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पंजाब में नहीं हरियाणा के ही कई शहरों में हैं नशे की जड़ें

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नसीब सैनी
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कैथल। गुहला-चीका क्षेत्र की प्रमुख समस्या नशे को लेकर स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ है। लेकिन नशेड़ियों के लिए पुनर्वास केंद्रों की व्यवस्था न होना न केवल पुलिस बल्कि उन परिवारों के लिए भी परेशानी का सबब बना हुआ है, जिनके युवा नशा छोड़कर मुख्य धारा में लौटना चाहते हैं। अमर उजाला द्वारा ग्राउंड रिपोर्ट की और लोगों से बात की तो लोगों ने क्षेत्र की पीड़ा बताई और मांग की कि नशे को खत्म किया जाए। ताकि वर्तमान पीढ़ी को बचाया जा सके। नशे से खरकां, पाई जैसे गांवों में कई युवाओं की मौत हो चुकी है।
गुहला-चीका में शहीद उधम सिंह चौक पर केमिस्ट की दुकान चला रहे संस्था राष्ट्रीय जनशक्ति मंच के प्रधान डॉ. सुदेश बंसल का कहना है कि क्षेत्र में उनकी संस्था नशे पर काम कर रही है। करीब छह माह से लगातार प्रयास जारी है। पुलिस ने अब काफी हद तक खुलेआम बिकने वाले नशे पर अंकुश लगाया है।
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युवा पीढ़ी हो रही है बर्बाद:
गांव पपराला के चरणजीत सिंह कहते हैं कि क्षेत्र में युवा पीढ़ी नशे से बर्बाद हो रही है। आस-पास के गांवों में स्मैक सहित कई तरह का नशा फैला हुआ है। जिससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। बॉर्डर इलाका होने के कारण बदनामी भी बहुत ज्यादा है। इस समस्या का समाधान होना चाहिए।
नशामुक्ति केंद्र खुलवाएं सांसद:
गांव सदरांहेड़ी के पूर्व सरपंच सुखदेव सिंह कहते हैं कि क्षेत्र में सभी तरह का नशा चल रहा है। स्मैक, अफीम, भुक्की हो या फिर गांजा। पुलिस के प्रयासों से इस समय कुछ असर जरूर हुआ है लेकिन जो पीढ़ी बर्बाद हो चुकी है। उसके लिए सत्ताधारी पार्टी को सख्त कदम उठाने होंगे। साथ ही नशामुक्ति केंद्र जैसे संस्थान शुरू करने होंगे।
गांव बुबकपुर के रणजोत सिंह कहते हैं कि हमारे गांव में तो नशा कम जरूर हुआ है। लेकिन आस-पास के गांवों में नशे की बात सुनते हैं। चीका शहर में भी संजय बस्ती हो या फिर दो-तीन अन्य बस्तियां। वहां हर तरह के नशे की बात सुनते थे। अब पुलिस की सख्ती का असर है। चुनाव में जो नेता आ रहे हैं, लोग उनसे भी वायदा लें कि वे नशा विरोधी मुहीम में कैसे काम करेंगे।
उधर, कई लोगों ने कहा कि खरकां, चीका, कल्लरमाजरा, मलिकपुर जैसे गांवों में भी स्मैक के बिकने की खूब चर्चाएं रही हैं। हालांकि इस समय स्थिति कुछ नियंत्रण में हैं। फिर भी लोग चोरी-छिपे इस धंधे में संलिप्त हैं।
पंजाब से नहीं हरियाणा से आता है नशा:
पुलिस की नशाविरोधी मुहीम में शामिल टीम के अनुसार नशा पंजाब से नहीं आता। बल्कि यह जींद जिले के नरवाना सहित दो-तीन गांवों, हिसार के दो-तीन गांवों से यहां सप्लाई होता है। पंजाब में सख्ती हो तो हरियाणा में, हरियाणा में सख्ती हो तो बॉर्डर इलाका होने के कारण पंजाब में यह धंधा फलता-फूलता है। इस पर नियंत्रण जरुरी है।
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4 माह में 58 पर केस, 72 सलाखों के पीछे:
लोगों में इस बात की चर्चा है कि एसपी वसीम अकरम के आदेश पर गठित नशा विरोधी सैल के प्रभारी सब इंस्पेक्टर बलवान सिंह व उनकी टीम ने काफी अच्छा काम किया है। जिस कारण अब आसानी से स्मैक नहीं मिलती। अब तक इस टीम ने 4 माह में 58 केस दर्ज किए हैं। जिसमें 72 लोग स्मैक, अफीम, गांजा, हेरोइन, चूरापोस्त सहित काबू किए जा चुके हैं। एक लाख से अधिक की ड्रग्स मनी भी बरामद हो चुकी है। बलवान सिंह ने बताया कि यह प्रचार मिथ्या है कि नशा पंजाब की ओर से ज्यादा आता है। कुछ हद तक आता होगा, लेकिन इसकी जड़ें अधिकतर नरवाना, हिसार जिले के दो-तीन गांव, जींद जिले के तीन-चार जगहों पर हैं। जहां कई बार रेड का प्रयास किया गया लेकिन कई तस्करों का रिमांड न मिलने के कारण कानूनी तौर पर पुलिस के हाथ बंधे हुए हैं। इसके अलावा नशेड़ियों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था इस क्षेत्र में नशे के खात्मे के लिए बहुत जरूरी है। नशा मुक्ति केंद्रों को सरकारी स्तर पर चलाए जाने की जरूरत है।
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