कैथल। मुख्यमंत्री उडऩदस्ते की टीम ने बुधवार को पटवारखाने में छापा मारा। पांच घंटे तक चली इस पड़ताल में पता चला कि कैथल तहसील में पटवारियों द्वारा किए जाने वाले 1871 इंतकाल लंबित हैं। वहीं चार पटवारियों के रोजनामचे भी आधे-अधूरे पाए गए। इंतकाल रजिस्टरी होने के 15 दिन बाद रजिस्टर में इंद्राज करना होता है। अब पटवारियों को इस बात का जवाब देना पड़ सकता है कि इतनी बड़ी संख्या में इंतकाल क्यों और कब से लंबित हैं।
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री, उडऩदस्ता के निरीक्षक राजदीप सिंह मोर की अगुवाई में एडीसी कार्यालय से कार्यक्रम अधिकारी विजेंद्र सिंह, कर्मचारी राजपाल, पवन, जसबीर की टीम बुधवार सुबह पटवार खाना पहुंचीं। जहां सबसे पहले पटवारियों की हाजिरी की जांच की।
इसके बाद उनके रोजनामचे सहित इंतकाल की पड़ताल की। मौके पर 30 में से 26 पटवारी हाजिर मिले। ड्यूटी पर हाजिर पटवारियों मेें से तीन पटवारी व एक कानूनगो फील्ड में मिले। इसके अलावा चार पटवारी तहसील कार्यालय में कार्यरत मिले। एक पटवारी छुट्टी पर मिला।
पांच घंटे तक की गई लंबी पड़ताल के बाद पता चला कि कैथल तहसील में 1871 इंतकाल लंबित हैं जबकि किसी जमीन की रजिस्टरी होने के बाद इंतकाल दर्ज करने का अधिकतम समय 15 होता है। इन लंबित इंतकाल में जो इंतकाल 15 दिन से ज्यादा समय से लंबित हैं, उनके लिए पटवारियों से जवाब तलब किया जा सकता है। अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि इंतकाल दर्ज करवाने के लिए उन्हें चक्कर काटने पड़ते हैं। इतनी बड़ी संख्या में इंतकाल लंबित होना बड़ी लापरवाही भी हो सकती है। जबकि सरकार का प्रयास रहता है कि जल्द से जल्द इंतकाल दर्ज किए जाएं। इसके अलावा पटवारी द्वारा दिन भर की कार्रवाई दर्ज करवाने वाले चार पटवारियों के रोजनामचा रजिस्टर भी लंबित पाए गए। मुख्यमंत्री उडऩदस्ता टीम ने पूरी रिपोर्ट बना विभाग को भेज दी।
कर्मचारी जसबीर सिंह के हवाले से इंस्पेक्टर राजदीप सिंह मोर ने बताया कि पड़ताल में 1871 इंतकाल लंबित मिले हैं। जांच में एक कानूनगो व एक तीन पटवारी फील्ड में पाए गए। एक पटवारी छुट्टी पर मिला। चार पटवारियों के रोजनामचे लंबित हैं।
दिन भर चली पड़ताल, चर्चा का विषय बना रहा मामला
पटवारखाने में दिन भर मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की पड़ताल चली। इस कारण पूरा मामला चर्चा का विषय बना रहा। जांच दल में एडीसी कार्यालय से कार्यक्रम अधिकारी को भी शामिल किया गया। ताकि पड़ताल संंबंधी बारीकियों पर ध्यान रखा जा सके।
क्या होता है इंतकाल ...
जमीन की रजिस्टरी के बाद रिकॉर्ड में खरीदार का नाम दर्ज करना ही इंतकाल कहलाता है। इसी इंतकाल के बाद संबंधित जमीन को पहले वाला मालिक दूसरी जगह नहीं बेच सकता। जब रजिस्टरी होती है तो तहसील में यह देखा जाता है कि जमीन किसके नाम है। जब तक इंतकाल नहीं होगा, तब तक जमीन बेचने वाले के ही नाम रहती है।