्रदर्शन करना रहता था। पिछले वर्ष ही पुलिस विभाग में एक बड़े पद पर तैनात हुए और महज एक साल बाद ही उन्हें राष्ट्रपति से पुलिस अवार्ड मिल रहा है तो यह उनके लिए काफी गर्व की बात है और उनमें इसको लेकर उत्साह है।
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