एक ऑपरेशन में आठ से नौ हजार की अवैध वसूली
टेंडर में जो सामान 2175 रुपये में दिया जाना था, उसे मरीजों को 10290 रुपये में बेचा
जिला अस्पताल में खेला जा रहा था पांच गुणा महंगा सामान बेचने का खेल, शिकायतकर्ता को मिली जांच रिपोर्ट की प्रति में खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिला अस्पताल में हड्डियों के ऑपरेशन के लिए जो सामान हरियाणा सरकार को 2175 रुपये में दिया जाना था, उसे 10290 रुपये में दिया जा रहा था। इस तरह से एक ऑपरेशन में 8 से 9 हजार रुपये की अवैध वसूली हो रही थी। यह बात स्वयं विभाग की जांच टीम ने अपनी जांच में मिली है। इसकी रिपोर्ट विभाग के आला अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। यहां अभी तक हुए ऑपरेशनों की जांच हो तो डॉक्टर व फर्म की मिलीभगत से लाखों रुपये का घोटाला सामने आ सकता है।
हड्डियों के ऑपरेशन में गड़बड़ी के मामले की जांच रिपोर्ट वीरवार को शिकायतकर्ता के हाथ लग गई। इसमें शिकायत के बाद हुई जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच रिपोर्ट में सीधा-सीधा कहा गया है कि डॉ. अमन सूद ने मरीजों को एक ही फर्म से सामान खरीदने के लिए मजबूर किया गया। डॉ. न तो मरीज को सामान की लिस्ट देता था और न ही बाद में सामान दिखाता था। सामान सीधा ऑपरेशन थियेटर में पहुंचता था। मरीज से सीधा वसूली होती थी।
यह कहा जांच रिपोर्ट में : जांच अधिकारी ने लिखा है कि डॉ. अमन सूद की ओर से मरीजों को ऑर्थो का सामान लाने के लिए कोई सामान की लिस्ट नहीं दी जाती थी। एक फोन नंबर दिया जाता था जो सामने वाली दुकान के मालिक सतिंद्र लाटका का था। दुकान मालिक ने भी कुबूल किया है कि यह नंबर उसी का है। मरीज से दुकानदार पैसे लेकर ऑर्थो का सामान मरीजों को न ही दिखाया जाता था, न ही दिया जाता था। डॉ. अमन सूद के कहने पर ही सामान सीधा ओटी में पहुंचता था। डॉ. अमन सूद मरीज की ओर से ऑर्थो का सामान तीन से पांच गुना दाम पर एसके मेडिकल हाउस से खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। यह नियमों के विरुद्ध है। यह गंभीर मामला है। यह जांच रिपोर्ट आगामी कार्रवाई के लिए प्रेषित है।
इस तरह पाया गया बिलों में अंतर
तिथि बिल नंबर सरकार के टेंडर में रेट एसके मेडिकल द्वारा अंतर
दिए गए बिल में रेट
22-2-18 2309 2175 10290 8115
26-7-18 2517 2735 9765 7030
22-7-18 2506 2795 10300 7505
22-7-18 2507 2740 10300 7560
--
तो क्या किसी को भी मालूम नहीं थी यह लूट
जिला अस्पताल में यह लूट न जाने कितनों से चल रही है। तो क्या किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इससे भी बड़ी गंभीर बात तो यह है कि एक फर्म टेंडर में जितनी राशि भरती है, सेवा देने के दौरान कैसे पांच गुना ज्यादा तक कीमत वसूल सकती है। इस कारण आशंकाएं हैं कि यहां मिलीभगत के बिना यह संभव ही नहीं है। जबसे इस फर्म को टेंडर मिला है, तभी से पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। तभी जाकर असली सच्चाई सामने आ सकती है।
--------
जब तक मुझे न्याय नहीं मिलता, चैन से नहीं बैठूंगा। मैं लोगों के साथ शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिलूंगा और पूरी बात उनके सामने रखी जाएगी।
-सतीश कुमार, शिकायतकर्ता