अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर की 12 से अधिक कॉलोनियों को अवैध घोषित किए जाने के बाद यहां विकास कार्य तो रुक गए हैं। लेकिन यहां के निवासियों का सवाल है कि जब इन कालोनियों में उनके वोट बन सकते हैं। वे वैध वोटर हैं तो फिर कालोनी अवैध क्यों हैं? इन कालोनियों को मान्यता क्यों नहीं दी जा रही। यहां बदहाल गलियों, सीवरेज, पेयजल व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत है।
शहर के अंबाला रोड पर बसी वार्ड नंबर सात की कॉलोनी राजौरी गार्डन के लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने वैध कॉलोनियों को अवैध घोषित किया गया है। लेकिन यहां पर रहने वाली 80 प्रतिशत आबादी के वोट बने हुए हैं। जब कॉलोनी में वोट वैध तो यहां पर हने वाले लोगों के लिए कॉलोनी अवैध कैसे हो गई? इस पर वह सरकार के खिलाफ रोष प्रकट करते है।
कॉलोनी में यह है समस्याएं : कॉलोनीवासी मास्टर सतबीर ने बताया कि कॉलोनी में 80 प्रतिशत गलियां कच्ची हैं। जिससे बरसात के समय यहां से गुजरना भी दुर्भर हो जाता है। यहां पर सीवरेज व्यवस्था तो है। लेकिन केवल यह नाम की है। सीवरेज की पाइपलाइन को भी व्यवस्थित ढंग से नहीं बिछाया गया है। जिस कारण यहां हमेेशा बदबू का आलम रहता है।
एकमात्र डस्टबिन, सफाई व्यवस्था भी नहीं : कॉलोनीवासी रामकुमार फौजी ने बताया कि कॉलोनी में 200 से अधिक घर बसे है। पूरी कॉलोनी में एकमात्र डस्टबिन रखा गया है। जिस कारण यहां पर गंदगी का आलम रहता है। यहां पर परिषद द्वारा डोर टू डोर कचरा उठाने वाला वाहन भी नहीं आता है। लोगों को काफी परेशानी होती है।
25 साल से बसे, अब सरकर ने किया अवैध : कॉलोनीवासी ओमप्रकाश व सोहन लाल ने बताया कि इस कॉलोनी को शहर के नक्शे पर आए 25 से अधिक वर्ष हो चुके है। लेकिन भाजपा सरकार ने इसे अवैध घोषित कर दिया। वे भाजपा सरकार का इस पर विरोध करते है। सरकार उनकी समस्या का जल्द समाधान करे।
नाम राजौरी गार्डन, सुविधाएं गार्डन सी भी नहीं : कॉलोनी को अवैध किए जाने पर सरकार पर तंज कसते हुए महिला राजविंद्र कौर ने कहा कि सरकार ने इस कॉलोनी का नाम तो दिल्ली की राजौरी गार्डन रखा गया है। लेकिन यहां पर सुविधाएं तो गार्डन जैसी भी नहीं है। यहां पर न तो पेयजल आपूर्ति ठीक ढंग से हो रही है और न बिजली की सुविधा। ऐसे में यह कॉलोनी राजौरी गार्डन कैसे हुई।
ग्रीन बेल्ट का बहाना बना किया अवैध घोषित : महिला राजकुमारी, सावित्री व रेनू ने कहा कि कुछ महीने पहले सरकार ने इस कॉलोनी को ग्रीन बेल्ट में स्थापित होने का बहाना बनाकर अवैध घोषित किया गया है। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। ग्रीन बेल्ट में जो जगह थी वहां पर सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग के पुुल को बना दिया है।
इन कॉलोनियों भी किया गया अवैध : बता दें कि राजौरी गार्डन कॉलोनी के साथ साथ प्यौदा रोड दोनों ओर भगत सिंह कॉलोनी पार्ट वन, बलराज नगर, कुतुबपुर दोनों ओर, देवीगढ़ कॉलोनी सहित अन्य कॉलोनियां शामिल है। जिन्हें अवैध घोषित करने के बाद यहां चल रहे निर्माण कार्यों को रोक दिया गया है।
50 लाख से अधिक के विकास कार्यों के टेंडर पर काम आगे नहीं बढ़ा : पार्षद प्रवीण कुमार ने कहा कि पिछली सरकार में शहर की दर्जनों कालोनियों में काम हुए हैं। अब इन कालोनियों में निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। जब पहले काम हो सकते हैं तो अब क्यों नहीं? लोग उनसे यही सवाल पूछते हैं। वे लोगों को क्या जवाब दें। करीब 7 वार्डों की ऐसी कालोनियों के लिए 50 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्यों के टेंडर लगे थे। जिनके लिए वर्क परमिट नहीं मिला।
पार्षद प्रतिनिधि बलजीत रंगा ने कहा कि उनके वार्ड में शुगर मिल कालोनी, रणधीर कालोनी, ऑक्सफोर्ड स्कूल के पास की कालोनी में करोड़ों रुपये के काम किए जाने की जरूरत है। यहां सीवरेज अधूरे पड़े हैं, गलियां कच्ची हैं, बिजली के कनेक्शन भी नहीं दिए जा रहे हैं। ऐसे में लोग परेशान हैं। सरकार इन लोगों की ओर ध्यान दे।
पार्षद वेदप्रकाश ने कहा कि उनके वार्ड में जींद रोड बाईपास, प्यौदा रोड पर कालोनियों में लाखों के काम लटक गए हैं। गलियां कच्ची पड़ी हैं। सीवरेज में गंदगी फंसी रहती है। लोगों को बदबू में जीना पड़ रहा है।
सरकार का निर्देश है कि वैध कालोनियों में ही विकास कार्य करवाए जाएं। अवैध कालोनियों में काम करवाए जाने के संबंध में उनके पास अभी कोई आदेश नहीं हैं।
डीसी, सुनीता वर्मा
सरकार के कुछ नियम हैं। जिनका पालन किया जाना जरूरी है। इन कालोनियों को नियमित करवाए जाने की दिशा में काम करेंगे। सरकार से मांग की जाएगी कि कालोनियों को वैध करे। ताकि यहां विकास कार्य करवाए जा सकें।
राव सुरेंद्र सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता
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फोटो नंबर-28 से 35