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2360 में से 2224 शिकायतों को बिना मामला दर्ज किए निपटाया

Tue, 07 Feb 2017 12:14 AM IST
ब्यूरो कैथल
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नहीं मिली महिला हेल्पलाइन में ज्यादा सफलता - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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छह माह पहले शुरू की गई उपमंडल स्तरीय महिला हेल्प लाइन महिलाओं के लिए ज्यादा हेल्पफुल साबित नहीं हो पा रही। महिलाओं को अपनी समस्याओं के लिए जिलास्तर पर ही शिकायतों के निपटारे के लिए आना पड़ रहा है। जिला महिला थाने में पिछले डेढ़ साल में 2360 शिकायतें आईं, जिसमें से पुलिस ने 136 केस दर्ज किए। वहीं 2224 शिकायतों को आपसी समझौते से निपटा दिया गया। वहीं स्कूल कॉलेजों के बाहर महिला पुलिस बल अभी भी नदारद है। जिस कारण छात्राओं को मंजनुओं से होने वाली समस्याएं ज्यों की त्यों बनी हुई हैं।
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करीब डेढ़ वर्ष पूर्व जिले में महिला थाना की शुरुआत की गई थी। इसके बाद पिछले साल अगस्त माह में रक्षाबंधन के अवसर पर कलायत व गुहला में महिला हेल्प लाइन शुरू की गई थी। इसके तहत दोनों पुलिस थानों में एक हेड कांस्टेबल व दो होमगार्ड नियुक्त किए गए थे। इनकी नियुक्ति का केवल एक फायदा यह हुआ है कि दोनों थानों में पुलिस कर्मचारी महिला संबंधी मामलों में इन कर्मचारियों को साथ लेकर जाते हैं। कलायत में अभी तक 23 शिकायतें आई है। जिसमें से केवल एक ही मामले में केस दर्ज किया गया है। इसी प्रकार गुहला में महिला हेल्प लाइन ज्यादा कारगर साबित नहीं हो पाई। महिलाएं अपनी शिकायतों के लिए जिला महिला थाने में ही आती हैं।

2360 शिकायतों में 136 केस दर्ज
वर्ष 2015 में महिला थाना खुलने के बाद करीब डेढ़ साल के बाद अभी तक 2360 शिकायतें आई है। जिसमें से 136 मामलों में केस दर्ज किए गए हैं। जबकि 2224 मामलों में महिला पुलिस ने आपसी सहमति से समझौता करवा दिया। दर्ज हुए मामलों में 29 मामले दहेज प्रताड़ना, 22 मामले दुष्कर्म, 21 मामले छेड़छाड़, तीन मामले अपहरण के दर्ज किए गए हैं।
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1091 नंबर पर अभी तक आई है 1100 शिकायतें
महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए हेल्प लाइन नंबर 1091 में महिला थाना खुलने के बाद अभी तक 1100 से अधिक शिकायतें आई हैं। जिसमें स्कूल की छात्राएं बस व ऑटो में शरारती तत्वों के बारे में जानकारी देती हैं। जिसे लेकर महिला पुलिस कई मामलों में मौके पर पहुंचकर उनकी मदद भी करती है। 1091 नंबर के लिए महिला थाना में एक सेल बनाया हुआ है।
 
स्कूल-कॉलेजों के बाहर नहीं दिखतीं महिला पुलिस कर्मचारी
तमाम प्रयासों के बावजूद शहर में स्कूल-कॉलेजों में आते-जाते समय छात्राओं की परेशानियां कम नहीं हो पा रही हैं। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सहित करनाल रोड व अंबाला रोड पर कॉलेजों के बाहर कई बार युवकों की भीड़ उमड़ी रहती है। जिसमें से कई शरारती युवक छात्राओं को परेशान करते हैं।
छात्रा पूनम, सोनिया, हीना, योगिता, वर्षा, काजल, मनीषा ने बताया कि शहर की सड़कों पर महिला पुलिस दिखाई नहीं देती है। कॉलेजों व स्कूलों के बाहर शरारती तत्व बाइकों पर सरेआम छेड़छाड़ करते देखे जाते हैं। स्कूल कॉलेजों के बाहर आकर पुलिस को हालात की जानकारी लेनी चाहिए।

महिला थाना बनने के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम में मदद मिली है। रही बात स्कूल-कॉलेजों के बाहर की तो कई बार दौरे किए जाते हैं। जो भी शिकायतें आती हैं। उनका समाधान करवाया जाता है। 130 महिला सरपंचों को व्हॉट्सएप से जोड़ा गया है।
निर्मला, एसएचओ, महिला थाना

यदि स्कूल-कॉलेजों के बाहर परेशानी है तो उसके लिए ड्यूटी लगाई जाएगी। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम निकल रहा है। महिला हेल्पलाइन को और अधिक कारगर बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
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सुमेर प्रताप सिंह, एसपी कैथल
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