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स्वास्थ्य विभाग ने खोली सील की गई जिला अस्पताल के सामने की दुकान

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अस्पताल के सामने की दुकान की सील खोली, ऑपरेशन का सामान मिला
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चार घंटे की जांच में एक-एक उपकरण का बैच नंबर से लेकर उपकरण के नाम तक को नोट किया
पूरे मामले की वीडियोग्राफी भी करवाई गई, सरेआम सिफारिश करते नजर आए चिकित्सीय अधिकारी
फोटो संख्या-1 से 4
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शुक्रवार को हड्डियों के ऑपरेशन में सामान को लेकर मिली शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील की गई दुकान को विभाग ने सोमवार को फर्म मालिकों की उपस्थिति में खोल दिया। दुकान में हड्डियों के ऑपरेशन में प्रयोग होने वाला इतना सामान मिला है कि सभी उपकरणों से 50 से 60 ऑपरेशन हो सकते हैं। विभाग ने शरीर के अंदर फिट किए जाने वाली प्लेट्स, रॉड व पेच के स्टॉक को कब्जे में ले लिया है। अब फर्म को नोटिस जारी करके इस सामान के बिल का विवरण मांगा जाएगा। इसके साथ ही अवैध रूप से दुकान में ऑपरेशन का सामान रखने पर ड्रग एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। चार घंटे तक चली लंबी जांच में स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारी व डॉक्टर यहां आस-पास मंडराते रहे।
विदित रहे कि एक मरीज की शिकायत के बाद हड्डियों के ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले सामान व सरकारी दवाइयां मिलने के संदेह में जिला अस्पताल के सामने स्थित एक दुकान को विभाग ने एसडीएम कमलप्रीत कौर के आदेश के बाद शुक्रवार को सील किया था। इसके बाद से ही यह दुकान बंद पड़ी हुई थी। सोमवार सुबह सीएमओ डा. सुरेंद्र नैन, एसएमओ डा. आरडी चावला, डा. दिनेश कंसल की टीम यहां पहुंची और गवाहों की मौजूदगी में दुकान की सील तोड़ कर शटर खोला। दुकान में भारी मात्रा में हड्डियों के ऑपरेशन के दौरान प्रयोग होने वाला सामान, एक मोटरसाइकिल, एक रैक, तीन कुर्सियां व एक टेबल मिलीं। सुबह करीब 12 बजे शुरू हुई कार्रवाई दोपहर बाद 4 बजे तक जारी रही। जिसमें ड्रग कंट्रोल ऑफिसर ने ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले सामान के 124 उपकरणों का बैच नंबर से लेकर उनके नाम तक नोट किए। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई गई।
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जांच टीम में शामिल एसएमओ डॉ. आरडी चावला ने कहा कि दुकान की सील तोड़कर सामान जांचा गया तो यहां हड्डियों के ऑपरेशन में प्रयोग होने वाली 124 रॉड व प्लेट्स व 300 पेच के अलावा 197 ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले लगभग उपकरण सहित कुल 4 से 5 लाख रुपये का सामान बरामद हुआ है। 124 शरीर के अंदर फिट होने वाले इंप्लांट्स व 300 पेच ड्रग कंट्रोल ऑफिसर ने अपने कब्जे में ले लिए हैं। 197 उपकरण, जिनके बारे में संदेह है कि ये ड्रग एक्ट के तहत आते हैं या नहीं, उन्हें सील कर दिया गया है। यदि ये एक्ट के अधीन नहीं हैं तो फर्म को वापस कर दिए जाएंगे। इसके अलावा कुर्सी, मोटरसाइकिल, खाली डिब्बों, डायरी को फर्म संचालकों को सौंप दिया है। डॉक्टर पर लगे आरोपों, महंगा सामान बेचने, टैक्स नियमानुसार है या नहीं जैसे आरोपों की जांच अभी चल रही है।
फर्म संचालक सत्येंद्र ने बताया कि उसके पास एसके मेडिकल हाउस के नाम से विभाग का लाइसेंस है। जिसका बाकायदा जीएसटी नंबर है। यहां दो ऑपरेशन में प्रयोग होने वाला सामान है। एक ऑपरेशन के लिए एक रॉड प्रयोग होने के बावजूद 4 गुणा सामान भेजना होता है। कई अन्य उपकरण भी होते हैं। इसलिए सामान ज्यादा दिख रहा है। यहां पर पंखा तक नहीं है, यह दुकान सिर्फ सामान लेकर आने वाले फर्म कर्मी के लिए कुछ देर बैठकर विश्राम करने के लिए है। सामान इसीलिए रखा रह गया कि बारिश हो गई थी। नियमानुसार बिल काट कर सामान दिया गया है। यह बात सही है कि उनका नंबर मरीज को डॉक्टर द्वारा दिया जाता है। इसके बाद सामान भेजते हैं। महंगे सामान के सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी कंपनियों का अलग-अलग रेट होता है।
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बिना लाइसेंस के इस तरह की दुकान में यह सामान नहीं रख सकते। इसके लिए नोटिस जारी करके जवाब मांगा जाएगा। इसके बाद कोर्ट में केस दायर किया जाएगा। इस मामले में पुलिस में केस दर्ज करवाने की जरूरत नहीं है। रही बात सामान के महंगा व सस्ता बेचने की तो फर्म से खरीद के बिल मंगवाकर मिलान के बाद ही कुछ बताया जा सकेगा।
- डॉ. प्रवीण, ड्रग कंट्रोल ऑफिसर
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