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साढ़े सात हजार का बढ़ेगा वेतन, साठ हजार रहेंगे वंचित

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साढ़े सात हजार का बढ़ेगा वेतन, साठ हजार रहेंगे वंचित
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कर्मचारी संघ ने कहा-फैसले पर पुनर्विचार करे सरकार
सभी कच्चे कर्मचारियों को दिया जाए समान काम समान वेत
सभी तरह के कच्चे कर्मचारियों को समान वेतन समान काम देने की मांग की
कर्मचारियों को श्रेणियों में बांटकर दस गुणा कर्मचारियों को उनके हक से वंचित कर रही है सरकार-संघ

अमर उजाला ब्यूरो
कैथल।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कच्चे कर्मचारियों को समान काम समान वेतन के लिए सरकार द्वारा अपनाई गई नीति से काफी संख्या में कर्मचारी इस हक से वंचित रह जाएंगे। क्योंकि जिस नीति के तहत सरकार ने समान काम समान वेतन देने का फैसला लिया है, उसके तहत महज 7 हजार कर्मचारियों को ही लाभ मिल सकेगा। राज्य कर्मचारी संघ को भी सरकार के इस फैसले पर एतराज है।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान जसबीर सिंह, सचिव जरनैल सिंह व प्रेस सचिव सतबीर गोयत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को श्रेणियों में बांट दिया गया है। यह उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह कभी नहीं कहा कि पार्ट टू पालिसी के तहत लगे कर्मचारियों को लाभ दिया जाए और पार्ट वन के तहत कर्मचारियों को वंचित रख दिया जाए। सरकार की मंशा कतई ठीक नहीं है। 50 से 60 हजार कर्मचारियों को लाभ से वंचित रखना उचित नहीं है। सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सभी अनुबंधित कर्मचारियों को इस लाभ के दायरे में लाना चाहिए।
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विदित रहे कि प्रदेश में कच्चे बिजली कर्मचारियों की नियुक्ति ठेकेदार के माध्यम से हुई है, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों व अतिथि अध्यापकों की नियुक्ति में पार्ट वन अथवा पार्ट टू की किसी पालिसी का इस्तेमाल नहीं हुआ है। ऐसे में तीनों श्रेणियों के कर्मचारियों में आक्रोश बढना तय है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर और एसए बोबदे की खंडपीठ ने स्टेट आफ पंजाब बनाम जगजीत सिंह केस में सुनवाई करते हुए 26 अक्टूबर 2016 को समान काम के लिए समान वेतन देने का फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा कि एक ही काम में लगाए गए लोगों को किसी दूसरे व्यक्ति से कम सैलरी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने भारत के वेलफेयर स्टेट होने का तर्क भी दिया और कहा कि कम पैसे पर काम करवाना मानवीय गरिमा के खिलाफ है।
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ये थी पार्ट टू पॉलिसी : आउटसोर्सिंग पालिसी पार्ट-टू वर्ष 2015 में तैयार हुई थी, जिसमें स्वीकृत पदों पर सरकारी विभागों की चयन समिति के माध्यम से सीधे भर्ती करने का प्रावधान है। भर्ती के लिए विज्ञापन भी सरकारी विभाग की ओर से निकलेगा। पिछले सप्ताह ही आउटसोर्सिंग पॉलिसी पार्ट-टू के तहत अनुबंध आधार पर होने वाली भर्ती में आरक्षण देने के आदेश जारी किए थे।
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