फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दस साल पहले बनाई गई 40 दुकानें बोली पर छूटी

विज्ञापन
40 shops built - फोटो : Kaithal
विज्ञापन
करीब दस साल पहले चंदाना रोड पर बनाई गई नगर परिषद की 40 दुकानों की चेयरपर्सन कार्यालय मेें बोली हुई। सबसे अधिक ऊंची बोली दुकान नंबर 40 के लिए लगी, जो रेलवे फाटक की ओर से पहली दुकान है। इस दुकान की बोली 4550 रुपये में छूटी। वहीं 39 नंबर दुकान भी 2910 रुपये प्रति माह के किराये पर छूटी। इसके अलावा दुकान नंबर 17 व दुकान नंबर 32 के लिए भी सबसे ज्यादा लोगों ने बोली दी।
विज्ञापन

दुकानों को किराये पर देने के लिए 1000 रुपये न्यूनतम किराया प्रति माह व 20 हजार रुपये की धरोहर राशि का नियम था। जिसके लिए बीस हजार रुपये जमा करवाने के बाद ही बोली के लिए टोकन नंबर दिया गया। दुकान नंबर 1, 7, 8, 11, 19, 20, 21, 22, 23 नंबर दुकान 1010 रुपये प्रति माह के हिसाब से बोली पर छूटीं। वहीं दुकान नंबर 13, 14, 15, 18 1020 रुपये में बोली पर छूटीं। नंबर 2, 5, 9, 10 दुकान 1030 रुपये में, दुकान नंबर 3, 4, 12, 29, 30, 31 1050 रुपये में बोली पर छूटीं। इसके अलावा दुकान नंबर 16 1130, 17 नंबर दुकान 1360, दुकान नंबर 24 व 25 1110 रुपये, दुकान नंबर 26 1100 रुपये, 27 नंबर 1060 रुपये, दुकान नंबर 32 व 33 1550 रुपये में, 34 1440 रुपये में, दुकान नंबर 35 1520 रुपये में, दुकान नंबर 36 1560 रुपये में, दुकान नंबर 37 1610 रुपये, 38 नंबर दुकान 1710, 39 नंबर 2910 व 40 नंबर 4550 रुपये प्रति माह के किराये की बोली पर छूटी।
17 व 32 नंबर दुकान के लिए लगाई सबसे ज्यादा बोलियां- पूरी बोली प्रक्रिया के दौरान दुकान नंबर 17 व 32 के लिए सबसे ज्यादा बोली दाताओं ने बोली लगाईं। जिसमें 17 नंबर दुकान के लिए 27 लोगों ने बोली दी। जो 1360 रुपये में छूटी। वहीं 32 नंबर दुकान के लिए 36 लोगों ने बोली लगाई। यह दुकान 1550 रुपये में बोली पर छूटीं।
विज्ञापन

40 नंबर दुकान छूटी सबसे ज्यादा बोली पर- रेलवे फाटक चंदाना रोड की ओर सबसे पहली दुकान 40 नंबर की है। जो सबसे महंगी 4550 रुपये की बोली पर छूटी। इससे पहले 39 नंबर की दुकान के लिए भी खूब बोलियां लगीं। यह दुकान 2910 रुपये के हिसाब से बोली पर छूटी।
पहले भी हुई थी बोली, किसी ने नहीं ली थी दुकान- करीब दस साल पहले रेलवे लाइन के साथ-साथ सड़क मार्ग बन जाने के बाद सड़कव रेलवे की जमीन के बीच की जगह बचने पर लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए थे। अमर उजाला ने दस साल पहले भी अवैध कब्जों को लेकर समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद नगर परिषद ने यहां दुकानें बनाई थीं। जो बनने के बाद से ही खाली थीं और खंडहरों में तब्दील हो रही थीं। पहले दो-तीन बार बोली आयोजित की गईं। लेकिन कोई भी बोली दाता सामने नहीं आया था। इस बार नगर परिषद के अधिकारी सभी दुकानों की बोली छुड़वाने में सफल रहे।
चेयरपर्सन सीमा कश्यप ने कहा कि नगर परिषद के लिए यह सुखद है कि एक खाली पड़ी प्रॉपर्टी से आय शुरू होगी। करीब 8 लाख रुपये जमा हुए हैं। आगे किराया भी प्रति माह शुरू हो जाएगा। जिससे परिषद की आय बढ़ेगी और लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा। ईओ नगर परिषद बलबीर सिंह ने कहा कि एक हजार रुपये न्यूनतम किराया रखा गया था। जिससे लोगों ने उत्साह दिखाया और उनके पहले ही प्रयास में सभी दुकानें बोली पर छूटी गई हैं।
पूर्व ईओ को भी जाता है श्रेय- खाली पड़ी इन दुकानों में पूर्व ईओ अशोक कुमार ने आटो मार्केट बनाने का फैसला लिया था। उन्होंने पिछले वर्ष के अंतिम माह में इसकी रुपरेखा तैयार कर विभाग को सूचित किया था और बोली भी करवाने वाले थे। जो उनके तबादले के बाद सिरे चढ़ी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें