बसें बंद होने से विद्यार्थियों के लिए स्कूल-कॉलेजों में समय पर पहुंचना हुआ मुश्किल
अमर उजाला अभियान
सुबह बसों में लटक कर करना पड़ रहा है ठंड में सफर, रात को 8 व 9 बजे तक पहुंचते हैं घर
नाइट सर्विस बंद होने के कारण परेशान हैं विद्यार्थी, रोडवेज विभाग कर रहा है अनदेखी, सरकारी बसों में ही चलता है पास
प्राइवेट बसों में वसूला जाता है किराया
फोटो संख्या-6 से 9
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। हरियाणा रोडवेज द्वारा ओवरटाइम नीति के चलते बंद की गई नाइट सर्विस जिले भर में विद्यार्थियों पर भारी पड़ रही है। सुबह जहां बच्चों को समय पर स्कूल-कॉलेज पहुंचने में परेशानी हो रही है। वहीं रात को घर पहुंचने मेें उन्हें 8 से 9 भी बज जाते हैं। जबकि पहले से शाम 7 बजे घर पहुंच जाते थे। इससे न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बल्कि सुबह-शाम घंटों के हिसाब से समय भी खराब हो रहा है। विद्यार्थियों के पास केवल सरकारी बस में ही चलते हैं, लेकिन सरकारी बस के फेरे कम होने के कारण उन्हें मजबूरन प्राइवेट बसों में आना-जाना पड़ रहा है। जिससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
कोयल गांव से आने वाले विद्यार्थियों ने विश्वकर्मा चौक पर सुबह अमर उजाला से बातचीत में अपनी परेशानी बताई। विद्यार्थी कुलदीप व मनदीप ने बताया कि उन्हें सुबह यहां पहले कोचिंग सेंटर पर पहुंचना होता है। फिर कॉलेज से शाम को घर पहुंचना होता है। पहले उनके गांव में सुबह 7 बजे धनौरी की ओर से बस आती थी। लेकिन अब 7.40 मिनट पर आती है। तब तक वे लेट हो जाते हैं। इसी प्रकार से शाम के समय तो 5.30 के बाद बस ही नहीं है। पहले 7 बजे घर पहुंच जाते थे, अब उन्हें रात को 9 भी बज जाते हैं। समय व पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
इसी प्रकार से विद्यार्थी राजबीर ने कहा कि रात की सेवा बंद होने से धनौरी की ओर से आने वाले विद्यार्थियों को काफी दिक्कत हो रही है।
धनौरी, टोहाना व गुहला-चीका की ओर से सुबह आने वाली सरकारी बसों के फेरे हुए कम : सुबह विश्वकर्मा चौक पर जब बसें आईं तो विद्यार्थी ठिठुरती ठंड के बीच बसों की खिड़की में लटके हुए दिखाई दिए। कई बसों में अंदर छात्राओं को भी ठूंस-ठूंस कर भरी हुई बस में सवार होकर आना पड़ता है। कई छात्राएं बसों में बैठने वाली सीटों के आगे किसी तरह जगह बनाकर खड़ी होकर सफर करती हुई दिखाई दीं। सुबह 8.30 से 9 बजे तक यहां 3 बसें सरकारी आईं। जिसमें एक धनौरी की ओर से व 2 गुहला की ओर से आई थीं। इन सभी में पांव रखने की जगह नहीं थीं। जबकि प्राइवेट व पंजाब रोडवेज की आई 5 बसों में ज्यादा भीड़ नहीं थी। जिसका कारण था कि स्कूल-कॉलेजों के बच्चों के पास केवल सरकारी बसों में ही चलते हैं और उनके फेरे कम होने के कारण विद्यार्थियों को काफी इंतजार के बाद भीड़भाड़ के बीच इन्हीं बसों में सफर करना पड़ता है।
एक अध्यापक ने कहा कि जब से रात की सेवा बंद हुई है, तब से सुबह शहर में पहुंचने व शाम को गांव में पहुंचने की विद्यार्थियों की सुविधा ही खत्म हो गई है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। यह बड़ी पेशानी है।
15 रूटों पर रात को रुकती थी बसें, हजारों बच्चों को मिल रही थी सुबह शाम सेवा : विभाग ने जिले भर में 15 रूटों पर जाने वाली बसों का रात्रि ठहराव बंद कर दिया है। जिस कारण हजारों बच्चों को सुबह शाम मिलने वाली बस सेवा पर असर पड़ा है। विभाग की ओर से जिले में गांव करोड़ा, बाकल, कुकरकंडा, सेरहधा, सिरसल, कौल, सांघन, पिल्लू खेड़ा, उचाना, खरकां, कुराड़, हजवाना रूटों पर बस सेवा बंद की गई है।
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