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साहित्य अमृतसभा की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन

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साहित्य अमृतसभा की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन
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अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। साहित्य अमृतसभा चीका मासिक काव्य गोष्ठी अग्रवाल धर्मशाला चीका में प्रधान कुलभूषण शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। गोष्ठी में कैथल से डा. प्रद्युमन भल्ला व कुरुक्षेत्र से डा. रामकुमार शर्मा ने मुख्यातिथि व विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। काव्य गोष्ठी का आगाज सभा के महासचिव कंवल सिंगला ने यह कहकर किया कि पत्थर में खुदा है खुदा पत्थर नहीं, खुदा दिल में ही है कोई गुमशुदा नहीं और प्रधान कुलभूषण शर्मा ने गीत के माध्यम से नायिका का सुंदर चित्रण करते हुए छंदों से आगाज किया ‘युग-युग से तुम मेरे लिए पराया हो, फिर मेरे सपनों में कहे आई है’। सत्यवान ने हिंदी भाषा पर अपनी कविता की प्रस्तुती दी जिसमें उन्होंने वर्णमाला को कविता के माध्यम से बड़ी खूबसुरती से ब्यां किया। चेतन चौहान ने अपने शेरों के माध्यम से कुछ यूं कहा‘ये भी तो अपना एक बड़ा इ तहान है, चुप है जबकि लब है, मुंह में जुबान है। मानविंद्र सिंह ने पंजाबी कविता के माध्यम से शिक्षा के महत्त्व पर प्रकाश डाला, जयपाल ने चतुर्भुज द्वारा रची रागिनी गाय की दशा गाकर सबको मंत्रमुग्ध किया। कर्म चंद केसर ने मानक काव्य रचना के माध्यम से कुछ यूं कहा आज फिर तैना कोई काम सै-मीठा-मीठा बोलन आलै, माया गेल न जाएगी-पाई-पाई जोडन आलै। रोहताश जीत ने संत कबीर की वाणी के माध्यम से श्रोताओं का मन मोहा। डा. रामकुमार शर्मा ने काव्य गोष्ठी के अंत में आशीर्वाद स्वरूप प्रेरणा प्रद वाणी से सराबोर किया। अंत में सभा के प्रधान कुलभूषण शर्मा ने घोषणा की कि अक्तूबर मास में चीका शहर में एक बहुत बड़े मुशायरे का आयोजन किया जाएगा जिसमें हरियाणा-पंजाब के नामचीन शायरों को आमंत्रित किया जाएगा। गोष्ठी में दर्शनलाल बाजीगर, रामेश्वर दास, लखविंद्र जीत सिंह, रूप चंद शास्त्री, अनिल कुमार, सुरेश कुमार, अमरजीत सिंह भी मौजूद थे।
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