निशिकांत शर्मा
कलायत। पंचायत के लोगों की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजने के बाद मंगलवार को अमर उजाला ने कलायत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और गांव प्यौदा पीएचसी की लाइव रिपोर्ट की तो पता चला कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कलायत उपमंडल में सुविधाएं न के बराबर हैं। न तो पद के अनुसार डॉक्टर हैं और ना ही फार्मासिस्ट। कलायत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत गांव बालू, बात्ता और देवबन पीएचसी आती हैं।
कलायत के सीएचसी को जाने वाला मार्ग इतना टूटा हुआ है कि एंबुलेंस में आने वाली गर्भवती महिलाओं को खासी कठिनाई होती है। अस्पताल में न तो पीने का पानी है और न ही बिजली। शौचालयों का भी बुरा हाल है। वहां पानी नहीं है। अस्पताल में दाखिल मरीजों व परिजनों को पूरी रात मच्छर काटते हैं। करीब 3 सौ मरीज प्रति दिन पहुंचते हैं। सीएचसी में केवल 2 डॉक्टर हैं, उनमें से एक को बालू डेप्यूट किया है।
नेहरू युवा संगठन के उपाध्यक्ष गुरुदेव सिंह, रामेश्वर, राजेश शर्मा, गुरुदेव बूरा, मीना, किताबो, मुकेश, बीरमती, बाला देवी, सुनिता आदि ने कहा कि करीब 50 हजार की आबादी के लिए गांव बालू की पीएचसी के भरोसे तीन पंचायतों वाला गांव हैं। इस अस्पताल में बालू के अलावा जुलानीखेड़ा, वजीरनगर, बडसीकरी, चौशाला व रामगढ़ गांवों से लोग भी इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में बिजली पानी की कोई सुविधा नहीं है। भवन की छतों से पलस्तर के टुकड़े टूटकर गिर रहे हैं जो लोगों के लिए समस्या का कारण बन रहे हैं।
प्रसूति के लिए आना पड़ता है कलायत
महिलाओं का कहना है कि सरकार इस बात पर पूरा जोर दे रही है कि डिलीवरी घरों की बजाय सरकारी अस्पताल में करवाई जाए पर गांव बालू की पीएचसी में न तो कोई महिला चिकित्सक है और न ही कोई स्टाफ नर्स। उनका कहना था कि अस्पताल में डिलीवरी रूम धूल फांक रहा है और महिलाओं को प्रसूति के लिए कलायत या कैथल के सिविल अस्पतालों में जाना पड़ता है पर एंबुलेंस की कोई सुविधा नहीं है।
केवल तीन कर्मचारियों के जिम्मे है पीएचसी
गांव बालू की पीएचसी में एमओ सहित कुल 25 पद स्वीकृत हैं पर करीब 50 हजार लोगों का स्वास्थ्य केवल तीन लोगों के हाथ में सिमट कर रह गया। बालू में दो एमपीएचडब्ल्यू और एक एमपीएचएस ही मौजूद है। अब एक जनवरी से कलायत सीएचसी से डॉ. कुलदीप सिंह की दो दिन के लिए बालू में तैनाती की गई है। गुरुदेव का कहना था कि न तो दवाएं हैं और न ही औषधिकारक तो ऐसे में डाक्टर करेगा क्या?
जर्जर हुआ भवन व क्वार्टर
करीब 8 एकड़ में बने अस्पताल का भवन और आवासीय क्वार्टर पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। अस्पताल में मरीजों ने आना ही छोड़ दिया बस यहां का परिसर केवल कुश्ती व क्रिकेट खिलाड़ियों के ही काम आ रहा है। कलायत में अस्पताल इंचार्ज डॉ. प्रगति ने कहा कि एसएमओ सहित 13 में से 3 डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है। विभाग को बार-बार लिखा जा रहा है। जो संसाधन हैं, उन्हीं के हिसाब से काम चल रहा है। प्रयास किया जा रहा है कि इन्हीं संसाधनों से लोगों की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें पूरी की जाएं। डॉ. कुलदीप की दो दिन के लिए बालू में ड्यूटी लगाई गई है।
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उपमंडल में ये है स्टाफ की स्थिति
सामुदायिक केंद्र कलायत
कुल स्वीकृत पद खाली
82 32
डॉक्टर 2 6
फार्मासिस्ट 3 2
रेडियोग्राफर 1 1
स्टाफ नर्स 5 0
क्लर्क 2 2
एलटी 2 2
एलटीजी 1 0
एमपीएचडब्ल्यू 23 6
एमपीएचएस 6 1
चतुर्थ श्रेणी 8 4
बालू पीएचसी
25 22
डॉक्टर 3 3
फार्मासिस्ट 1 1
स्टाफ नर्स 2 2
एलटी 1 1
एमपीएचडब्ल्यू 10 8
एमपीएएचएस 2 1
पीएचसी बात्ता
24 15
डॉक्टर 3 3
स्टाफ नर्स 2 2
फार्मासिस्ट 1 0
एमचीएचडब्ल्यू 8 2
एमपीएचएसएस 2 0
पीएचसी देवबन
25 11
डॉक्टर 1 1
फार्मासिस्ट 1 1
स्टाफ नर्स 2 1
एलटी 1 1
एमपीएचडब्ल्यू 12 4
एमपीएचएस 2 1
कलायत उपमंडल में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, न डॉक्टर हैं पूरे, न बिजली-पानी
पंचायत के लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सीएम, स्वास्थ्य मंत्री सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भेजा है कानूनी नोटिस
फोटो संख्या-11 से 14