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ईंटों व सीमेंट की कीमतों से प्रभावित हो रहा है विकास

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20 करोड़ के विकास कार्यों में ईंट के रेट बने रोड़ा
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जिले में मार्केट रेट 4800 रुपये प्रति एक हजार, सरकारी रेट 4100 रुपये
गांव सहित शहरों में विकास कार्य ठप, सरपंच व ठेकेदार सहित पार्षद कर रहे हैं ईंटों के रेट कम होने का इंतजार
पड़ोसी जिलों में 4700 व जींद में 4800 रुपये है ईंटों का सरकारी रेट
बढ़ी हुई कीमत पंचायतों को अपने खाते से देनी पड़ रही है, इसी कारण नहीं हो पा रहे हैं विकास कार्य
फोटो संख्या-1, 14,
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिले में ईंटों की कीमतों को लेकर विकास कार्य आड़े आ रहे हैं। मार्केट में नंबर 1 की ईंटें 4800 रुपये तक बिक रही हैं। जबकि सरकारी रेट 4100 रुपये है। इस कारण चारों विधानसभा क्षेत्रों में करीब 20 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य अटके हुए हैं। जिनमें ईंटों की आवश्यकता है। इसी प्रकार से सीमेंट को लेकर भी सरपंचों को परेशानी आ रही है। सरकारी रेट 189 रुपये दिया जा रहा है। जबकि मार्केट में सीमेंट की कीमत 330 रुपये है। कई सरपंचों ने एडीसी से मिलकर ईंटों के रेट रिवाइज करने की मांग की है।
क्या है ईंटों के रेट की स्थिति:-मार्केट में इस समय नंबर 1 की ईंटें 4800 से लेकर 5000 रुपये प्रति एक हजार तक हैं। इससे कम कीमत में दड़ा या नंबर 2 की ईंटें मिलती हैं। जो गुणवत्ता में अपेक्षाकृत कम अच्छी हैं। सरपंच एसोसिएशन के प्रधान गज्जन सिंह ने बताया कि मार्केट में इस समय ईंटों की कीमतें 4800 से लेकर 5200 रुपये प्रति एक हजार तक हैं। इसमें अच्छी गुणवत्ता की ईंटें आती हैं। जबकि सरकारी रेट कैथल जिले का 4100 रुपये एवं जीएसटी के साथ 4300 रुपये है। ऐसे में सरपंचों के लिए परेशानी यह है कि मार्केट व सरकारी रेट क बीच के अंतर की राशि सरपंच कहां से लाएं।
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पूरे जिले में अटके हुए हैं करीब 20 करोड़ से अधिक के विकास कार्य:-सरपंच एसोसिएशन के अनुसार पूरे जिले में करीब 30 से 40 करोड़ रुपया विकास कार्यों के लिए आया था। इसमें से लगभग 20 करोड़ से अधिक के वे विकास कार्य लटके हुए हैं, जिनमें ईंटों का प्रयोग होना है। मसलन भवन बनाने, नाले बनाने, लंबी दूरी के रास्ते जो ईंटों से बनाए जाने हैं, वे लंबित हैं और सरपंच मार्केट रेट कम होने का इंतजार कर रहे हैं।
सीमेेंट के लिए भी परेशानी:-सरपंचों द्वारा काम करवाए जाने पर सरकार द्वारा सीमेंट के लिए 189 रुपये प्रति कट्टे की राशि स्वीकृत है। जबकि मार्केट रेट 330 रुपया है। ऐसे में सरपंचों के लिए यह अंतर पाटना भी मुश्किल हो रहा है। सरकार से मांग के बावजूद सरकारी कार्यालयों में ही सीमेंट देने की बात तय हुई थी और अब सीमेंट स्टोर बनाए जा रहे हैं। जिसके लिए सरपंचों से अग्रित चैक लिए गए थे। लेव्कन 2 माह से इन स्टोर में एक भी कट्ट सीमेंट का नहीं आया है। जिस कारण सरपंच अब सीमेंट के लिए भटक रहे हैं।
चौपाल बनाई जानी है, ईंटों की कीमत कम होगी तभी शुरू करवाएंगे:-गांव रोहेड़ियां के सरपंच रामफल सैनी का कहना है कि गांव में चौपाल का निर्माण करवाया जाना है। सरकारी रेट व मार्केट रेट में अंतर होने के कारण ईंट खरीदने में परेशानी हो रही है।
ईंट भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान रामप्रसाद बंसल का कहना है कि मार्केट में ईंटों की कीमतें ज्यादा चल रही हैं। फिर भी सरकारी प्रावधान के अनुसार सरपंचों को ईंटें दी जा रही हैं। जरुरत पडने पर प्रशासन से मांग की जाएगी कि ईंटों के रेट बढ़ाए जाएं। ताकि विकास कार्य प्रभावित ना हों।
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एडीसी से मिलकर सरपंचों ने की समस्या के समाधान की मांग, एडीसी ने कहा-तरीका निकालेंगे:-सोमवार को कई सरपंचों ने एडीसी पार्थ गुप्ता से मुलाकात की और उन्हें ईंटों व सीमेंट की समस्या के बारे में अवगत करवाया। एडीसी ने उन्हें कहा कि इस बारे में कोई ना कोई तरीका निकाला जाएगा। सरकारी स्टोर पर सीमेंट उपलब्ध करवाई जाएगी। पता करवाया जाएगा कि क्यों नहीं वहां सीमेंट पहुंच रहा। साथ ही ईंटों की कीमतों को लेकर भी विचार किया जाएगा।
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