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रोडवेज का चक्का जाम......बसों के बंद होने से दर दर भटके रहे यात्री

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थमे बसों के पहिये, बे‘बस’ हुए लोग
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निजी बसों को परमिट देने के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने की हड़ताल, दर-दर भटकते रहे यात्री

अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। निजी बसों को परमिट देने के विरोध में मंगलवार को रोडवेज कर्मचारियों ने चक्का जाम कर दिया। सुबह से ही बसों का पहिया थमे रहे और लोग बस अड्डे से निराश होकर लौटते रहे। दिन भर यात्री परेशान रहे। कर्मचारियों ने बस स्टैंड परिसर में धरना देकर सरकार के खिलाफ वादा खिलाफी का आरोप लगा जमकर नारेबाजी की। जहां कर्मचारी धरने के दौरान रागिनियों का आनंद लेते रहे तो वहीं आम जनता हड़ताल के कारण त्रस्त रही। यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इधर उधर भटकते दिखाई दिए।
कोई इलाज को तरसा तो कोई विवाह में जाने से हुआ वंचित
गांव बरटा निवासी राजीव व आशा ने बताया कि उन्हें नौ महीने के बच्चे प्रिंस की दवा लेने के लिए जिला करनाल के सीता माई गांव में जाना था। रोडवेज की हड़ताल होने के कारण वह नहीं जा सके। गांव में अन्य वाहनों से जाने की कोई सुविधा नहीं है।
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पिहोवा निवासी विनोद ने बताया कि उन्हें अपने परिवार के सदस्य सोनिया, पूनम, राज व सुमित के साथ करनाल में शादी के लिए खरीदारी करने के लिए जाना था। पिहोवा से पिछले तीन दिनों से बसों की हड़ताल थी। इसलिए वहां से टैक्सी के माध्यम से आए थे। लेकिन जब कैथल पहुंचे तो यहां आकर पता चला कि पूरे प्रदेश में चक्का जाम हो गया है। अब उन्हें टैक्सी से घर लौटना पड़ेगा।
चीका निवासी गुरुदयाल सिंह ने कहा कि वह उसके परिवार के पंचकूला में शादी में शामिल होने के लिए चीका से सुबह 9 बजे ही बस स्टैंड पर पहुंच गए थे। लेकिन उन्हें एक भी बस नहीं मिली। उसने बताया कि वॉल्वो भी बंद है। जिस कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही है। अब वह शादी में शामिल नहीं हो सकेंगे।

विद्यार्थियों को भी हुई परेशानी
बसों के बंद होने से यात्रियों के साथ ही विद्यार्थियों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ी। हड़ताल के कारण यूनिवर्सिटी जाने वाले विद्यार्थी भटकते रहे। कुरुक्षेत्र युनिवर्सिटी में शिक्षा ग्रहण करने वाली छात्रा संगीता ने बताया कि उसकी परीक्षा एक दिन पहले ही खत्म हुई जिसके बाद अपने घर हिसार जा रही थी। वह ट्रेन से कैथल तो आई गई लेकिन हड़ताल का उसे पता नहीं था। उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हड़ताल से लगा 10 लाख से अधिक का फटका
रोडवेज को हर रोज करीब 12 से 14 लाख रुपये की आमदनी होती है। इसमें डीजल भी खर्च होता है। दिन भर हड़ताल के कारण 10 लाख रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।
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निजी परमिट जारी हुए तो सरकारी बसों के बराबर होगी संख्या
प्रदर्शन में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे रोडवेज कर्मचारी संघ के राज्य वरिष्ठ उप प्रधान पहल सिह तंवर ने कहा कि 13 अप्रैल व 13 मई को कर्मचारी नेताओं के साथ हुई परिवहन मंत्री की वार्ता में निजी परमिटों को नए सिरे से चलाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन उसके बावजूद सरकार ने जिला हिसार, अंबाला, जींद, कुरुक्षेत्र के पिहोवा में नई बसों को चलाने की अनुमति दी है। जिससे रोडवेज कर्मचारियों में गहरा रोष व्याप्त है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में वर्तमान में 873 बसें है। अगर सरकार निजी बसों की पॉलिसी के तहत बसों को चलाती है तो इनकी संख्या तीन हजार के करीब होगी। वर्तमान में रोडवेज बसों की संख्या चार हजार के करीब है। यदि सरकार ने निजी बसों को चलाने की अनुमति दी तो इनकी संख्या भी 3900 के करीब होगी जिससे रोडवेज को काफी खतरा है। न तो नए कर्मचारी भर्ती होंगे बल्कि कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराएगा। प्रदर्शन के दौरान पहल सिंह तंवर, शमशेर, राममेहर, रामफल शिमला, महावीर, सुरेश कुमार, श्याम लाल कल्याण, जसबीर, कृष्ण गुलियाणा, बलराज, लखपत राय, महीपाल राणा, राजबीर सिह, मांगे राम शर्मा, ज्ञान चंद, बलराज सिह आदि मौजूद रहे।
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