सरकार के फरमान के बाद कंबाइन मालिकों ने किया एसएमएस सिस्टम का विरोध
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अमर उजाला ब्यूरो
सीवन। प्रदेश सरकार व राज्य प्रदूषण बोर्ड के आदेशों के बाद कंबाइन के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम जोड़ना अनिवार्य करने के फरमान के विरोध में कंबाइन मालिकों ने रविवार को पंचायत घर में एक बैठक की। जिसकी अध्यक्षता सुखविंद्र सिंह ने की। बैठक में क्षेत्र के सभी कंबाइन मालिकों ने भाग लिया और सरकार के फरमान का जमकर विरोध किया। बैठक में निर्णय लिया गया जो कंबाइन मालिक एसएमएस सिस्टम लगवाना चाहता है लगवाए और जो नहीं लगवाना चाहता वह न लगाए। इसके अलावा बैठक में धान की कटाई के रेट तय करने पर चर्चा हुई लेकिन सहमति न होने के कारण रेट तय करने के लिए सोमवार का समय रखा गया है। इस अवसर पर भाजपा कृषक समाज के प्रदेश महासचिव अमरेंद्र सिंह खारा, साहिब सिं गुरदासपुरी तरलोक सिंह, राज कुमार, सोनू, चिक्की शर्मा, गुरमेल सिंह, प्रेमी रसूलपुर भी मौजूद थे।
किसानों की राय लेने के बाद बनाएं नीति : किसान नसीब सिंह, आनंद मुंजाल, जगीर सिंह, हजूर सिंह, जसविंद्र सिंह लल्ली, अशोक कुमार का कहना है कि सरकार व राज्य प्रदूषण बोर्ड और कृषि अधिकारी एसी रूम में बैठकर किसानों के लिए ऐसे फरमान जारी कर रहे है जिससे किसानों का भला नहीं हो सकता बल्कि किसान कर्ज की दलदल में धंसता चला जाएगा। कंबाइनों के पीछे एसएमएस सिस्टम लगाने से प्रदूषण कम नहीं हो सकता। सरकार को ऐसे फरमान जारी करने से पहले धरातल पर आकर किसानों की राय जाननी चाहिए।
एक लाख रुपये अधिक का होगा खर्च : कंबाइन मैकेनिक जसवंत, गुरदेव, सुखदेव का कहना है कि कंबाइन मालिक कंबाइनों पर एसएमएस सिस्टम लगवाने पर लगभग 1 लाख 15 हजार रुपये खर्च आएगा। इसके लगाने से कंबाइन की डीजल की खपत प्रति एकड़ 10 से 11 लीटर हो जाएगी और डीजल के रेटों में हो रही भारी वृद्धि के कारण धान की कटाई के रेट में भी भारी वृद्धि होगी।
अवशेषों को एकत्रित करने वाली मशीन की पड़ेगी जरूरत : फसल के अवशेषों को एकत्रित करने वाली मशीन के विक्रेता संदीप मेहता ने बताया कि इस मशीन की कीमत 3 लाख 75 हजार रुपये है और जब यह मशीन खेत में फसलों के अवशेषों के बंडल बनाएगी, उस दौरान दो ट्रैक्टर, तीन ट्रॉली और लगभग आठ मजदूरों की जरूरत पड़ेगी। ताकि मशीन द्वारा बनाए जा रहे बंडलों को साथ की साथ उठाया जा सके।