संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में पराली प्रबंधन को लेकर किसान जागरूक है। जिले में अब तक लगभग 30 हजार एकड़ में फसल की कटाई हो चुकी है। लेकिन अब तक जिले में फसल अवशेषों में आग लगाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है, बल्कि किसान जो फसल अवशेष (फाने) बचे जाते हैं उन्हें कृषि यंत्रों की सहायता से जमीन में ही मिला दिया जाता है। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और वातावरण साफ सुथरा रहता है। किसान इस बारे फानों को बहाकर जमीन में ही मिला रहे हैं।
विदित रहे कि जिले में अब तक बीते चार वर्षों में 7427 कृषि यंत्र किसानों को अनुदान पर दिए जा चुके हैं। वहीं इस बार 2532 कृषि यंत्र किसानों को वितरित किए गए हैं। अब जिले में कुल 9959 कृषि यंत्र किसानों के पास उपलब्ध है। जिनसे जिले में पराली प्रबंधन का कार्य किया जा रहा है। पराली का बंडल बनाने वाले किसान अमरजीत, संदीप सांघन, रमेश कुमार ने कहा कि किसान में डिजिटलाइजेशन आने के बाद जागरूकता आई है। अब जिले के कोई भी किसान फसल अवशेषों में आग नहीं लगाते हैं। किसान अब पर्यावरण को साफ सुथरा बनाने में मदद करते हैं।
सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने कहा कि कृषि विभाग की ओर से किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन बारे समय समय पर जागरूक किया जाता है और किसानों को विभाग की ओर से अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए जाते हैं। ताकि किसान फसल अवशेष प्रबंधन कर सके। उन्होंने कहा कि किसानाें को पराली का प्रबंधन करने पर सरकार की ओर से एक हजार रुपये प्रति एकड़ दिया जाता है। इससे किसानों को दोहरा फायदा होता है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. महावीर सिंह ने कहा कि विभाग की ओर से किसानों को इस वर्ष 2532 कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। जिले के किसानों अब पराली का प्रबंधन करने लगे है। जिले में लगभग 30 हजार एकड़ की कटाई हो चुकी है। लेकिन अब तक फसल अवशेषों में आग लगाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
आग लगाने की नहीं होनी चाहिए कोई घटना : डीसी
कैथल। लघु सचिवालय स्थित सभागार में फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर समीक्षा बैठक लेकर डीसी ने कृषि अधिकारियों की बैठक ली और जिले में पराली न जलने देकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। डीसी ने कहा कि जिला को जीरो बर्निंग का लक्ष्य लेकर पराली में आग लगाने की कोई भी घटना नहीं घटनी चाहिए। फानों में आग लगाने वाले किसानों पर जुर्माने के साथ-साथ एफआईआर दर्ज की जाए और साथ ही उन्हें भविष्य में सरकार की योजनाओं से वंचित किया जाए। सभी गठित कमेटियां गांवों में रह कर निरंतर मॉनिटरिंग करें और किसानों को फाने नहीं जलाने के बारे में जागरूक भी करें। गांव स्तर पर पटवारी, संबंधित सरपंच, नंबरदार, ग्राम सचिव, पुलिस व कृषि विभाग का कर्मचारी, चौकिदार की कमेटी गठित की गई है, जो कि संबंधित गांवों में रहकर ही किसानों को जागरूक करेगी। संवाद