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मासूम बच्ची से दुष्कर्म, हत्या का हर राज खोलेंगे 37 गवाह

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कलायत। सात साल की मासूम बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूनम सुनेजा की अदालत में सुनवाई शुरू हुई। पहले दिन चार गवाहों को समन किया गया था लेकिन एक की ही गवाही दर्ज हुई, जिसने सबसे पहले बच्ची के अधजले शव को जंगल में देखा था। इससे पहले मामले में दो नवंबर को पुलिस की ओर से चार्जशीट दायर की गई थी। इस केस में कुल 37 गवाह हैं। इनमें से 10 आमजन और 27 अधिकारी व कर्मचारी हैं।
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घटनाक्रम के अनुसार, आरोपी पवन उर्फ मोनी ने सात साल की बच्ची का अपहरण करके उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर उसका गला दबाकर हत्या कर दी थी। यही नहीं साक्ष्य छिपाने के लिए पेट्रोल डालकर शव को जलाया गया था। वारदात के बाद अगले दिन ग्रामीण दिलबाग सिंह और मोहन ने सबसे पहले जंगल में बच्ची की अधजली लाश को देखा था। इसके बाद पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में सीसीटीवी फुटेज खंगाली तो बच्ची को साथ लेकर जाता आरोपी नजर आया।
शक के आधार पर जब पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की तो उसने वारदात का खुलासा किया। मामले में करीब एक माह पहले आठ अक्तूबर को थाना कलायत में धारा 365, 366, 376-ए बी 302, 201 आईपीसी और धारा छह पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्परता से छानबीन की और एक माह के भीतर ही आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दायर किया। शिकायत पक्ष की ओर से केस की पैरवी कर रहे उप जिला न्यायवादी जयभगवान गोयल ने बताया कि दिलबाग सिंह और मोहन ने सबसे पहले जंगल में बच्ची का शव देखा था। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज में भी बच्ची और आरोपी पवन की पहचान की है। केस की सुनवाई के लिए अगली तारीख 19 नवंबर मुकर्रर की गई है। इस दिन के लिए छह गवाहों को समन किया गया है।
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