सीएम विंडो पर नवग्रह कुंडों पर कब्जे की शिकायत, स्थिति देखने पुरातत्व विभाग की टीम पहुंची शहर
- टीम ने स्वीकारा, कुंडों पर कब्जे, लेकिन विभाग के तहत नहीं आते कुंड, अखिल भारतीय हिंदू महासंघ ने दी थी शिकायत
- कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को लिखा जाएगा कुंडों को कब्जे से मुक्त करवाने के लिए
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। पुरातत्व विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शहर में स्थित 9 ग्रह कुंड उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। लेकिन यह जरूर है कि इन्हें पुरातत्व विभाग के संरक्षण में लिया जा सकता है। इसके अलावा विभाग इन कुंडों के जीर्णोद्धार के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को भी लिखेगा। यह जानकारी विभाग के सहायक अधिकारी ने कैथल पहुंचने पर दी। वे यहां इन कुंडों पर किए गए अवैध कब्जों की शिकायत पर देखने हुए थे।
अखिल भारतीय हिंदू महासंघ की ओर से की गई शिकायत में कहा गया था कि शहर में नवग्रह कुंडों में से अधिकतर कुंडों पर कब्जा किया जा चुका है। 4 कुंडों का जीर्णोद्धार हो चुका है। इनमें बृहस्पति, बुध, शनि व शुक्र कुंड शामिल हैं। इसके अलावा केतू, शुक्र, राहु, भौम व चंद्र कुंड का जीर्णोद्धार नहीं हो पाया। शिकायत में कहा गया है कि ये नवग्रह कुंड पूरे भारत में केवल कैथल जिले में हैं। जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध में मारे गए योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए पूजा की थी। इनमें से लुप्तप्राय: हो चुके 5 कुंडों से अवैध कब्जे हटवाए जाएं। लेकिन यदि इनके लिए 20 फुट भी जगह भी मिल जाए तो निशानी के तौर पर छोटा सा कुंड बनवाया जा सकता है। ताकि आने वाली पीढ़ियों को इस बारे में जानकारी मिल सके। प्रधान कर्मचंद जिंदल व चेयरमैन सतपाल गुप्ता की ओर से यह शिकायत भेजी गई थी।
इस शिकायत के बाद चंडीगढ़ स्थित पुरातत्व विभाग के वेदपाल, सहायक रविकांत कैथल पहुंचे। जहां उन्होंने शिकायतकर्ता से मुलाकात की और बताया कि ये सभी कुंड विभाग के तहत नहीं आते। लेकिन इनमें से जो बच गए हैं, उन्हें विभाग के अधीन लिया जा सकता है। इसके साथ ही वे कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को भी इस बारे में लिख रहे हैं कि इन कुंडों का जीर्णोद्धार करवाया जाए। क्योंकि ये कुंड कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि के भीतर आते हैं।