भीतर-भीतर छुप-छुप कर रो लेते हैं बाबू जी, अपने दिल की व्यथा, कथा को कब कहते हैं बाबू जी...
एक शाम महाराजा अग्रसेन के नाम कार्यक्रम में देर रात तक छूटते रहे हंसगुल्ले, कवियों ने देशभक्ति सहित समसामयिक विषयों पर पढ़ी कविताएं
फोटो संख्या-4 से 6
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रविवार की रात भाई उदय सिंह के किले पर रात्रि बारह बजे तक माहौल कभी देशभक्ति से जुड़ा तो कभी हास्य रस के सागर में लोग डुबकी लगाते नजर आए। मौका था अग्रवाल वैश्य सभा द्वारा एक शाम महाराजा अग्रसेन जी के नाम कार्यक्रम में हास्य कवि सम्मेलन का। कवयित्री रीतू गोयल की रिश्तों पर कविता पाठ भीतर-भीतर छुप-छुप कर रो लेते हैं बाबू जी, अपने दिल की व्यथा कथा को कब कहते हैं बाबू जी... ने खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देव ने अपना संदेश दिया।
कार्यक्रम में सबसे पहले श्याम सुंदर गौड़ और स्वर्णजीत कौर द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। एसएस बाल सदन स्कूल के छात्राओं के द्वारा प्रस्तुत कोरियोग्राफी प्रस्तुत किया।
महामहिम आचार्य देवव्रत ने कहा महाराजा अग्रसेन एक ऐसे समाज प्रवर्तक हुए जिन्होंने समाज को एक रुपया और एक ईट का सिद्धांत दिया। समाजसेवी संदीप गर्ग लाडवा और सतीश बंसल ने कहा कि वर्ग को साथ लेकर चलने वाला व्यक्ति ही अग्रवाल है।
कार्यक्रम में दिल्ली के आम आदमी पार्टी के दो विधायकों कैथल निवासी महेंद्र गोयल व सुरेंद्र कमांडो भी पहुंचे। उद्योगपति मुकेश गर्ग लाडवा एवं चेयरमैन वेयर हाउसिंग निगम निवास गोयल ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। उनके अलावा विशिष्ट अतिथि के रूप में सुशीला सर्राफ, डॉ. डीपी गुप्ता, डा. विजय आर्य, विजय गुप्ता, रामनिवास मितल, सुरेंद्र सिंगला, पारस मितल, आरकेएसडी कॉलेज प्रबंधक समिति के अध्यक्ष साकेत मंगल, एडवोकेट, कृष्ण बंसल, रवि मित्तल, कृष्ण बंसल, डॉ. जसजीत सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ महाराजा अग्रसेन के पावन चरणों में दीप प्रज्वलित करके किया गया। सभा के प्रधान रविभूषण गर्ग ने आए हुए मेहमानों को पुष्पकुंज देकर उनका स्वागत किया।
कवियों की रचनाओं से कई बार गंभीर हुआ माहौल : कवि सम्मेलन में राजेश चेतन, सुदीप भोला, गजेंद्र सोलंकी एवं रीतू गोयल ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को खूब हंसाया और देश की चुनौतियों पर सोचने को भी मजबूर कर दिया। सुदीप भोला ने सैनिकों की वर्दी को लेकर पढ़ी कविता वर्दियां ये वर्दियां ये सैनिकों की वर्दियां... पर खूब वाहवाही लूटी। राजेश चेतन ने हंसने का महत्व बताते हुए कहा कि अस्पताल में लिखा एक शेर पढ़ा कि.. अगर खोल लेते दिल हंस बोल के यारों के साथ तो हमें न खोलना पढ़ता आज औजारों के साथ। अंत में कविता पाठ करने आये गजेंद्र सोलंकी ने खूब समां बांधा। उन्होंने हास्य राजनीतिक और देशभक्ति से ओत प्रोत कविता प्रस्तुत की। चेयरमैन धर्मवीर केमिस्ट ने आए हुए सभी मेहमानों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर प्रथम सिंगला, आयुष गर्ग, राजीव गर्ग, सुशील बिंद्लिश, प्रवीन चौधरी, नवीन गर्ग, गौतम बंसल चन्द्र प्रकाश गोयल, प्रेम सिंगला, अनुज गोयल, चन्द्रगुप्त गोयल आदि मौजूद रहे।