संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एनआईआईएलएम विश्वविद्यालय में वैदिक भारतीय शिक्षण मंडल की पहली बैठक हुई। इसमें विद्वानों और सदस्यों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन, संरक्षण तथा उसके मूल्यों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ने को लेकर मंडल की दृष्टि और मिशन पर गहन विचार-विमर्श किया। इस मौके पर मंडल में 18 नए सदस्यों को औपचारिक रूप से शामिल किया गया। इस पहल को उपस्थित विद्वानों और शिक्षाविदों ने एक दूरदर्शी और सराहनीय कदम बताया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की शिक्षा को दिशा देने वाली अमूल्य विरासत है। बैठक के दौरान गणपति तेती, प्रांत संगठन मंत्री (हरियाणा–पंजाब–
दिल्ली) की विशेष उपस्थिति रही। इस दौरान शिक्षण मंडल का नाम औपचारिक रूप से “वैदिक भारतीय शिक्षण मंडल” रखा गया।
इस अवसर पर यह भी निर्णय लिया गया कि एनआईआईएलएम विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए छात्रों में भारतीय मूल्यों का समावेश करेगा। इसके तहत समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम, व्याख्यान, संवाद एवं विशेष सत्रों का आयोजन किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और भारतीय परंपराओं के प्रति समझ विकसित हो सके।
बैठक को भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा के माध्यम से समाज तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया। कार्यक्रम में डीन एकेडमिक्स डॉ. आर. के. गुप्ता, डॉ. रेखा गुप्ता, अमरजीत, डॉ. सुमन, डॉ. एकता चहल, राजेंद्र गोयत, डॉ. सोनू आदि मौजूद रहे।