तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में 1060 जगहों पर लगाई गई पराली में आग
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिले में तमाम जागरूकता प्रयासों के बावजूद किसानों द्वारा इस सीजन में 1000 से अधिक स्थानों पर आग लगाई गई। जो उपग्रह द्वारा खींचे गए चित्रों में सामने आई है। सरकारी तंत्र ने उपग्रह से मिली जानकारी के आधार पर 112 किसानों पर जुर्माना भी किया है। किसान पराली के लिए मांग कर रहे हैं कि सरकार उन्हें विकल्प दे। जिसमें धान के अवशेष न जलाने पड़े और उन्हें नष्ट करने में किसानों का खर्च भी न हो।
इस सीजन में सरकार व प्रशासन द्वारा काफी प्रचार अभियान चलाया गया कि पराली न जलाई जाए। पराली जलाने से पर्यावरण को नुकसान होता है। साथ ही किसानों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ता है। क्योंकि उनकी भूमि में मित्र कीट नष्ट होते हैं। इन तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में खेतों में खूब आग लगाई गई।
कैथल में 1000 से अधिक जगहों पर लगाई गई खेतों में आग : हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के सेटेलाइट में रिकॉर्डिंग के अनुसार कैथल में 7 अक्टूबर के बाद से लेकर अब तक 1000 से अधिक जगहों पर आग लगाई गई है। इस बारे में कृषि विभाग व प्रदूषण विभाग को भी अवगत करवाया गया है। कैथल सहित दूसरे जिलों में भी पराली जलाए जाने के मामले सामने आए। जिसका कारण यह रहा कि पिछले दिनों प्रदेश भर स्मॉग छाया रहा।
112 किसानों के केस में 3 लाख से अधिक का जुर्माना : सेटेलाइट से मिले चित्रों के आधार पर जिले में 137 स्थानों की पहचान की गई। इनमें से अभी तक 112 किसानों पर 3 लाख 15 हजार रुपये का जुर्माना किया गया। प्रदूषण विभाग के जूनियर चेकिंग इंजीनियर सुभाष ने बताया कि कुल 112 मामलों में कुल तीन लाख पंद्रह हजार रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला है। पराली अवशेष जलाने के मामले में जहां कृषि विभाग व जिला प्रशासन के तेवर कड़े हैं वहीं प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड भी इसे रोकने में कोई कोताही नहीं बरत रहा है।
किसान पराली नहीं अवशेष जलाता है, विकल्प सुझाए सरकार : भारतीय किसान संघ के सचिव एवं प्रवक्ता रणदीप फरल आर्य का कहना है कि किसान पराली नहीं जलाता, वह फाने जलाता है। खेत साफ करने के लिए ऐसा करना उसकी मजबूरी है। क्योंकि उसके पास कोई विकल्प नहीं है। यदि फाने ऐसे रहें तो गेहूं का उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसे में किसान पर्यावरण की सुरक्षा तो चाहता है, लेकिन जब फसल ही नहीं होगी तो वह खाएगा क्या? तो सरकार किसान को ये फाने अथवा धान के अवशेष नष्ट करने के लिए विकल्प दे या फिर इसका खर्च उठाए।
जागरूकता अभियान लगातार जारी : कृषि विभाग के उप निदेशक महावीर सिंह ने बताया कि पराली के अवशेष न जलाने के लिए किसानों के लिए जागरुकता अभियान लगातार जारी है। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर नायब तहसीलदार की अगुवाई में टीमें बनाई गई है। जिसमें पटवारी से लेकर गांव के सरपंच तक शामिल है। जो लगातार किसानों को पराली के अवशेष न जलाने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
उपग्रह से मिली रिपोर्ट से हुई जानकारी, पहचान करके 112 किसानों से वसूले गए 3 लाख 15 हजार रुपये
जिला में अब तक आए कुल 137 केस, सूचना दर्ज
किसानों का तर्क-जलाएं नहीं तो कैसे करें खेत साफ, पराली नहीं, फानों में लगानी पड़ती है आग
सरकार विकल्प सुझाए, जिसमें खर्चा न हो..., तभी रुक सकती हैं आगजनी की घटनाएं
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