फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैथल में आए 6.8 तीव्रता के भूकंप में 91 घायल, 17 की मौत

विज्ञापन
विज्ञापन
कैथल में आए 6.8 तीव्रता के भूकंप में 91 घायल, 17 की मौत
विज्ञापन



अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। कैथल में वीरवार दोपहर को 10 बजे आए 6.8 तीव्रता वाले भूकंप में 17 लोगों की मौत हो गई। जबकि 91 लोग घायल हो गए। घायलों में कुछ लोगों की हालात गंभीर बनी हुई है। सबसे ज्यादा नुकसान सिंचाई विभाग की जर्जर हो चुकी रिहायशी कालोनी, पदमा सिटी मॉल, जिला अस्पताल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हुआ। प्रशासन ने 5 टीमें बनाकर राहत कार्य जारी कर दिया। डीसी सुनीता वर्मा व इंसीडेंट कमांडर एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। यह स्थिति वीरवार को प्रशासन द्वारा करवाए गए भूकंप के मॉक ड्रिल में रही। जिसमें करीब 3 घंटे तक पूरा प्रशासनिक तंत्र राहत व बचाव कार्यों में जुटा नजर आया। इस रिहर्सल में कई बड़ी खामियां भी नजर आईं। जिनकी रिपोर्ट बनाकर प्रदेश मुख्यालय भेजी गई है।

लघु सचिवालय में 16 मिनट में आपात कार्य निपटा:-आपातकालीन ऑपरेशन केंद्र की रिस्पांसिबल अधिकारी डीसी सुनीता वर्मा, एसपी आस्था मोदी, इंसीडेंट कमांडर एवं एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह तथा सेना के कैप्टन गौरव फोगाट ने आपातकालीन ऑपरेशन केंद्र से प्रात: 10 बजे भूकंप का सायरन बजने के साथ ही मॉक ड्रिल के तहत की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया तथा जरूरी दिशा-निर्देश दिए। सुबह 10 बजे लघु सचिवालय से भूकंप की सूचना के लिए सायरन बजाया गया, जिसके बाद लघु सचिवालय स्थित सभी कार्यालयों के अधिकारी व कर्मचारी अपने-अपने कार्यालयों से तुरंत बाहर निकलकर सचिवालय के पार्किंग जोन में एकत्रित हुए। महज 16 मिनट के बाद सभी कर्मचारी अपनी सीटों पर लौट आए।
विज्ञापन

इमरजेंसी ऑप्रेटिंग सेंटर से मिली खासी मदद : -लघु सचिवालय में 10 बजे सायरन से भूकंप की सूचना के बाद 5 जगहों से भारी तबाही की सूचना मिली। इसके बाद यहीं पर इमरजेंसी ऑप्रेटिंग सेंटर स्थापित हुआ। जहां से मोबाइल व लैंडलाइन के काम ना करने पर 12 पुलिस राइडरों को विभिन्न कार्यालयों में वायरलेस से 7 मिनट में सभी विभागाध्यक्षों को सूचित किया गया। डीसी, एसपी व एडीसी के नेतृत्व में सेंटर में आपात योजना बनीं। पुलिस लाइन मैदान में बनाए गए स्टेजिंग एरिया में 550 पुलिस कर्मचारी, 7 दमकल गाडिय़ां, 7 एंबुलेंस, 5 क्रेन, 15 रोडवेज बसें, सेवा भारती, रेडक्रॉस के300 स्वयं सेवक, 100 होमगार्ड, 22 राईडर्स, 15 प्रशासनिक वाहन, 250 ऑफिसर व प्रशासनिक कर्मचारी, एकत्रित हुए। इनमें से 5 इंन्सींडेंट टीमें बनाई गई। जिनमें उक्त संसाधनों में से 5 दमकल, 5 एंबुलेंस, 5 रोडवेज बस, 5 ट्रेक्टर-ट्राली, 450 पुलिस कर्मचारी, 100 होमगार्ड, 18 राईडर्स, 15 प्रशासनिक वाहन, 250 कर्मचारी व अधिकािरियों को 5 टीमों में बांटकर एसडीएम कैथल कमलप्रीत कौर के नेतृत्व में पदमा सिटी मॉल, नायब तहसीलदार गुहला दिलावर के नेतृत्व में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, नहर कॉलोनी के लिए कैथल के बीडीपीओ सुमित कुमार, सामान्य अस्पताल के लिए ईओ नगर परिषद विक्रम सिंह तथा लघु सचिवालय के लिए ईटीओ शिव कुमार के नेतृत्व में इंसिडेंट रिस्पोंस टीम को रवाना किया गया।
आपातकालीन ऑपरेशन केंद्र में मौजूद अधिकारियों में डीएफओ हैरतजीत कौर, एसडीसएम कमलप्रीत कौर, जगदीप सिंह, सीटीएम सुशील कुमार, कैप्टन गौरव फोगाट, डीएसपी एवं सुरक्षा अधिकारी तरूण सैनी, जिला राजस्व अधिकारी दलीप सिंह, जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी दीपक खुराना, अनुसंधान अधिकारी शब्द दयाल शामिल रहे।

