बंद रही कपड़े की होलसेल मार्केट, बाजार में रहा सन्नाटा
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। होलसेल कपड़ा मार्केट एसोसिएशन के आह्वान पर जीएसटी के विरोध में जिले के कपड़ा व्यापारियों ने बुधवार को तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी। दुकानदारों ने अपनी दुकानों को बंद करके रोष जताया।
हड़ताल में भगत सिंह होलसेल क्लॉथ मार्केट एवं कृष्णा क्लॉथ मार्केट के सभी व्यापारी शामिल रहे। उन्होंने जीएसटी का विरोध करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। व्यापारियों का कहना था कि सरकार व्यापारियों के साथ ज्यादती कर रही है। आजादी से लेकर आज तक किसी भी सरकार ने कपड़े पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वयं कपड़ा तैयार किया था। उनके समय से लेकर आज तक कपड़े का व्यापार कर मुक्त था, लेकिन अब सरकार ने कपड़े पर जीएसटी लगाकर व्यापारियों के हितों से खिलवाड़ किया है। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल तीन दिन की है और सरकार ने यदि कपड़े पर लगाए जाने वाले जीएसटी को समाप्त नहीं किया तो वे इस हड़ताल को अनिश्चितकालीन कर सकते हैं।
होलसेल क्लॉथ एसोसिएशन के प्रधान रमेश डेमला ने बताया कि आज जीएसटी के विरोध में पूरे देश में कपड़े की मार्केेट है बंद है। इससे व्यापार तो प्रभावित हुआ ही है साथ में सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान भी हुआ है। व्यापारी दुकानों पर बेचने के लिए कपड़े का आयात दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद, रोहतक व अमृतसर जैसे बड़े शहरों से करते हैं। हड़ताल पर होलसेल क्लास एसोसिएशन के उप प्रधान सोमनाथ ग्रोवर, राकेश चुघ, मदनलाल सुनेजा, देशराज, रामदास मदान, ज्ञानचंद सुनेजा, चंद्र गिरधर, जगदीश, अशोक, मनीष ग्रोवर व अन्य व्यापारी भी मौजूद रहे।
जीएसटी के दायरे में आएगा 70 दुकानों का 28 करोड़ का माल
रमेश डेमला ने बताया कि वर्तमान में कपड़ा व्यापार पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन जीएसटी के लागू होने के बाद 70 होल सेल मार्केट के दुकानदारों का करीब 28 करोड़ रुपये का माल जीएसटी के दायरे में आ जाएगा। जिसका उन्हें बेवजह से टैक्स देना पड़ेगा। जिससे व्यापारियों को काफी नुकसान होगा।
भटकते रहे ग्राहक, एक करोड़ का व्यपार हुआ ठप
जीएसटी के विरोध में कपड़ा व्यापारियों के हड़ताल के ंकारण ग्राहक कपड़े खरीदने के भटकते रहे। इस दौरान पूरे जिला में करीब एक करोड़ रुपये के व्यापार को फटका लगा है।