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जिले भर में करीब 60 स्कूलों में कमरों की आवश्यकता

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जिले भर में करीब 60 स्कूलों में कमरों की आवश्यकता, ठंड में बच्चों को बैठना पड़ता है फर्श पर
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। ठंड के मौसम में जिले भर में कई सरकारी स्कूलों में कमरों की कमी में बच्चों को बरामदों के ठंडे फर्श पर नीचे बैठना पड़ रहा है। या फिर एक ही कमरे में कई-कई कक्षाएं लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। लगातार की जा रही कमरों की मांग के बावजूद अभी तक कमरों की जरूरतें पूरी नहीं हो पाई हैं। अकेले जिला मुख्यालय कैथल में ही तीन पाठशालाएं उधार के भवनों में चल रही हैं।
कैथल शहर में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गीता भवन के सामने स्थित राजकीय कन्या मिडिल स्कूल में करीब 450 छात्राएं हैं। यहां 8 कमरे हैं। जबकि कम से कम 11 कमरे होने चाहिए। छात्राओं को सर्दी के मौसम में बरामदे में ठंडे फर्श पर बैठना पड़ता है। यहां ना कोई लाइब्रेरी, ना लैब व अन्य भवन हैं। स्टाफ रूम तक ना होने के कारण स्कूल हेड के कमरे में ही अध्यापकों को बैठना पड़ता है।
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इसी के निकट सब्जी मंडी में चल रही राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला का भवन हांलाकि बन रहा है। जिस कारण इस पाठशाला में पढने वाली छात्राओं की कक्षाएं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में लगानी पड़ रही हैं।

धर्मशाला में लगानी पड़ रही हैं कक्षाएं : बड़ा कटहड़ा केनिकट स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला की कक्षाएं एक धर्मशाला में लगानी पड़ रही हैं। इस पाठशाला में 134 बच्चे पढ़ते हैं। जगह के अभाव में धर्मशाला के हाल सहित दो कमरों मेें कक्षाएं लग रही हैं। बताया जा रहा है कि इस स्कूल को चंदाना गेट पर बन रहे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शिफ्ट किया जाएगा।
इसी प्रकार से जाखौली अड्डा स्थित एक बस्ती में स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला को भी जगह के अभाव में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शिफ्ट किया गया है। यहां जगह महज 500 वर्ग गज है। जिसमें स्कूल भवन नहीं बन सकता।
दो शिफ्टों में लगता है स्कूल, बच्चों व अध्यापकों को परेशानी : पूज मोहल्ले में स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला मेें परेशानियां काफी ज्यादा हैं। यहां दो शिफ्टों में स्कूल लगता है। 186 बच्चों के लिए महज 2 कमरे हैं। बीच में एक बरामद टाइप जगह है। इन्हीं तीन जगहों पर कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। बताया जा रहा है कि इस पाठशाला को भी चंदाना गेट स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शिफ्ट किया जाएगा। लेकिन तब तक ना केवल बच्चे बल्कि स्टॉफ को भी काफी परेशानी होती है।
जाखौली अड्डा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बैंच पूरे ना होने के कारण छात्राओं को फर्श पर बैठना पड़ता है। बाल सरंक्षण आयोग की टीम को भी यहां छात्राओं के नीचे बैठने पर हैरानी हुई। यहां कमरे तो पूरे हैं, लेकिन बैंच पूरे ना होने के कारण छात्राएं ठंड में नीचे बैठने को मजबूर हैं।

फोटो खींचने पर भड़का अध्यापक, फोटोग्राफर को दी स्कूल में ना घुसने की धमकी : अमर उजाला संवाददाता व फोटोग्राफर पूज मोहल्ला स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में कमरों की स्थिति पता करने पहुंचे। यहां बच्चों ने जैसे ही द्वार खोला तो सामने एक अध्यापक कक्षा छोड़कर दूसरी कक्षा में बैठकर सुबह 9 बजकर 51 मिनट पर चाय की चुस्कियां ले रहा था। फोटो खींचने पर वह भड़क उठा और फोटोग्राफर को धमकी देते हुए कहा कि इस स्कूल को बदनाम करके रखा हुआ है। यहां घुसने की हिम्मत कैसे हुई। यहां अपना आईकार्ड जमा करवाओ। आगे से स्कूल में नहीं घुस जाओगे। खबर छापी तो सुबह कोर्ट में केस कर दूंगा। मैं तुम्हें सुबह देख लूंगा। स्कूल हैड सहित अन्य स्टॉफ सदस्य अध्यापक को समझाने का भी प्रयास करते रहे। लेकिन उक्त अध्यापक ने एक नहीं सुनीं। अध्यापक ने यहां तक कहा कि उसने 85 बच्चे इस स्कूल में दाखिल करवाए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि 186 कुल बच्चों में से यदि 85 बच्चे यहीं अध्यापक महोदय लेकर आए हैं तो बाकि स्टॉफ सदस्यों ने क्या कुछ भी नहीं किया? यदि एक ही अध्यापक की इतनी बड़ी उपलब्धि है तो उन्हें शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए। जब उन्हें बताया गया कि बच्चों को पढ़ाने व मअधिक से अधिक बच्चे स्कूल में लाने के लिए ही सरकार वेतन देती है तो वे ओर भडक़ उठे। मुश्किल से मुख्य अध्यापिका से कमरों की स्थिति पर चर्चा के बाद संवाददाता व फोटोग्राफर स्कूल से बाहर आए। स्कूल मुखिया सहित शेष स्टॉफ सदस्यों का व्यवहार सराहनीय रहा।
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जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिंह सिरोही ने कहा कि जिले में करीब 50 से अधिक स्कूलों में कमरों की जरुरत है। निर्माण विंग द्वारा इस काम को देखा जा रहा है। शहर में चंदाना गेट पर बन रहे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में दो पाठशालाओं को शिफ्ट किया जाएगा। इसके अलावा जाखौली अड्डा की पाठशाला को राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शिफ्ट किया गया है।


कई स्कूलों में कमरे ना होने के कारण एक कमरे में लगती हैं कईं-कईं कक्षाएं
ठिठुरती ठंड व गर्मी के दिनों में होती हैं ज्यादा परेशानियां
शिक्षा विभाग नहीं कर पा रहा है कमरों की व्यवस्था
शहर में तीन प्राथमिक पाठशालाएं चल रही हैं किराये के भवन में

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