न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम बिक रहा धान, किसानों में मायूसी
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नई अनाज मंडी में अब धान को समर्थन मूल्य मिलना भी मुश्किल हो गया है। पिछले सप्ताह तक 1750 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक चुकी पीआर ग्रुप से कई किसानों को मायूसी हाथ लग रही है। उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है।
अनाज मंडी से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को काफी संख्या में किसान ऐसे थे, जिन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिला। आढ़ती से लेन-देन के चलते ये किसान नाराजगी मोल लेना नहीं चाहते। दो किसानों ने बताया कि 1590 रुपये प्रति क्विंटल की बजाए उन्हें मुश्किल से 1450 रुपये प्रति क्विंटल धान की कीमत दी गई। वे शिकायत करें तो आढ़ती नाराज होंगे। इसलिए मजबूरन वे अपनी धान बेचकर जा रहे हैं। लेकिन उन्हें पता है कि उनका धान कागजों में सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य के अनुसार बिका हुआ दिखाया जाएगा। यह उनके साथ अन्याय है। लेकिन वे कर भी क्या सकते हैं।
इसी तरह से किसानों रामफल, किताब सिंह, रामनिवास, बलदेव सिंह ने कहा कि कई किसानों के साथ यह हुआ है। न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। पिछले सप्ताह अच्छी कीमतें मिलीं थीं। उस समय नमी जैसी कोई बात नहीं थीं। लेकिन अब नमी के नाम पर 1590 रुपये के सरकारी रेट में कट लगना शुरू हो गया है। जिससे किसानों को नुकसान है।
दूसरी ओर मार्केट कमेटी सचिव अजय श्योराण का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है कि धान न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम बिका हो। वे पूरा दिन मंडी में ही हैं। शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
मार्केट कमेटी चेयरमैन राजपाल तंवर का कहना है कि यदि किसी किसान को परेशानी है तो वह उन्हें शिकायत दे सकता है। उसकी बात सरकार तक पहुंचाई जाएगी। किसानों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
जाम की स्थिति, कल मंडी में हड़ताल पर रहेगी आढ़ती एसोसिएशन : नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश चौधरी ने कहा कि नमी ज्यादा होने के कारण ही कीमत कम हो सकती है। अन्यथा कीमत कम नहीं, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बिक रहा है। मंडी में 10 लाख से अधिक कट्टे पड़े हैं। उठान कार्य धीमा होने के कारण शुक्रवार को अनाज मंडी में हड़ताल रखी जाएगी। ताकि केवल उठान का कार्य हो सके।
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