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प्रतिदिन 33 रुपये के हिसाब से मिलता है वेतन, एक हजार में किराया भी नहीं होता पूरा

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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। वेतन बढ़ाने की मांग पर आशा वर्कर यूनियन की ओर से जिला अस्पताल में दिया गया धरना वीरवार को आठवें दिन भी जारी रहा। वीरवार के धरने की अध्यक्षता सुदेश फरियाबाद ने की। जबकि मंच संचालन बाला रसीना ने किया। सुदेश ने बताया कि सरकार के विरोध में आशा वर्करों द्वारा टीकाकरण का बहिष्कार अभी भी जारी है। जो मांगो के पूरा होने तक जारी रहेगा। उसने बताया कि जिला करीब 3900 आंगनबाड़ी व आशा वर्कर शनिवार से शुरु होने वाले पोलियों अभियान का पूरी तरह से बहिष्कार करेगी। जिला प्रधान संतोष ब्राह्मणी वाला ने बताया कि सरकार द्वारा प्रतिमाह एक हजार रुपये उन्हें मानदेय के रुप में मिलते है। जो प्रतिदिन 33 रुपये बनती है। 33 रुपयों में घर घर जाकर करने वाले सर्वे के लिए किराया भी पूरा नहीं होता है। ऐसे में आशा वर्कर भला कैसे कार्य करे। उन्होंने सरकार से न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये लागू करने व आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की। इस मौके पर एनएचएम की जिला वरिष्ठ उप प्रधान सुदेश आर्य, सुषमा, मेघा, सीमा व रेनू, सीटू के जिला सचिव अशोक शर्मा, जसपाल सिंह, गीता कौल, इंदु, ममता, बाला, प्रवीन, सविता, जगवंती, सरस्वती सहित अन्य मौजूद रही।
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यह है आशा वर्करों की मांगे:-आशाओ की प्रमुख मांगो में पक्का कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन 18000 रुपये देने, समाजिक सुरक्षा की गारंटी देने, एनएचएम का बजट बढ़ाने, 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करने, हटाई गई फैसिलिटेटरों को बहाल करने जैसी अन्य मांगे शामिल है।
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प्रतिदिन 33 रुपये के हिसाब से मिलता है वेतन, एक हजार में किराया भी नहीं होता पूरा
आशा वर्कर का टीकाकरण अभियान का बहिष्कार जारी, कल से पोलियों अभियान के तहत ाी नहीं करेगी कोई कार्य
मांगे पूरी न होने तक जारी रहेगा प्रदर्शन
फोटो नंबर-01
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