ऑपरेशन के लिए बाहर से मंगवाया 10 हजार से अधिक का सामान, 2000 रुपये अलग से वसूले
सेना के जवान के भाई ने लगाया आरोप, मांगने पर नहीं दिया बिल, परिजनों पर झूठा केस दर्ज करवाने की धमकी देने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिला अस्पताल में कंधे के ऑपरेशन के लिए अस्पताल से बाहर से उपकरण व सामान मंगवाए जाने और 2000 रुपये अलग से वसूली करने की शिकायत मरीज ने डीसी सहित आला अधिकारियों व स्वास्थ्य मंत्री को भेजी है। मरीज ने परिजनों पर झूठा केस दर्ज करवाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। वहीं डॉक्टर ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए मरीज और सामान देने वाली फर्म के बीच का विवाद बताया है। शिकायत के बाद सुबह एसडीएम ने दौरा कर जिला अस्पताल के बाहर बने कमरे को सील करवा दिया। पूरे मामले की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
गांव बालू निवासी सतीश कुमार ने शिकायत दी है कि वह जिला अस्पताल में अपने कंधे में दर्द के इलाज के लिए आया था। वहां हड्डियों के डॉक्टर अमन सूद ने उसे कहा कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। उन्होंने एक नंबर देकर सामान के लिए बात करने की बात कही। इस पर संबंधित व्यक्ति को फोन करने पर एक युवक उनके पास आया और कहा कि सामान डॉक्टर के पास पहुंच गया है। इसके लिए 10300 और बिना बिल के 9800 रुपये में दीजिए। उन्होंने सामान के लिए भुगतान कर दिया। उसे ऑपरेशन के लिए उसे थियेटर में ले जाकर फिर से 2000 रुपये मांगे गए। उसने अपने भाई जवान को बुलाया। उसने 2000 रुपये दिए, तब जाकर ऑपरेशन हुआ। उसे होश में आने के बाद पता चला कि इसके बाद उसके भाई ने जब बिल मांगा तो डॉक्टर ने स्टाफ से बदतमीजी करने व ड्यूटी में बाधा पहुंचाने के आरोप में केस दर्ज करवाने की धमकी दी। उसने अपनी शिकायत में मांग की कि इलाज के लिए बाहर से महंगा सामान मंगवाए जाने, झूठा केस दर्ज करवाने की धमकी देने व रिश्वत राशि वसूलने के आरोप में आरोपी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
वहीं डा. अमन सूद ने कहा कि रात को जब वे राउंड कर रहे थे तो एक युवक स्टाफ से बदतमीजी कर रहा था। उन्होंने पुलिस को बुलाया, लेकिन रात को समझौता हो गया। मेरा काम केवल ऑपरेशन करना था। न उन्होंने मरीज को कोई नंबर दिया और न ही सामान देने वाली फर्म से उनका कोई लेना-देना। ना ही किसी से कोई रुपये लिए। 2000 रुपये बेहोशी के डॉक्टर को दी जाने वाली फीस है। लेकिन यह फीस भी प्राइवेट डॉक्टर द्वारा ली जाती है। उन्हें केवल इसीलिए इस मामले में घसीटा जा रहा है कि उन्होंने दुर्व्यवहार करने पर पुलिस बुला ली थी।
सुबह इस पूरे विवाद की शिकायत आला अधिकारियों तक पहुंच गई। एसडीएम कमलप्रीत कौर अस्पताल के बाहर बने एक कमरे के निकट पहुंची। जो बंद पड़ा था। बताया जा रहा है कि इसी कमरे से ऑपरेशन का सामान व दवाएं अस्पताल में सप्लाई होती हैं। इस कमरे के बाहर न तो किसी केमिस्ट या फर्म का बोर्ड है और न ही कोई कांटेक्ट नंबर। किसी से युवक का नंबर लेकर संपर्क किया गया तो उसने कहा कि वह चंडीगढ़ में है। इसके बाद इस कमरे को सील कर दिया गया।
अस्पताल इंचार्ज डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि एक मरीज द्वारा शिकायत करने की बात पता चली है। इसके बाद सीएमओ सहित एसडीएम ने दौरा किया है। डा. चावला की अगुवाई में जांच कमेटी बना दी गई है। जांच में सब कुछ सामने आ जाएगा। बिना बोर्ड के कोई भी फर्म कमरे में दवाएं नहीं रख सकती। वहीं डा. चावला ने कहा कि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट शीघ्र दे दी जाएगी। स्टॉफ से दुर्व्यवहार संबंधी शिकायत की उन्हें जानकारी नहीं है।
उसी फर्म से मंगवाया गया है सामान
हड्डियों के ऑपरेशन के बाद इसी वार्ड में दाखिल कई मरीजों व उनके परिजनों ने कहा कि उनसे भी इसी फर्म से सामान मंगवाया गया है। बताया जा रहा है जो बिल काट कर दिए गए हैं, वे भी नियमानुसार नहीं कटे हुए। इस पूरे मामले की जांच हो तो कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
मुख्यालय तक सूचना पहुंचने की संभावनाएं
इस पूरे प्रकरण में जिले में गुप्तचर विभाग सक्रिय नजर आया। विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रदेश मुख्यालय तक पूरे प्रकरण की सूचना पहुंच गई है। इस मामले में आला स्तर पर भी जांच के आदेश जारी हो सकते हैं।
सामान के पैसे भी लौटाए
वीरवार रात्रि दवा सप्लायर ने मरीज के परिजनों से जब 10300 रुपये मांगे और बताया कि बिना बिल के 9800 रुपये भी दे सकते हैं। लेकिन परिजनों ने जीएसटी सहित बिल मांगा गया तो दवा देने आए व्यक्ति के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। मामले को बढ़ता देख सप्लायर ने परिजनों को 9800 रुपये वापस कर दिए। सवाल उठता है कि यदि उपकरणों के लिए यह राशि अधिकृत तौर पर ली गई है तो इसका जीएसटी सहित बिल क्यों नहीं दिया गया और यह राशि वापस क्यों दी गई। इसके अलावा रात को पुलिस बुलाए जाने की बात कही जा रही है तो शुक्रवार दोपहर बाद भी एसएचओ सिविल दुर्व्यवहार संबंधी किसी शिकायत के मिलने की बात से इनकार कर रहे थे।
कमरे सील करने के निर्देश
शिकायत के बाद वे जिला अस्पताल व उसके बाहर बने कमरे के बाहर पहुंचीं थीं। कमरे को सील करने के लिए व पूरे मामले की जांच के लिए सीएमओ को कहा गया है।
- कमलप्रीत कौर, एसडीएम
गलत मिला तो बख्शा नहीं जाएगा
जिला अस्पताल के बाहर के कमरे को सील करवा दिया है। साथ ही डॉक्टर पर लगे आरोपों के अलावा अस्पताल के बाहर इस कमरे से सप्लाई हो रही दवाओं व उपकरणों को लेकर जांच कमेटी बना दी है। यदि कुछ गलत मिला तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
डॉ. सुरेंद्र नैन, सीएमओ
निष्पक्ष जांच को कहा
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीएमओ को कहा गया है।
-पार्थ गुप्ता, एडीसी
फोटो संख्या-21 से 26