गेहूं बिजाई में देरी के कारण पड़ सकता है पैदावार पर असर
अमर उजाला ब्यूरो
पूंडरी। गेहूं बिजाई में हो रही देरी का असर पड़ेगा गेहूं की पैदावार पर। इस बार समय से पहले ही शुरू हुई सर्दी की वजह से इस बार जिन किसानों ने धान कटाई के बाद पानी दिया हुआ था। उनमें अभी अधिक नमी होने की वजह से वो गेहूं बिजाई करने के लायक नहीं हुए है। जिसकी वजह से गेहूं बिजाई का समय निकल रहा है और अभी भी क्षेत्र में लगभग 25 प्रतिशत खेत खाली पड़े है। क्षेत्र के किसान रामसिंह, लीला राम, दिलबाग सिंह, शेरसिंह, निशान सिंह, प्रदीप राणा, कंवरपाल सिंह व रणदीप ने बताया कि लेट हो रही बिजाई का असर गेहूं की पैदावार पर पड़ेगा। इससे पैदावार कम होगी और पौधा पूरी तरह से फुटाव नहीं कर पाएगा। कई किसान गेहूं का समय निकलता देख आलू की बिजाई भी कर रहे है।
कृषि विशेषज्ञ डा. श्योराण ने बताया कि गेहूं की बिजाई का समय अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से लेकर 25 नवंबर तक का सामान्य तौर पर होता है, लेकिन इस बार मौसम खराबी के चलते जिन किसानों ने अभी तक बिजाई नहीं की है, वो गेहूं की पछेती किस्में जो दिसंबर माह में भी बिजाई की जाती है कर सकते है।
मुख्य वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र डा. रमेश वर्मा ने बताया कि कैथल जिले में गेहूं बिजाई के लिए एक लाख 65 हजार हेक्टेयर का रकबा है, जिसमें से लगभग 80 प्रतिशत में गेहूं की बिजाई हो चुकी है। जिन किसानों ने 25 नवंबर तक बिजाई नहीं की है, वे गेहूं की पछेती किस्में 25 एडी-2851, राज 3765, यूपी 2338 व पीबीडब्ल्यु 373 की बिजाई कर सकते है। उन्होंने बताया कि किसान इस दौरान बिजाई की मात्रा प्रति एकड़ 45 या 50 किलोग्राम की करें। उन्होंने बताया कि गेहूं बिजाई लेट होने का कारण कलायत एरिया बाड़ी के खेत खाली नहीं हुए और बासमती धान के एरिया में भी कटाई भी लेट है और मौसम में भी समय से पहले ठंडक हो गई।
जिले में 80 प्रतिशत में हो चुकी है गेहूं की बिजाई-डा. रमेश
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