अतिथि अध्यापकों में जिस बात का डर था, वही आदेश जारी हो गए। सोमवार को जिले में कार्यरत 333 अतिथि अध्यापकों को हटाने का फरमान जारी कर दिया गया। जिस कारण जिले में अतिथि अध्यापकों के परिवारों की रोजी-रोटी छिन गई है। कई परिवारों में तो पति-पत्नी दोनों ही अतिथि अध्यापक थे और इन आदेशों के तहत हटा दिए गए हैं। अतिथि अध्यापक संघ ने इन आदेशों के विरोध में डीईओ कार्यालय का घेराव कर रोष प्रदर्शन किया।
सोमवार को शिक्षा विभाग द्वारा जिले में कार्यरत 383 अतिथि अध्यापकों को हटाने के आदेश जारी किए गए। लेकिन इनमें से 50 अध्यापक पहले ही अलग-अलग कारणों से नौकरी छोड़ चुके हैं। शेष 333 अध्यापकों को भी तुरंत प्रभाव से हटाने के लिए आदेश जारी किए गए हैं। हटाए गए अध्यापकों में सामाजिक अध्ययन के 181 गणित के 101 व हिंदी के 51 अध्यापक शामिल हैं। जिसके लिए सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया गया है।
ब्लॉक अनुसार गुहला-चीका में सामाजिक अध्ययन के 26, गणित के 17, हिंदी के 7, सीवन सामाजिक अध्ययन के 22, गणित के 11 व हिंदी के 7, कैथल सामाजिक अध्ययन के 35, गणित के 28, हिंदी के 8, राजौंद के सामाजिक अध्ययन के 30, गणित के 14 एवं हिंदी के 7, कलायत के सामाजिक अध्ययन के 31, गणित के 16 व हिंदी के 9, पूंडरी के सामाजिक अध्ययन के 64, गणित के 25 व हिंदी के 11 अतिथि अध्यापक शामिल हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी डा. अशोक कुमार ने कहा कि 383 अध्यापकों को हटाए जाने के आदेश मिले हैं। जिसमें से कुछ अध्यापक पहले ही नौकरी छोड़ चुके हैं। जितने भी शेष बचे हैं। सभी अध्यापकों को हटाने के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं कि वे उन्हें इस बारे में सूचित कर दें।
अतिथि अध्यापकों ने किया डीईओ कार्यालय का घेराव
कैथल। सरकार द्वारा अतिथि अध्यापकों को हटाए जाने के निर्णय के खिलाफ अतिथि अध्यापक संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव करते हुए प्रदर्शन किया। अध्यापकों ने कहा कि वर्कलोड होते हुए भी इन अध्यापकों को हटाया जा रहा है। जो सरासर अन्याय है। सरकार रोजगार छीनकर इन परिवारों के सामने भूखा मरने का रास्ता छोड़ रही है। जिला प्रधान मास्टर सुभाष चंद ने कहा कि हरियाणा सरकार ने अतिथि अध्यापकों की पीठ में छुरा घोंपते हुए 4073 अध्यापकों को हटाकर उनसे जुड़े परिवारों को बेघर कर दिया है।
वहीं हरियाणा अध्यापक संघ 70 के राज्य चेयरमैन कुलभूषण शर्मा ने कहा कि आज का दिन इतिहास में काले दिवस के रुप में जाना जाएगा। दस वर्षों से कार्यरत अध्यापकों को बिना किसी सुविधा के सड़क पर ला खड़ा किया है। हरियाणा अध्यापक संघ के राज्य संगठन सचिव मा. बलबीर सिंह व जिला प्रधान सतबीर गोयत ने कहा कि यह एक अन्यायपूर्ण फैसला है।
वहीं महिला विंग की पूंडरी ब्लॉक की प्रधान रामरति देवी ने कहा कि एक ओर सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। वहीं पढ़ी-लिखी बेटियों को बेघर करने का काम कर रही है। अध्यापकों में कृष्ण शर्मा, विकास राविश, विनोद कुमार, रमेश, राजीव सैनी, संदीप बालू, भूपेंद्र मलिक, वृषभान, नरेश भाणा, तेजपाल बात्ता, राजदुलारी, निर्मल, सुदेश, प्रमोद, माया, सुमन, वंदना सहित अन्य ने रोष प्रकट किया।
नहीं थे सरप्लस
अतिथि अध्यापक संघ का कहना है कि कैथल में हटाए गए अतिथि अध्यापक सरप्लस नहीं थे। अध्यापक संघ का कहना है कि सामाजिक अध्ययन के 101 में से 14 सरप्लस पाए गए हैं। जबकि 87 का वर्कलोड है। लेकिन सभी को हटा दिया गया। इसी प्रकार सामाजिक अध्ययन के 40 सरप्लस पाए गए हैं। जबकि 181 को हटाया जा रहा है। हिंदी में केवल 12 सरप्लस हैं। वहीं हटाया 51 को जा रहा है।