भूकंप मॉक ड्रिल में ही कई जगह तालमेल बैठाने में असफल रहा तंत्र, असली भूकंप आया तो होगा ज्यादा जान-माल का नुकसान

अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। वीरवार को जिला प्रशासन द्वारा पांच जगहों पर की गई भूकंप की मॉक ड्रिल में कई बड़ी खामियां नजर आईं। आदम जमाने का वायरलेस सिस्टम जहां सिसकता नजर आया, वहीं हल्के में ले रहे कई कर्मचारी मॉक ड्रिल में अपने विकलांग साथी को लघु सचिवालय में ही छोड़कर बाहर आ गए। सबसे बड़ी खामी सिविल लाइन में बनाए गए स्टेजिंग एरिया में 5 इंसीडेंट रिस्पांस टीमें बनाने में नजर आई। जहां करीब 25 मिनट तक टीमों को दिए जाने वाले संसाधनों व वाहनों को लाइन अप करने में खराब हो गए। आपात स्थिति में यदि इतना समय लगा तो मरने वालों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ेगी। कई आला अधिकारियों ने पूरी चुस्ती-फूर्ति के साथ मॉक ड्रिल में भाग लिया, लेकिन कर्मचारियों को एक तरह से जबरदस्ती इसमें शामिल करना पड़ा।
1. सुबह लघु सचिवालय में 10 बजे सायरन बजा। इसके बाद सभी कर्मचारी महज 10 मिनट में बाहर आ गए। इंसीडेंट कमांडर एडीसी ने ग्राउंड फ्लोर इंचार्ज से पूछा कि क्या आपका फ्लोर खाली हो गया, उन्होंने तुरंत हामी भर दी, जबकि एसडीएम कार्यालय का एक कर्मचारी तक तक भी बाहर नहीं आ पाया था। जो विकलांग था। उनकी मदद सबसे पहले होनी चाहिए थी।
2. टीमें बनाने में समय खराब, कर्मचारियों में नहीं दिखी चुस्ती:-इसके बाद प्रशासनिक तंत्र पुलिस लाइन मैदान पहुंचा। जहां जेसीबी, दमकल, पुलिस, वालंटियर्स की गाड़ियों को लाइन-अप करने में ही 25 से 30 मिनट खराब हो गए। खुद एसडीएम कमलप्रीत कौर व इंसीडेंट कमांडर एडीसी यहां गाड़ियों के लिए अलग-अलग पोस्टर ढूंढते नजर आए। जबकि पोस्टर लगाए जाने जैसा काम पहले से तय होना चाहिए था। यहां लगाया गया माइक सिस्टम भी काफी कमजोर निकला। थोड़ी दूर आगे भी इसके माध्यम से आवाज नहीं जा पा रही थी। इसके साथ ही इंसीडेंट कमांडर ने जब पुलिस के वायरलेस सिस्टम से बात करनी चाही तो संदेश पास होने में समय लगा। यह सिस्टम सिसकता नजर आया। यहां एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह, एसडीएम कमलप्रीत कौर, ईओ नगर परिषद विक्रम सिंह, दमकल अधिकारी रामकरण शर्मा सहित कुछ अन्य अधिकारियों को छोड़ दें तो सभी इसे ड्रिल ही समझ रहे थे, आपदा नहीं। पुलिस कर्मचारियों व प्रशासन की टीम के बीच तालमेल की कमी नजर आई। इसके बाद 5 जगहों पर टीमें रवाना हुई तो वहां भी तालमेल का अभाव नजर आया।
