टीचर बहू की रिटायरमेंट पार्टी में शामिल होने आई सास ने स्कूल को दिए एक लाख, बोलीं-
बेंच अच्छे नहीं है, बच्चों के लिए बढ़िया फर्नीचर लाओ
फोटो संख्या-39
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। सरकारी प्राइमरी स्कूल में हेड टीचर के रूप में सेवा निवृत्त हो रही अपनी बहु की रिटायरमेंट पार्टी में शामिल होने आई सास इतनी भाव विह्वल हो गई कि अपने बैग से एक लाख रुपये निकाले और स्कूल के स्टाफ की तरफ बढ़ा दिए। बोलीं- बच्चों के बेंच अच्छे नहीं हैं, इनके लिए बढ़िया फर्नीचर लाओ। सास से पहले बहू ने स्कूल में बच्चों के साथ बिताए गए क्षणों को अपने जीवन की बेशकीमती पूंजी बताया और स्कूल में कंप्यूटर व प्रिंटर आदि लाने के लिए अपनी ओर सेे पचास हजार रुपये देने की बात कही।
कल्लर माजरा गांव के डेरा प्रताप सिंह में स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल की हेड टीचर बलविंदर कौर शनिवार को रिटायर हो गई। उनकी सेवा निवृत्ति के अवसर पर सब डिविजन गुहला के तमाम प्राइमरी टीचरों ने उनके सम्मान में एक पार्टी का आयोजन किया था। इस पार्टी में खंड शिक्षा अधिकारी प्रेम सिंह पूनिया, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महासचिव सुरेश द्रविड़, इलाके भर के प्राइमरी शिक्षक व मैडम बलविंद्र कौर के पारिवारिक सदस्य शामिल हुए।
आते ही लगवाया था सोलर सिस्टम : अध्यापिका के रूप में अपनी 27 साल की सेवा पूरी करके रिटायर हुई बलविंद्र कौर डेरा प्रताप सिंह के प्राइमरी स्कूल में हेड टीचर के रूप में सेवा करने 2016 में आईं थी। स्कूल के शिक्षक संदीप शोकल ने बताया कि जब मैडम आए तो उन्होंने देखा कि स्कूल में बिजली की व्यवस्था ना होने के कारण बच्चों व स्टाफ को गर्मी में ही तपते रहने पर मजबूर होना पड़ता है। शोकल ने बताया कि मैडम बलविंद्र कौर ने अपने सहयोगी शिक्षकों को बुलाया और
अपनी पाकेट से पैसे देकर स्कूल में सोलर सिस्टम लगवा दिया। जिस पर 1 लाख रुपये खर्च आए थे। शोकल बताते हैं कि तीन साढ़े तीन सालों में मैडम बलविंद्र कौर ने जिस भी बच्चे को कपड़ों या जूतों के बिना पाया उसके लिए अगले दिन खुद उसकी जरूरत का सामान ले आई।
सासू बोली-हम भी गरीबी से उठें हैं : मैडम बलविंद्र कौर की सासू कुलवंत कौर एक आम घरेलू महिला हैं। जब उन्हें बोलने के लिए उठाया गया तो वे बोली कि मुझे पता है सरकारी स्कूलों में बहुत गरीब लोगों के बच्चे पढ़ते हैं। हमारा परिवार भी इन्हीं हालातों से निकलकर खाने कमाने लायक हुआ है। कुलवंत कौर ने कहा कि जिस सेवा भाव के कारण इस स्कूल में काम करने वाली मेरी बहू की इतनी तारीफें हो रही हैं तो मुझे भी लगता है कि मुझे भी यहां के बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए।