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Kaithal News: संक्रमित सुई से बढ़ रहे एचआईवी के 40 प्रतिशत केस

Tue, 29 Apr 2025 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिले में एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, प्रति माह 15 से 20 केस मिल रहे हैं। एआरटी सेंटर के अनुसार, इनमें 40 प्रतिशत संक्रमित केस सुई के संक्रमण के कारण आए हैं।

इस वर्ष अभी तक करीब 40 मरीज सामने आ चुके हैं जबकि पिछले साल करीब 170 मरीज आए थे। इन सभी मरीजों का नागरिक अस्पताल में एआरटी सेंटर में इलाज किया जा रहा है।
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गौरतलब है कि एचआईवी एक ऐसा वायरस है जो शरीर के इम्यून सिस्टम पर हमला करता है और उसे इतना कमजोर बना देता है कि हमारी बॉडी किसी दूसरे संक्रमण या बीमारी को झेलने के काबिल नहीं बचती। एक बार इस वायरस की चपेट में आने पर अगर हम समय रहते इसे काबू नहीं पाया गया तो यह एड्स का कारण बन जाता है।

डॉक्टरों के मुताबिक, अभी तक एड्स का कोई पुख्ता इलाज नहीं है। ऐसे में समय रहते इसकी पहचान कर इलाज करवाना की जरूरी हो जाता है। डाॅ. संदीप ने बताया कि यदि कोई भी गर्भवती महिला एचआईवी संक्रमित पाई जाती है और वह लगातार अपना सही ढंग से इलाज करवाए तो उसके बच्चे में एचआईवी संक्रमण जाने से रोका जा सकता है। यही कारण है कि विभाग की ओर से सभी गर्भवती महिलाओं का एचआईवी जांच की जाती है।

स्वास्थ्य विभाग ने एचआईवी पर काबू पाने को लेकर जहां नागरिक अस्पताल में एआरटी सेंटर बनाया गया है तो वहीं कलायत, राजौंद, कैथल और पूंडरी में आइसीपीसी सेंटर भी बनाए गए हंै। मरीजों को काउसंलिंग व दवाइयां मुहैया करवाई जाती हैं।
नियमित दवाई खाने से पाया जा सकता है काबू
जिला नागरिक अस्पताल में बनाए गए एआरटी सेंटर के चिकित्सक डाॅ. संदीप ने बताया कि एचआईवी पर नियमित दवाई खाने से काबू पाया जा सकता है। एआइवी को रोकने के लिए जागरूकता सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि अस्पताल, सीएचसी या पीएचसी में प्रत्येक गर्भवती महिला की एचआईवी जांच की जाती है।
चला रहे जागरूकता अभियान : सीएमओ
सिविल सर्जन कैथल डाॅ. रेनू चावला ने बताया कि अस्पताल में एचआईवी वायरस और एड्स की रोकथाम के लिए लगातार कवायद की जाती है। एआरटी सेंटर में चिकित्सक व अन्य स्टाफ उपलब्ध करवाया गया है। एचआईवी की रोकने के लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है। इसमें लोगों को सचेत किया जाता है।
ऐसे बरतें सावधानी
यदि एचआईवी के लक्षणों की बात करें तो किसी भी व्यक्ति को असुरक्षित यौन संबंध बनाने संक्रमित खून के संकल्प संपर्क में आने इंजेक्शन को शेयर करने आदि से एचआईवी हो सकता है। इसके अलावा बच्चों में यह वायरस मां से फैलता है। गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान मां से बच्चों में एचआईवी फैल सकता है। इसकी मुख्य रूप से तीन स्टेज बताए जाते हैं।
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यदि इसके बचाव की बात करें तो भारत में पहली बार एचआईवी के मामले सेक्स वर्कर में सामने आए थे। इसके बाद यह मामले निरंतर लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में इस गंभीर और जानलेवा वायरस से बचने के लिए सबसे जरूरी सुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। इसके अलावा इंजेक्शन शेयर करने और नशीली दवाओं के उपयोग से भी इसके होने का अंदेशा बढ़ जाता है।
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