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शहर में दूसरे प्रदेशों व जिलों से आने वाले किसानों से हो रही है मोटी वसूली

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शहर में दूसरे प्रदेशों व जिलों से आने वाले किसानों से हो रही है मोटी वसूली
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मार्केटिंग बोर्ड के चेयरमैन को मिलीं शिकायतें, कहा-सीएम को अवगत करवाउंगा
अनाज मंडी के आढ़तियों द्वारा नकद भुगतान के कारण कैथल अनाज मंडी की देश भर में अच्छी साख
इस साख को बट्टा लगा रहे हैं कुछ कर्मचारी व अधिकारी
प्रति वाहन वसूले जा रहे हैं 2000 रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। देश की प्रमुख अनाज मंडियों में शुमार कैथल अनाज मंडी की जिले के आढ़तियों द्वारा किसानों को नकद भुगतान किए जाने के कारण एक अच्छी साख बनी हुई है। लेकिन मार्केट कमेटी के कुछ स्टाफ सदस्य इस साख को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ सरकार को भी मोटा चूना लगाने में लगे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले करीब दो माह से जिले से बाहर से आने वाले अनाज के वाहनों को रुकवाकर वाहन चालकों से नकदी वसूली जा रही है।
शहर की अनाज मंडी में आढ़तियों द्वारा किसानों को फसल बेचने पर नकद भुगतान किया जाता है। इसी के चलते कैथल अनाज मंडी की एक विशेष पहचान है। ना केवल कैथल बल्कि दूसरे जिलों व प्रदेशों से भी यहां धान व अन्य फसलें बेचने के लिए किसान आते हैं। पिछले दो माह से राजस्थान तक की धान कैथल अनाज मंडी में बिकने के लिए आ रही है। लेकिन कुछ कर्मचारी मिलीभगत करके अनाज मंडियों से बाहर ही इन वाहन चालकों को रोक लेते हैं। सूत्रों ने बताया कि प्रति वाहन करीब 2000 रुपये की अवैध वसूली हो रही है। जिस कारण बाहर से अनाज बेचने के लिए आने वाले किसान परेशान हैं। बताया जा रहा है कि नजराना लेकर इन किसानों को छोड़ दिया जाता है। वे अपनी फसल को बिना मार्केटिंग बोर्ड के रजिस्टर में दर्ज करवाए बेच जाते हैं। इससे सरकार को भी मार्केट फीस व वैट का नुकसान हो रहा है। कैथल तीनों अनाज मंडियों में बारिक धान की 100 से भी अधिक ट्रक प्रतिदिन आते हैं। मार्केट कमेटी के कुछ कर्मचारी इन ट्रकों के कागजात छीन लेते हैं। बताया यह भी जा रहा है कि इस जांच के लिए कुछ निजी व्यक्ति भी लगाए हुए हैं। जिनका मार्केट कमेटी से कोई लेना-देना नहीं है। इसके अलावा जांच का काम केवल सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारी कर सकते हैं। लेकिन जांच की पूरी बागडोर ऐसे कर्मचारी को सौंपी हुई है, जो यह जांच ही नहीं कर सकता।
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बाहर से आए किसानों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि 1121 धान को कैथल की अनाज मंडी में धान बेचने के लिए आए थे। कमेटी के कर्मचारियों ने उन्हें परेशान किया। प्रति ट्रक नजराना देकर ही उन्हें एंट्री मिलती है। उनके क्षेत्र में राइस मिलों की कमी होने व यहां भाव अच्छा मिलने के कारण वे फसल बेचने के लिए आते हैं। वे यदि यहां फसल बेचेेंगे तो मार्केट फीस ही बढ़ेगी। इससे किसी का क्या नुकसान होगा। मार्केटिंग बोर्ड को बाहर से आने वाले किसानों को भी सुविधा देनी चाहिए।
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मार्केट कमेटी के चेयरमैन राजपाल तंवर का कहना है कि इस बारे में उन्हें शिकायतें मिली हैं। कुछ कर्मचारी अपना काम छोड़कर दूसरे कामों में लगे हुए हैं। इस बारे में मुख्यमंत्री को अवगत करवाया जाएगा। ताकि लोग परेशान ना हों।
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