शहरों की सरकार में झगड़ों के रूप में याद किया जाएगा वर्ष 2018
कैथल नगर परिषद में कुर्सी की लड़ाई, चीका में चेयरपर्सन को हटाने की लड़ाई, राजौंद नगर पालिका चेयरपर्सन द्वरा कार्यपालिका पर आरोप सहित कई मुद्दे उठते रहे साल भर
अभी तक खत्म नहीं हो पाई है शहरों की सरकार में लड़ाई
कैथल नगर परिषद में कांग्रेस समर्थक बनीं हैं चेयरपर्सन तो गुहला में भाजपा के दो गुटों में नहीं थम रहा विवाद
कलायत नगर पालिका चुनाव के कई माह बाद हो पाया था चेयरमैन का चुनाव
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। वर्ष 2018 जिले में शहरों की सरकारों के लिए सही नहीं रहा। इस दौरान नगर परिषद कैथल से लेकर नगर पालिका चीका व राजौंद में उठापटक होती रहीं। वहीं कलायत व पूंडरी में आम चुनाव हुए। जहां सत्ता परिवर्तन हुआ। सबसे ज्यादा विवाद गुहला-चीका नगर पालिका में सामने आए। जहां नगर पालिका चेयरपर्सन व विधायक कुलवंत बाजीगर के बीच विवाद पूरे साल चर्चा का विषय बना रहा। वहीं यहां से सचिव व जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ के बीच हुआ विवाद आज तक जारी है। इसके अलावा कैथल नगर परिषद में तख्ता पलट हुआ। राजौंद नगर पालिका को लेकर भी साल भर अच्छी खबरें नहीं आईं।
साल की शुुरुआत में ही कैथल नगर परिषद में 2010 से 15 के बीच हुए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व चेयरमैन सहित 23 पार्षदों को विजलेंस ने नोटिस भेजा। इसके बाद कार्यकारी चेयरमैन डॉ. पवन थरेजा नगर परिषद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। लेकिन चेयरमैन के चुनाव के लिए पार्षद गौरव ढुल ने हाईकोर्ट में याचिका डाली। इसके बाद 28 जून को चुनाव हुआ। जिसमें वार्ड नंबर 16 की पार्षद सीमा कश्यप रणदीप सुरजेवाला के आशीर्वाद से चेयरपर्सन बनीं और चेयरमैन की कुर्सी भाजपा के हाथ से एक बार फिर से फिसल गई। इसके बाद से लेकर अभी तक भी परिषद में स्टाफ की कमी के कारण समस्या बनी हुई है।
चीका में चेयरपर्सन अमनदीप कौर व विधायक कुलवंत बाजीगर खेमे के बीच विवाद जग जाहिर है। इस साल चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। जिसे गिरवाने में चेयरपर्सन खेमा सफल रहा और विधायक खेमे के पार्षदों को एक बार फिर से मुंह की खानी पड़ी। नगर पालिका चीका की आम बैठक में भी पार्षद एक दूसरे पर भड़कते नजर आए। कुल मिलाकर नगर पालिका चीका के लिए भी 2018 कोई अच्छी खबर लेकर नहीं आया। हालांकि साल के शुरुआत में दोनों पक्षों में समझौते की बात सामने आई थीं, लेकिन धीरे-धीरे यह विवाद जग जाहिर होता गया और एक कम्यूनिटी सेंटर को लेकर शुरू हुआ विवाद आज तक जारी है।
इसके अलावा चीका में नपा में सचिव अशोक कुमार व जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ वेदपाल श्योकंद के बीच विवाद राज्यस्तर पर छाया रहा। बाद में विधायक ने भी एसडीओ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा उसे मानसिक रूप से परेशान कहा। बाद में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में पहुंचा तो स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने एसडीओ को ही सस्पेंड कर दिया। कुछ समय बाद एसडीओ ने स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ याचिका डाली तो हाईकोर्ट ने मंत्री को नोटिस देकर इसका जवाब मांग एसडीओ को बहाल कर दिया।
राजौंद नगर पालिका में चेयरमैन व वाइस चेयरमैन दोनों के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव : वर्ष 2018 में राजौंद नगर पालिका चेयरपर्सन गुड्डी राणा व वाइस चेयरमैन निरवैर सिंह दोनों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए गए। जिससे काफी उठापटक रही। अक्टूबर में चेयरपर्सन के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। इसके बाद वाइस चेयरमैन के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भी गिर गया। लेकिन इस दौरान काम काज काफी प्रभावित रहा। नगर पालिका राजौंद में अधिकारियों व चेयरमैन गुट का विवाद भी काफी उठा। एक बार तो सभी पार्षदों ने नगर पालिका को ही ताला लगा दिया था। यहां कार्यालय के रिकॉर्ड में आगजनी का मामला आज तक सीआईए में जांच के अधीन है। चेयरमैन का कहना है कि ग्रांट की कोई कमी नहीं हैं, लेकिन अधिकारी काम ही नहीं करते।
पूंडरी व कलायत में हुआ सत्ता परिवर्तन : इस साल कलायत नगरपालिका चुनाव हुए। नगर परिषद के 13 वार्डों में आठ पार्षद महिलाएं बनीं। जिस कारण चुनावों में महिलाओं की भागेदारी अधिक रही। पार्षद रजनी राणा को नपा की चौधर मिली। और वार्ड नंबर 12 की महिला पार्षद मनीषा जैष्ट उप प्रधान बनीं।
अभी दिसंबर माह में ही पूंडरी नगर पालिका में चुनाव हुआ। जिसमें दो-तीन निवर्तमान पार्षद ही विजयी होकर दोबारा पार्षद बने हैं। अभी यहां चेयरमैन का चुनाव होना है।