संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रोडवेज डिपो में चालकों और परिचालकों की लगातार घटती संख्या का सीधा असर बस सेवाओं पर पड़ रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, परिचालकों के 356 स्वीकृत पदों में से केवल 233 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि 123 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसी प्रकार चालकों के 330 पदों में से 235 ही भरे हुए हैं और 92 पद रिक्त हैं। इस प्रकार खाली पदों की कुल संख्या 215 है।
इसके अलावा 16 चालकों को अग्निशमन विभाग में हड़ताल के चलते फायर ब्रिगेड संचालन के लिए भेजा गया है, जिससे हालात और अधिक गंभीर हो गए हैं। नई नियुक्तियां न होने के कारण विभाग को अस्थायी प्रबंधों का सहारा लेना पड़ रहा है।
कई मार्गों पर कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा रही है, वहीं कुछ रूटों पर बसों के फेरे सीमित कर दिए गए हैं। बढ़ते कार्यभार से कर्मचारियों में थकान बढ़ रही है, जिसका सीधा असर उनकी कार्य क्षमता और यात्रियों की सुविधा पर पड़ रहा है। बसें समय पर न मिलने के कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे आमजन की परेशानी बढ़ती जा रही है।
सूत्रों के अनुसार सीईटी परीक्षा के बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है और इस संबंध में प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जा चुका है। यात्रियों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द चालकों व परिचालकों की भर्ती की जाए, ताकि बस सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
नई भर्ती करने की मांग
कर्मचारी संदीप और कृष्ण ने कहा कि रिक्त पदों को जल्द भरा जाना चाहिए। यदि समय रहते नियुक्तियां नहीं हुईं तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
यात्री बोले -बसों के फेरे हो जाते हैं रद्द
यात्री मनोज, रामसिंह और बनबीर सिंह ने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण कई बार बसों के फेरे रद्द हो जाते हैं। इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण और रात्रि ठहराव वाले रूटों पर देखने को मिल रहा है, जहां कर्मचारियों को लंबी ड्यूटी करनी पड़ रही है।
कर्मचारियों की कमी के संबंध में मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही नई भर्ती होने की उम्मीद है और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
-विपुल कुमार, टीएम, रोडव
सेवानिवृत्ति के बाद पद नहीं भर रहे
हर वर्ष कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन उनकी जगह नई नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं। वर्ष 2018 के बाद से स्थायी भर्ती नहीं हुई है। फिलहाल कौशल रोजगार निगम के माध्यम से अनुबंध आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं, लेकिन शिकायतों के चलते कई बार इन्हें हटाना भी पड़ता है।
रोडवेज और लीज की कुल 192 बसें विभिन्न मार्गों पर संचालित हो रही हैं। एक कर्मचारी की ड्यूटी आठ घंटे निर्धारित है, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते कई कर्मचारियों को अतिरिक्त समय तक कार्य करना पड़ रहा है।