बिजली विभाग में हुए 25 लाख से अधिक के घोटाले में कार्रवाई शून्य
तीन साल से चल रही है जांच, आरटीआई में भी नहीं दी जा रही कोई जानकारी
- अवैध रूप से रखे गए सामान को लेकर बिजली विभाग की विजिलेंस टीम ने 1 जुलाई 2015 को बरामद किया था सामान
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। वर्ष 2015 में बिजली विभाग में उजागर हुए करीब 25 लाख रुपये के सामान के गबन के मामले में कोई कार्रवाई न होने से जांच पर सवाल उठाए हैं। मामले का खुलासा करने वाले व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि आरटीआई से भी मामले की कोई जानकारी नहीं दी जा रही। जिससे संभावनाएं हैं कि पूरा विभाग इस मामले में दबाने व इसमें शामिल लोगों को बचाने में जुटा है।
आरटीआई एक्टिविस्ट सतीश सिंगला ने बताया कि गांव क्वारतन निवासी धन सिंह ने विभाग को शिकायत दी थी कि गांव कुप्पियां वाले डेरे में विभाग का अवैध रूप से सामान एकत्रित किया जा रहा है। जिसमें बिजली विभाग का लगभग 25 लाख रुपये का सामान है। इस शिकायत के बाद बिजली निगम की विजिलेंस टीम ने 1 जुलाई 2017 को छापा मार कर वहां से सामान बरामद कर लिया था। जिसे थाना सदर में रखा गया था। इसके बाद इस मामले में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। धन सिंह ने बताया कि कार्रवाई के नाम पर केवल इतना कहा जाता है कि मामले की जांच चल रही है। यह जांच कब तक चलेगी, कोई पता नहीं। इस बारे में आरटीआई भी लगाई गई। आरटीआई में अपील करते हुए वे सूचना आयुक्त तक पहुंच गए हैं। सूचना आयुक्त को भी विभाग आज तक कोई सूचना नहीं दे रहा है। जिस कारण पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। सीवन के इस एरिया में यह सामान ठेकेदारों को बेचने के लिए एकत्रित किया जा रहा था।
सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति की बात करती है। ऐसे में सरकार से मांग है कि इस मामले में जांच पूरी करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।