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नोटबंदी के बाद बाजार में लेन देन नहीं लौटा पटरी पर

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दुकानदार बोले- भ्रष्टाचार में आई कमी पर व्यापार नहीं लौटा पटरी पर
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नोटबंदी पर लोगों की मिलीजुली राय सामने आ रही है। कुछ का कहना है कि, एक वर्ष बीत जाने के बाद भी नोटबंदी दर्द दे रही है। दुकानदारों का कहना है कि, बाजार में लेन देन पटरी पर नहीं लौटा है। एक हजार रुपये के नोट बंद होने के बाद से छुट्टों के अभाव में दुकानदारों का धंधा मंदा है। कैश की कमी के कारण दुकानदारों को मॉल खरीदने में अधिक समय लगता है। जिसके चलते उन्हें काफी परेशानी को उठाना पड़ रहा है। हलांकि कुछ का यह भी कहना है कि नोटबंदी भ्रष्टाचार पर चोट और कालेधन पर रोक के लिए एक सराहनीय कदम है, लेकिन सरकार समस्या के समाधान के कदम उठाए।
कैश की कमी से व्यापार प्रभावित:-दुकानदार हर्ष धमीजा ने बताया कि नोटबंदी के एक साल के बाद भी व्यापार ठीक ढंग से पटरी नहीं लौटा है। उसने बताया कि व्यापार कम हुआ है। नोटबंदी का साल बीतने के बाद व्यापारी कैश की कमी के कारण ठीक ढंग से नहीं व्यापार नहीं कर पा रहा है।
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नोटबंदी से काफी नुकसान :-शहरवासी तेजिंद्र भाटिया ने बताया कि नोटबंदी ने देश के लोगों को काफी कठिनाई में डाला में है। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है, बल्कि कई परेशानी बढ़ गई है। बताया कि नोटबंदी के काफी नुकसान हैं, जिसमें कैशलेस सिस्टम होने के बाद से धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ गई हैं।
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चुनावों में नकली नोटों का धंधा खत्म हुआ:-सामाजिक कार्यकर्ता ओमप्रकाश मुटरेजा ने बताया कि नोटबंदी के कारण लोगों को बेशक कुछ परेशानियां हुई हो लेकिन नोटबंदी के फैसले के बाद से राजनेताओं के कालेधान पर रोक लगी है और भ्रष्टाचार में भी कमी आई है। चुनावों में नकली नोटों का धंधा अपने उफान पर होता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। जब से नए नोट आए नकली नोटों का कारोबार खत्म हुआ है।
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