कैथल। निजी बसों के विरोध में शुरू हुई रोडवेज की हड़ताल के बीच ठेके पर भर्ती किए गए नौसीखिए चालकों से बसों का ठीक ढंग से स्टेयरिंग नहीं संभल पा रहा है। विभाग ने जहां जनता को सुविधा देने के लिए ठेके पर चालक व परिचालकों को भर्ती किया है। वहीं रोडवेज बस चलाने के लिए इन चालकों के नौसिखिया होने के कारण यात्रियों को भी हादसे का डर बना हुआ है। महज 6 दिन में ही 16 बसें कंडम होने के कगार पर हैं। इनके कल्च प्लेट व गियर बॉक्स खराब हो गए हैं।
42 चालक किए हैं भर्ती
सरकार द्वारा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के बीच 42 चालकों को ठेके के आधार पर भर्ती किया गया है। जिन्हें विभिन्न रुटों के लिए बसें थमा दी गई हैं। ये चालक पिछले छह दिनों से बसें चला रहे हैं। लेकिन बसें सही ढंग से नहीं चल पा रहीं। सरकार का सिर्फ एक ही प्रयास है कि किसी भी सूरत में बस चलाई जाएं।
केवल लाइसेंस के आधार पर किए हैं चालक भर्ती, नहीं चलवाई बसें
रोडवेज की ओर से ठेके पर भर्ती किए गए चालकों से केवल उनका हैवी लाइसेंस देखा गया है। जबकि उनसे बसें चलाने का ट्रायल नहीं लिया। विदित रहेे कि रोडवेज की बसों चलाने वाले नियमित चालकों से तीन चरणों में ट्रायल लेकर ही भर्ती किए जाते है। जिसमें आठ बनाने, डक व रोड का ट्रायल लिया जाता है। इसके बाद मेडिकल करवाने के बाद उनकी नियुक्ति होती है।
मिस्त्रियों की भर्ती के लिए आवेदन जारी
वर्कशाप में मिस्त्रियों की भर्ती के लिए शुरू किए गए आवेदन दूसरे दिन भी जारी रहे। दूसरे दिन भर्ती के लिए आईटीआई व पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान 200 से अधिक आवेदन आए। दो दिनों में भर्ती के लिए अब तक करीब 600 आवेदन आ चुके है।
हड़ताल के 13वें दिन 22 पुराने कर्मचारी लौटे काम पर
हड़ताल के 13वें दिन रविवार को विभाग के 22 कर्मचारी काम पर लौटे। इसमें 2 चालक, 2 परिचालक, 3 सब इंस्पेक्टर व 15 वर्कशॉप के मिस्त्री काम पर वापिस लौटे। इनके लौटने के बाद विभाग की ओर से इनकी हाजिरी लगवाई गई।
नए चालकों को आएगा धीरे धीरे हिसाब
डिपो के जीएम रामकुमार भुक्कल ने रोडवेज की बसों से खराब होने की बात पर कहा कि ऐसी स्थिति में ऐसा होना स्वाभाविक है। सरकार के आदेशों के अनुसार हिदायतों के तहत ठेके पर चालकों को भर्ती किया है। नए चालकों को रोडवेज की बसों को चलाने का धीरे धीरे हिसाब आएगा। इसमें कोई ज्यादा समस्या नहीं है।