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कैसे हो इलाज, 200 बेड का जिला सामान्य अस्पताल, न डॉक्टर, न दवाएं, मरीजों को बमुश्किल मिल रहा इलाज
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिला सामान्य अस्पताल कागजों में तो 200 बेड का हो गया। लेकिन यहां मरीजों को इलाज बामुश्किल मिल पा रहा है। ना डॉक्टर हैं, ना दवाएं हैं। मरीजों की ओपीडी से लेकर यहां दवा लेने तक काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। जिला अस्पताल ही नहीं सामुदायिक केंद्रों की हालत स्टॉफ की कमी से बदहाल है। कई केंद्रों में एसएमओ ही नहीं हैं।
नियमित पद 52, कार्यरत है केवल 14
जिला में सामान्य अस्पताल के रिकार्ड अनुसार कुल 52 पद नियमित है। लेकिन इनमें से केवल 21 पदों पर ही कार्यरत है। इनमें से सात डॉक्टर अन्य योजनाओं के नियुक्त किए गए हैं। जिसके बाद केवल 14 डॉक्टर ही मरीजों की जांच करने के लिए बचे है। साथ ही बच्चों का केवल एक ही डॉक्टर है। जिस कारण बच्चों का इलाज करवाने आए लोगों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती है।
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सीएचसी में भी नहीं है डॉक्टर
जिला के अधिकतर सीएचसी केंद्रों में भी डॉक्टर के पद खाली है। जिस कारण एक सीएचसी में तैनात डॉक्टर को शिफ्ट बदलकर दूसरे केंद्र में भेजा जाता है। कलायत ब्लाक के एक भी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं है। इसके साथ ही राजौंद व पूंडरी में सप्ताह में दिनों की शिफ्ट के अनुसार काम चलाया जा रहा है।

कहने को 200 बेड का अस्पताल, नहीं मिलती सुविधा
सरकार की घोषणा के अनुसार यूं तो अस्पताल कागजों में 200 बेड का है। तीसरी मंजिल पर स्थित सीएमओ कार्यालय को यहां से पुराने अस्पताल में स्थानातांरित भी कर दिया गया है। तीसरी मंजिल पर सफाई के मामले में अव्यवस्था का आलम है। साथ ही अस्पताल में अन्य सुविधाओं का भी टोटा है। यहां पीने के पानी का उचित तो प्रबंध है लेकिन शौचालय में पानी ही नहीं होता। जिससे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।

अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं
सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं है। जिस कारण यहां आने वाले मरीजों का प्रतिदिन एक्सरे न होकर सप्ताह में केवल दो बार ही होता है।

इलाज के लिए नहीं मिलते सर्जन
गांव हरसौला से इलाज करवाने आए नफे सिंह ने बताया कि उसने कुछ दिन पहले ऑपरेशन करवाया था। जिसके बाद डॉक्टर को दिखाना था। लेकिन सुबह से इंतजार के बाद भी डॉक्टर नहीं मिला। गांव बरटा से आए शमशेर ने बताया कि उसके गर्दन में दिक्कत है। वह पिछले तीन दिनों से यहां दवा लेने के लिए आ रहा है। लेकिन डॉक्टर नहीं मिल रहे।

काले पीलिया की दवाई के लिए भटके
गांव भाणा के जगदीप सिंह ने बताया कि उसके पिता सिंगारा सिंह को काला पीलिया है। उसने बताया कि चार महीने से वह दवा लेने के लिए अस्पताल के चक्कर काट रहा है। लेकिन दवा नहीं मिलती। उसने बताया अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें खुद फोन करके दवा लेने के बुलाया। बाद में यह कह दिया कि अभी दवा ही नहीं आई है।
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डॉक्टरों की कमी प्रदेश स्तर पर है। डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के आला अधिकारियों से बात चल रही है। भर्ती को लेकर जल्द ही सरकार द्वारा प्रत्येक जिला स्तर पर फैसला लिया जाना है। उम्मीद है कि जल्द ही नए डॉक्टरों की भर्ती होगी। उन्होंने काले पीलिए की दवाई पर कहा कि मरीजों की सीरियल संख्या के अनुसार दवाई दी जाती है। कुछ लोगों को इस बारे पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए उन्हें परेशानी होती है।
अशोक चौधरी,
सीएमओ, कैथल।
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