गर्भवती महिलाओं को निजी वाहनों को सहारा लेकर पहुंचना पड़ा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नेशनल हेल्थ मिशन के अनुबंधित कर्मचारी मांगों को लेकर मंगलवार को दो दिनों की हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने एलान किया है कि अगर दो दिन में उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वह अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इस हड़ताल में लैब टेक्निशियनों, नर्सें, कम्प्यूटर ऑपरेटर, डॉक्टर, एंबुलेंस ड्राइवर, क्लर्कों के कुल 447 अनुबंधित कर्मचारी शामिल हैं। हड़ताल के दौरान एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह से ठप रही जिस कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीज एंबुलेंस सुविधा बंद होने के कारण इधर-उधर भटकते नजर आए। वहीं इलाज के दौरान टेस्ट व अन्य सुविधाओं न मिलने से मरीज परेशान रहे।
हड़ताल के पहले दिन मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एंबुलेंस सुविधा तो मिली मगर काफी लंबा इंतजार करना पड़ा। एंबुलेंस के लिए लोग फोन करते रहे, लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया। केंद्र के बाहर मुख्य गेट को लॉक लगाकर बंद किया हुआ था। इस कारण एंबुलेंस सुविधा लेने के लिए आए लोग कर्मचारियों का इंतजार करते रहे। जच्चा-बच्चा को लेकर महिलाएं वार्ड में ही बैठी रही। बार-बार परिजन एंबुलेंस केंद्र में आते रहे पर एंबुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं हो पाई।
हड़ताल के कारण मरीजों का उठानी पड़ी परेशानी : एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की जांच करवाने के लिए आया मरीज कृष्ण ने बताया कि वह पिछले दो दिन से अस्पताल में आ रहा है कल तो डॉक्टर छुट्टी पर था मगर आज हड़ताल होने के कारण उसकी रिपोर्ट की जांच नहीं हुई । जिसके कारण उसको काफी परेशानी झेलनी पड़ी है।
डिलीवरी के बाद ऑटो में गए जच्चा-बच्चा : कैथल निवासी सरोज की 2 दिन पहले डिलीवरी हुई थी। आज उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन उसे घर जाने के लिए कोई एंबुलेंस नहीं मिली, क्योंकि एंबुलेंस रूम के सभी कर्मचारी हड़ताल पर थे। परिजन सरोज को एक ऑटो में लेकर घर गए।
किराये पर लेकर आए गाड़ी : गांव खुराना निवासी सोनिया, कैथल व उचाना निवासी ऊषा को भी परिजन डिलीवरी के बाद निजी वाहनों में लेकर घर पहुंचे। सोनिया के पति राजेंद्र सिंह व सास केलो देवी ने बताया कि वह एंबुलेंस लेने के लिए गया था, लेकिन पता चला कि सभी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। वहीं ऊषा के पति अनिल ने बताया कि एंबुलेंस नहीं मिलने पर वह बाहर से एक निजी गाड़ी किराये पर लेकर आए और घर पहुंचे।
प्रतिदिन 1400 से 1600 ओपीडी होती
बता दें कि सरकारी अस्पताल में जिलेभर के विभिन्न गांवों से लोग इलाज के लिए आते हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना 1400 से 1600 ओपीडी होती है। लेकिन मंगलवार को एनएचएम के कर्मचारियों के हड़ताल होने के कारण यहां आने वाले लोगों को ठीक ढंग से इलाज नहीं मिल पाया। जिससे उन्हें काफी कठिनाई झेलनी पड़ी।
102 नंबर पर बजती रही घंटी : नेशनल हेल्थ मिशन के तहत जिला में सभी जगहों पर एंबुलेंस सेवाएं बंद रही और एंबुलेंस पर तैनात कर्मचारी भी धरने में शामिल रहे। जिसके कारण 102 नंबर पर पूरे दिन घंटी बजती रही लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया। एंबुलेंस रूम में एक भी कर्मचारी कॉल अटेंड करने लिए नहीं बैठा। सुबह दस बजे कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद एक भी फोन कॉल नहीं उठाई गई।
यह है एनएचएम कर्मचारियों की प्रमुख मांगें :
1. न्यायालय के आदेशानुसार सामान काम सामान वेतन को लागू करना।
2. वेतन विसंगतियों को दूर करना।
3. मेडिकल भत्ते व मेडिकल छुट्टियों को लागू करना।
4. जब तक नियमित पॉलिसी नहीं बनती तब तक अनुबंध अवधि को एक वर्ष की बजाय पांच वर्ष करने की मांग।
5. स्टेट बजट दो से चार हजार रुपये तक सभी एनएचएम कर्मचारियों को दिया जाए।
एनएचएम के कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान विभाग की ओर से दोपहर बाद अन्य ड्राइवरों को लगा दिया था। जिसके बाद लोगों की परेशानी कम हुई है। दूसरे दिन की हड़ताल के दौरान भी इसी प्रकार के प्रबंध किए जाएंगे। ताकि मरीजों को परेशानी को न झेलना पड़े।
अशोक चौधरी, सीएमओ
एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से रही बंद, दर-दर भटके मरीज
एनएचएम के कर्मचारियों ने की मांगों को लेकर दो दिन की हड़ताल
450 एनएचएम कर्मचारियों ने बंद रखा कामकाज, टेस्ट व ईलाज न मिलने से मरीजों में हाहाकार
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