कई अधिकारी कर्मचारी मोबाइल पर बात करते नजर आए। जबकि ड्रिल में सूचना तंत्र ध्वस्त हो चुका था, केवल वायरलेस के माध्यम से ही बात हो सकती थी।
3. पदमा सिटी मॉल:-पदमा सिटी मॉल में भूकंप की घोषणा के बावजूद डॉमिनोज पिज्जा हट में ग्राहक बैठे आराम से पिज्जे का आनंद ले रहे थे। यहां दमकल ऑफिसर रामकरण शर्मा ने इसे खाली करवाया। यहां एक दिन पहले ही सिनेमा को खाली करवा लिया गया, जबकि ऐन मौके पर यह खाली होना चाहिए था। काफी प्रयासों के बाद यहां निजी प्रतिष्ठानों से लोग बाहर निकले।
जब रिस्पांस टीमें जा चुकी थीं, उसके 35 मिनट बाद ड्रोन कैमरा लेकर पुलिस कर्मचारी पहुंचा। उक्त कर्मचारी ने अकेले ही यहां ड्रोन चलाकर मॉक ड्रिल किया।
4. नगर परिषद भवन में 10 बजे सायरन बजा। नगर परिषद कार्यालय, पटवार भवन से कर्मचारी निकल कर भाई उदय सिंह किले के सामने एकत्रित हुए। ना कोई बचाव कार्य, ना कोई आपदा प्रबंधन। 10 बजकर 25 मिनट पर सभी कर्मचारी हंसी ठिठोली करते हुए वापस कार्यालयों में पहुंच गए।
5. 11 बजे वायरलेस से सूचना मिलने पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में भूकंप में ध्वस्त हो गए 2 कमरों में बच्चों के दबे होने कएी सूचना पर राहत टीम पहुंची। जहां बच्चों को बाहर निकाला गया। 11 बजकर 16 मिनट पर बच्चों को प्राथमिक चिकित्सा देकर अस्पताल के लिए रवाना किया गया। 11 बजकर 40 मिनट पर यह पूरा ड्रिल खत्म हो गया। यहां कई कर्मचारी मोबाइल पर बात करते, व्हॉटस-एप्प चलाते नजर आए।
4. जिला अस्पताल में 10 बजकर 10 मिनट पर सायरन बजा। यहां सीमएओ नजर नहीं आए। इसके बाद चिकित्सक अपने कक्षों से बाहर निकल कर आए गए। 10 बजकर 16 मिनट पर यहां राहत शिविर शुरू कर दिया गया। इसके बाद डीएसपी सतीश गौतम पहुंचे। उनकी ड्यूटी पोस्टमार्टम रूम में थी। इसके बाद कई डॉक्टर सहित स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारी मॉक ड्रिल को मॉक ड्रिल की तरह लेकर बिना किसी गंभीरता के पूरे आयोजन को देखते रहे। एक्सरे मशीन के नीचे मरीज दब गए थे। जिसमें 4 की मौत बताई गई व 12 घायल हुए। 11 बजकर 50 मिनट पर यहां राहत कार्य पूरा हो गया। कुछ लोग सेल्फी लेते नजर आए।

नकली मरीजों को डॉक्टर करते रहे चेक और इलाज बिना तड़पते रहे असली मरीज
अस्पताल में मॉकड्रिल में करीब तीन घंटे तक असली मरीज रहे इलाज से वंचित

अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नकली मरीजों को डॉक्टर चेक करते रहे और असली मरीज इलाज के लिए तड़पते रहे। ऐसा ही हाल वीरवार को सामान्य अस्पताल में देखा गया। जिला प्रशासन ने जहां सामान्य अस्पताल में मॉकड्रिल थी। मॉकड्रिल के लिए सुबह 10 बजे से लेकर एक बजे तक थी। तीन घंटे तक डॉक्टर बाहर मॉकड्रिल में नकली मरीजों को ही चैक करते रहे ओर वहां पर लोगों के साथ हंसी के ठहाके लगाते रहे। ना तो कर्मचारियों ने गंभीरता से लिया ना ही डॉक्टरों ने उसको गंभीरता से लिया। मौके पर मौजूद कई स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी यह तक कहते नजर आए कि अगर भूकंप व अस्पताल गिरता है तो वह खुद अपनी जान बचाकर पहले भाग जाएंगे।
तीन घंटे तक इलाज के लिए तड़पते रहे मरीज : मॉकड्रिल सुबह करीब 10 बजे शुरू हो गई थी। जिसके कारण सभी डॉक्टर, नर्स व अन्य कर्मचारी अस्पताल के बाहर आकर धूप में खड़े हो गए। जबकि जिन असली मरीजों को इलाज की आवश्यकता थी वह इलाज के लिए लाइनों लगे रहे।
गांव प्यौदा से आई महिला सुनीता ने बताया कि वह सुबह आठ बजे इलाज करवाने के लिए आई थी। लेकिन 12 बज चुके हैं अभी तक डॉक्टर नहीं आई है। सुबह 9 बजे की वह लाइन में खड़ी है। जिसको बुरी तरह से चक्कर आ रहे हैं। जिसको लाइन में खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है।
गांव सिरसल के मिया सिंह ने बताया कि पेट में दर्द काफी लंबे समय से दर्द है। लेकिन दो घंटे में डॉक्टर नहीं आए है। वह बाहर खड़े है। ऐसे में उसको खड़ा तक नहीं हुआ जा रहा है।
अस्पताल में मरीज डॉक्टरों के इंतजार में लंबी-लंबी कतारों में खड़े रहे। मरीज सुबह 9 बजे से ओपीडी की पर्ची करवाने के बाद कमरों के बाहर लाइनों में लगे रहे। लेकिन करीब तीन घंटे तक डॉक्टर न आने के कारण अस्पताल के लगभग सभी वार्ड बेहाल रहे। मरीजों में इलाज के लिए हाहाकार मचा रहा।
नकली मरीजों के साथ सेल्फी करते आए नजर : मॉकड्रिल में जहां राहत एवं बचाव कार्य में लगी टीम के लोग एक दूसरे के साथ सेल्फी लेते हुए इलाज करवाते नजर आए। अस्पताल के अंदर से लाए गए मरीजों के साथ कर्मचारी मोबाइल लेकर सेल्फी लेते नजर आए।

टाइमलाइन
सुबह 10 बजे लघु सचिवालय से सायरन बजाकर भूकंप का ऐलान
10 बजकर 10 मिनट तक सभी कर्मचारी बाहर
10 बजकर 16 मिनट पर इंसीडेंट कमांडर एडीसी के निर्देश के बाद कर्मचारी वापिस लोटे, अधिकारी इमरजेंसी ऑप्रेटिंग सेंटर में पहंचे
10 बजकर 21 मिनट पर पूरी योजना के साथ कमांडर शक्ति सिंह व प्रशासनिक अमला पुलिस लाइन के लिए रवाना
11 बजकर 7 मिनट तक 5 इंसीडेंट रिस्पॉंस टीमों का रवाना किया गय0ा
11 बजकर 37 मिनट पर पदमा सिटी मॉल की मॉक ड्रिल खत्म, काफी देर बाद ड्रोन लेकर पुलिस कर्मचारी पहुंचा।
2 बजकर 30 मिनट पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग से दी गई जानकारी
कैथल जिले में 17 मरे, 91 घायल:-भूकंप के कारण पदमा सिटी मॉल में 19, सिंचाई विभाग की रिहायशी कालोनी में 42, अस्पताल में 12, लघु सचिवालय में 7 और राजकीय स्कूल में 11 घायल हुए। जबकि मरने वालों में पदमा सिटी मॉल में 3, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 2 और सिंचाई विभाग की रिहायशी कालोनी में 12 की मौत हुई दिखाई गई।
विज्ञापन


रिपोर्ट : मॉक ड्रिल की कवरेज के लिए लघु सचिवालय, सिविल लाइन व पदमा सिटी मॉल से नसीब सैनी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से कमल बहल व जिला अस्पताल से राजू जगत की
फोटोग्राफर - राजेंद्र तंवर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें