अमर उजाला ब्यूरो
कैथल।
आशा वर्करज यूनियन हरियाणा का पड़ाव नागरिक अस्पताल के सामने चौथे दिन भी जारी रहा। ब्लॉक प्रधान पूंडरी सुमन कश्यप की अध्यक्षता में ब्लाक पूंडरी व कलायत की आशा वर्कर पड़ाव में बैठीं। आशाओं को संबोधित करते हुए जिला प्रधान संतोष ब्राह्मणी वाला ने बताया कि एनएचएम के तहत सारी सेवाओं समेत जच्चा बच्चा टीकाकरण नसबंदी पोलियो का काम आशा वर्कर करती हैं। लेकिन एक जनवरी 2018 के बाद केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन 24000 रुपये घोषित करने के बाद भी आशाओं को मामूली मानदेय देकर शोषण किया जा रहा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा सरकार ने साढ़े 3 साल के कार्यकाल में 22 हजार आशाओं के वेतन में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की है। जबकि बाकि सभी एनएचएम कर्मचारियों के वेतन में हरियाणा सरकार बढ़ोतरी कर चुकी है, परंतु आशाओं की कोई सुध नही ली। अब हम इस बेगारी को कतई बर्दाशत नहीं करेंगी। उन्होंने मांग की कि आशाओं को पक्का कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। न्यूनतम वेतन 18000 रुपये लागू किया जाए। सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए। एनएचएम का बजट बढाया जाए। 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाए। इस अवसर पर जिला प्रधान सत्यवान, अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के जिला सचिव प्रेम चंद आशा वर्कर नेत्री मेनका मूंदड़ी, राजबाला पाई, कृष्णा, सुदेश रानी सिरसल व कविता हाबड़ी ने भी संबोधित किया।
‘आशाओं को नहीं मिलता काम के अनुरूप मानदेय’
-चौथे दिन भी जारी रहा आशा वर्कर्स का धरना
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