कैथल। 134 ए के तहत आज से बच्चों को स्कूल अलॉट होने हैं। लेकिन निजी स्कूल संचालक अपनी पिछले सालों की अटकी फीस के लिए दाखिला देने की बात से इनकार कर रहे हैं। स्कूल संचालकों के जिले में करीब 6 करोड़ 48 लाख रुपये बकाया हैं। जिसे निकलवाने के लिए निजी स्कूल संचालकों ने एड़ी चोटी का जोर लगा लिया है। लेकिन अभी तक निजी स्कूल संचालकों को रिंबर्समेंट नहीं मिल पाई है।
निजी स्कूल एसोसिएशन के कैशियर जगजीत माजरा ने बताया कि शिक्षा विभाग रिंबर्समेंट न देकर निजी स्कूल संचालकों के साथ अन्याय कर रहा है। जिले में कुल 300 स्कूलों में 3500 से अधिक बच्चे 134 ए के तहत शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जिसमें नौंवी से 12वीं तक के बच्चों की कोई फीस नहीं देती है। इसके अलावा पहली से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों की दी जाने वाली फीस भी केवल नाम मात्र है। जबकि कक्षा चाहे कोई भी छोटे से छोटे निजी स्कूल का भी एक विद्यार्थी पर 25 से 28 हजार रुपये सालाना खर्च होता है। जबकि शिक्षा विभाग ने पिछले दो वर्षों में उन्हें सरकार के नियम के मुताबिक बनी दो करोड़ 70 लाख रुपये की राशि ही नहीं दी है।
कक्षा के अनुसार इतने स्कूलों की पेंडिंग है इतनी राशि : निजी स्कूल एसोसिएशन के चेयरमैन पवन कुमार कौल ने बताया कि पूरा जिला में करीब 300 स्कूलों में 3500 बच्चों की फीस के रूप में अटकी रिंबर्समेंट की राशि अटकी है। जिसमें पहली कक्षा से पांचवीं तक ग्रामीण इलाकों में 300 व शहरी क्षेत्रों में 500 और छठी से आठवीं कक्षा के ग्रामीण क्षेत्रों में 500 व शहरी क्षेत्रों में 700 रुपये फीस ली जाती है। जबकि नौंवी से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों की फीस सरकार नहीं देती है। पिछले दो वर्षों में पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों की 2 करोड़ 70 लाख रुपये व छठी से आठवीं तक 3 करोड़ 78 लाख रुपये सरकार ने नहीं दी है।
महासचिव हरपाल आर्य ने कहा कि सरकार व शिक्षा विभाग निजी स्कूलों को रिंबर्समेंट का रुपये देकर अनदेखा कर रही है। जिससे एसोसिएशन में गहरा रोष व्याप्त है।
जिला प्रधान राजेश मुंजाल ने बताया कि सरकार ने नियमों के मुताबिक अभी रिंबर्सबेंट नहीं दी है। विभाग स्कूलों से कक्षाओं की फीस की डिमांड के अनुसार रुपया दें। जब जक सरकार रिंबर्समेंट नहीं देगी तब तक जिले में किसी भी स्कूल में 134 ए के तहत दाखिला नहीं दिया जाएगा।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी शमशेर सिंह सिरोही ने कहा कि दाखिला करवाना विभाग का आदेश है। स्कूल संचालकों द्वारा दाखिला न दिए जाने संबंधी उन्हें कोई सूचना नहीं हैं।