सोमवार शाम को शुरू हुई बारिश मंगलवार देर रात तक रुक-रुक कर होती रही। बारिश होने से ठंड बढ़ गई है। लेकिन गेहूं की फसल के लिए उपयोगी बताई जा रही है। यह इस साल की तीसरी बारिश थी, किसानों के लिए यह बरसात सोने से कम नहीं। बारिश के कारण शहर के चौकों पर जाम की स्थिति बनी रही साथ ही गलियों मेें जलभराव के कारण लोगों को परेशानियां बढ़ गई।
बारिश के कारण निचली बस्तियों में लोगों का घरों से निकलना दुर्भर रहा। शहर की कई बस्तियों में कच्ची गलियां लोगों के लिए मुसीबत बन गई। वहीं करनाल रोड, बस स्टैंड के बाहर बरसात लोगों के लिए मुसीबत बन गई। करनाल रोड गोगा माड़ी तक व बस स्टैंड के बाहर सीवरेज डालने के बाद कच्ची सड़क पर बारिश होने से कीचड़ हो गया। इससे पास कॉलोनियों व यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छात्र सुनील, राजू, विक्रम, मनीष, सोनू का कहना है कि वह हर रोज बस स्टैंड से होकर कोचिंग सेंटर जाते हैं। पिछले लगभग एक साल से बस स्टैंड के बाहर थोड़ी सी बारिश होते ही कीचड़ हो जाता है। जिससे यात्रियों को कीचड़ से होकर ही गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस सड़क को सीवरेज डालने के बाद दोबारा बनाया नहीं गया। इससे सड़क पर जमा मिट्टी से बारिश होते ही कीचड़ हो जाता है। यहां से हर रोड हजारों छात्र व छात्राओं का आवागमन होता है। जिन्हें कीचड़ से होकर ही निकलना पड़ता है। इससे उनके कपड़े व बैग कीचड़ के छींटे लगने से धंस जाते है।
सीवर बंद होने से सड़कों पर जमा पानी- वहीं बारिश से शहर में कई जगहों पर सीवर के बंद होने से सड़कों व गलियों पर पानी जमा हो गया। अनाज मंडी, करनाल रोड जाट कॉलेज के पास, न्यू छोटू राम चौक के पास व शहर में कई जगहों पर पानी जमा होने से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
औसतन एमएम हुई बारिश- राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सदर कानूनगो पूर्ण सिंह ने बताया कि सबसे ज्यादा बरसात राजौंद क्षेत्र में 10 एमएम दर्ज की गई। इसके अलावा गुहला क्षेत्र में दो एमएम जो कि सबसे कम बारिश दर्ज हुई है। इसके अलावा कैथल में 7 एमएम, पूंडरी में 03 एमएम, सीवन में 06 एमएम, ढांड 04 एमएम व कलायत में 04 एमएम बरसात हुई है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा ने बताया कि बरसात के बाद जिले का अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार को भी बारिश होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं बारिश गेहूं की फसल के लिए लाभकारी है। मौसम में जितनी नमी होगी गेहूं के पौधे में उतना ही अधिक फुटाव होगा। इससे अधिक पैदावार होगी।