किठाना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से डॉक्टर और सुविधाएं नदारद, लोग परेशान
फोटो नंबर-27
अमर उजाला ब्यूरो
राजौंद। गांव किठाना का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोगों के लिए सफेद हाथी बनकर रह गया है। स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी डॉक्टर पिछले लंबे समय से नही है। महिला चिकित्सक तो पूरे ब्लाक के चारों स्वास्थ्य केंद्रों में कहीं पर भी नहीं है। ऐसे में महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
गांव किठाना के आसपास के दो दर्जन से भी अधिक गांवों के लोगों के लिए यह नाम का स्वास्थ्य केंद्र रह गया है। स्वास्थ्य केंद्र में न डेंटल डॉक्टर, न सर्जन, न लेडी डॉक्टर न ही कोई लैब टेक्निशियन है। जिसे लेकर लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी रोष है। ग्रामीण अनूप चहल, राजेश पंच, रामकुमार, कृष्ण नंबरदार, कुलदीप ढांडा, वेदप्रकाश, राकेश मिस्त्री, रामपाल धीमान, पवन पंच, अनूप पंच ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में पिछले लंबे समय से स्टाफ की भारी किल्लत होने के कारण यह स्वास्थ्य केंद्र पर लोगों को परेशानी हो रही है। स्वास्थ्य केंद्र में एक फार्मासिस्ट राजौंद सेे किठाना सप्ताह में तीन दिन के लिए जाता है। डॉक्टरों के रिक्त पड़े पदों को लेकर ग्रामीणों ने स्वास्थ्य मंत्री तक गुहार लगाई। लेकिन कुछ भी नही हो पाया। लोगों को आपातकालीन के लिए जींद व कैथल जाना पड़ता है। इसके अलावा कोई भी आसपास स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। सरपंच प्रतिनिधि कृष्ण कुमार ने बताया की गांव की पंचायत के साथ मिलकर कई बार वह चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए गुहार लग चुके हैं। लेकिन अभी तक डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि अगर जल्दी ही डाक्टरों की नियुक्ति नही की गई तो सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
इस बारे में एसएमओ डॉ. रजनीश ने बताया कि डॉक्टरों के पदों के लिए लिखा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रसूति के बहुत अधिक केस होते हैं और गर्भवती महिलाओं को भी लेडी डॉक्टर न होने के कारण भारी परेशानी होती है। डॉक्टरों की नियुक्ति करना सरकार का काम है।