डेरा बाबा राजपुरी गद्दी मामला : कोर्ट के आदेश पर महंत दूजपुरी फिर से गद्दी पर हुए आसीन
महंत को नौ माह बाद मिला कब्जा, ड्यूटी मजिस्ट्रेट सहित डीएसपी व एसएचओ समेत 150 पुलिस कर्मी रहे सुरक्षा में तैनात
कैथल। गांव बाबा लदाना में स्थित डेरा बाबा राजपुरी गद्दी को लेकर कोर्ट के फैसले के बाद महंत दूजपुरी को पुलिस की निगरानी में शुक्रवार को कब्जा दिया गया। इसके बाद करीब नौ महीने बाद जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। कब्जा देने के दौरान नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह व कानूनगो धर्मबीर सिंह ने महंत दूजपुरी को डेरा परिसर में एक-एक वाहन, वस्तुएं, मंदिर प्रांगण में पूजा के साधन, गोशाला सहित अन्य सामान की विस्तार से जानकारी देकर उन्हें थमाया गया।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट सहित डीएसपी की अगुवाई में 150 पुलिस कर्मी रहे तैनात : शुक्रवार को कोर्ट के आदेशानुसार ड्यूटी मजिस्ट्रेट सहित एक डीएसपी अशोक कुमार व सदर थाना के एसएचओ चंद्रभान की अगुवाई में 150 पुलिसकर्मी कब्जा दिलाने के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर मौजूद रहे। डीएसपी अशोक कुमार ने बताया कि अभी गांव के माहौल को देखते हुए डेरा में पांच पुलिस कर्मियों को सुरक्षा के मद्देनजर आगामी आदेशों तक रखा जाएगा। यदि किसी भी शरारती तत्व ने डेरे में किसी भी प्रकार की अनहोनी करने की कोशिश की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
महंत ने लगाए आरोप, डेरे में दूसरे पक्ष ने बेची 40 भैंसे : डेरा पर कब्जा लेने के तुुुुुंरत बाद महंत दूजपुरी ने दूसरे पक्ष के लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। महंत ने बताया कि जिला प्रशासन के डेरे का कब्जा लेने से पहले दूसरे पक्ष के लोगों ने डेरे को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। महंत दूजपुरी का आरोप है कि उन्होंने सैकड़ों पेड़ काटे गए हैं। इसके साथ ही 600 मन गेहूं नहीं मिला और 40 भैंसों को बेच दिया गया है।
यह है विवाद का मामला : गौरतलब है कि वर्ष मई 2018 मई में डेरे के महंत दूजपुरी पर कुछ ग्रामीणों ने मारपीट करने के आरोप लगाए थे। जिसके बाद महंत को हटाने का विरोध हुआ था और उन्हें हटा भी दिया। गद्दी पर महंत बैठाने के लिए चार महापंचायत हुई थी और महापंचायत होने के बाद दूसरे पक्ष के प्रेमपुरी को गद्दी दी गई। लेकिन इसके बाद मंहत दूजपुरी ने कोर्ट की शरण ली। जिसके बाद अगस्त 2018 में महंत प्रेमपुरी को हटाकर जिला प्रशासन ने यहां पर धारा 144 को लागू कर दिया था। इसके बाद करीब पांच महीने तक कोर्ट में मामला विचारधीन रहा और 20 फरवरी को महंत दूजपुरी के पक्ष में कोर्ट ने फैसला दिया था। जिसके बाद शुक्रवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह ने 150 से अधिक पुलिस कर्मियों की निगरानी में कब्जा दिया गया।