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ऋण ना लेने वाले केवल 4 किसानों ने करवाया फसल का बीमा

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ऋण न लेने वाले केवल चार किसानों ने करवाया फसल का बीमा
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्रधानमंत्री फसल बीमा में इस बार भी महज ऋणी किसानों का ही बीमा हुआ है। बिना ऋण वाले केवल 4 किसानों ने बीमा करवाया है। स्पष्ट है कि किसान फसल बीमा योजना में रुचि नहीं ले रहे हैं। या फिर प्रशासनिक तंत्र योजना को किसानों के बीच ले जाने में सफल नहीं हो पा रहा है। पिछले साल की तरह से करीब 40 हजार से अधिक ऐसे किसान, जिन्होंने किसी ना किसी बैंक से लोन लिया हुआ है। उनके खातों से प्रीमियम की राशि काट ली गई है।
सोमवार को फसल बीमा योजना के अंतिम दिन अमर उजाला ने कृषि संबधित कार्यालयों में जाकर इस योजना के तहत किए जाने वाले आवेदन की लाइव रिपोर्ट हासिल की। जिसमें किसानों की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर उपेक्षित सा माहौल दिखा।
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सबसे पहले अमर उजाला लघु सचिवालय स्थित कृषि विभाग के कार्यालय में गया और वहां बैठे कर्मचारी से बीमा योजना के संदर्भ में जानकारी लेनी चाही। कर्मचारी ने बताया कि फसल बीमा योजना करवाने के लिए किसानों को यहां आने की आवश्यकता नहीं होती है। जिस किसान ने बैंक से ऋण लिया है उसकी फसल की बीमा अपने आप हो जाती है। जो बिना लोन वाले किसान है वे यहां जानकारी लेने के लिए तो आ सकते हैं। लेकिन आवेदन बैंक या अटल सेवा केंद्रों में किया जाता है। उसने बताया कि अंतिम दिन केवल चार किसान ही यहां पर इस योजना की जानकारी लेने के लिए पहुंचे।
इसके बाद टीम जिला परिषद भवन में स्थित कृषि उपनिदेशक के कार्यालय में पहुंचे तो वहां जिस कर्मचारी की ड्यूटी थी, वह कर्मचारी वहां लापता मिला। यहां मौजूद कर्मचारियों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में जानकारी हासिल करनी चाही तो हाथ में पर्चा थमा दिया और कहा कि आप यह पर्चा लें, इस पर कुछ शर्तें हैं, इसे पढ़ें व इस पर जो नंबर है उस पर संपर्क कर लें। वे आपको बीमा के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग में आवेदन का कोई प्रावधान नहीं है यह बैंक से होता है। लेकिन जब उनसे यह सवाल किया गया कि वे इसकी पूरी जानकारी दें दे तो उन्होंने पर्चा दे दिया और कहा कि यही जानकारी हैं।

बैंक की लिमिट वाले किसान है दुखी :- बता दें कि सरकार लगातार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अधिक बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है। जिसके तहत बैंकों के माध्यम से लिमिट राशि वाले किसानों के प्रति एकड़ के हिसाब से खाते में से रुपये काटे जाते हैं। जिससे किसान काफी तंग आ चुके हैं और वह अपना प्रीमियम नहीं देना चाहते। इसलिए जिन किसानों का बैंकों में ऋण को लेकर खाता है। वह इस योजना से राजी नहीं हुए है।

योजना की शर्तों में किसानों को होता है नुकसान :- भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम चढ़ूनी ने कहा कि यह योजना लाभकारी नहीं है। इसमें किसानों के लिए कुछ ऐसी शर्तें है। जिसमें किसानों को उनकी फसल नष्ट न होने पर इसका क्लेम नहीं मिलता है। जिसमें आग से नुकसान होने पर, फसल में बीमारी लगे तो वह पूरे गांव के होने की शर्त होना प्रमुख है। चढूनी ने बताया कि धान में ऐसा नहीं होता। धान की किस्म के मुताबिक उसमें बीमारी लगती है। जबरन पैसा काटना गलत है। यह किसानों की इच्छा पर होना चाहिए।

बिना ऋण लेने वाले महज 4 किसानों ने करवाया बीमा :- कृषि उपनिदेशक कार्यालय में हरबंस ने बताया कि बिना ऋण लेने वाले 4 किसानों ने बीमा करवाया है। ऋण लेने वाले किसानों का डाटा बाद में आएगा। वह बैंकों से होता है। पिछले सीजन में यह संख्या 42 हजार 439 थी। इस बार भी लगभग इतने ही किसान होने चाहिए।
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कृषि विभाग के उप-महानिदेशक डॉ. महावीर सिंह ने बताया कि किसानों को विभाग द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जागरूक किया गया है। विभाग के कर्मचारी किसानों को इस योजना के लाभ भी बता चुके है। किसानों ने अटल सेवा केंद्रों के माध्यम से इस योजना के लिए आवेदन किया है।
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