बैकडेट में स्कूल को मान्यता देकर अब ली जा रही संबद्धता फीस
प्राइवेट स्कूलों को मान्यता देने में खेल, कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दी जा रही है वर्ष 2018 में 2006 से मान्यता
शिक्षा बोर्ड भिवानी में भी अधिकारी आंख मूंद कर जमा करवा रहे हैं पिछले सालों की संबद्धता फीस
नसीब सैनी
कैथल। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में निजी स्कूलों को मान्यता देने में बड़ा खेल खेला जा रहा है। नए नियमों में हुए बदलाव में कमी का लाभ उठाकर कुछ कर्मचारी लाखों रुपये लेकर फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं। इसके आधार पर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी भी आंख मूंद कर वर्ष 2006 में मिली स्कूल को मान्यता के बाद वर्ष 2018 में संबद्धता फीस जमा करवा रहा है। फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर रहे कर्मचारियों ने अपने बचाव का तरीका भी सोच रखा है, वे कह देेंगे कि रिकॉर्ड में मान्यता प्राप्त करने के लिए संबंधित स्कूल की जो आवेदन फाइलें थीं, वे गुम हो गई हैं। इसलिए अब वे कुछ नहीं कर सकते। इस पूरे खेल में बोर्ड के भी कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। मामले की उच्चस्तरीय जांच हो तो बड़ा खुलासा हो सकता है।
ऐसे चल रहा है खेल : शिक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में एक रजिस्टर है। इसमें स्कूलों को मान्यता देने के लिए एंट्री होती है। जब स्कूल संचालक की फाइल को सभी अधिकारियों से अनुमति मिल जाती है तो उसे एक पत्र जारी किया जाता है। इस पत्र के आधार पर बाद में शिक्षा बोर्ड भिवानी में संबद्धता फीस जमा होती है। इसके बाद मान्यता की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। लेकिन यहां आठवीं तक के स्कूलों के लिए इस रजिस्टर में फर्जी एंट्री करना शुरू की गई। जिसके आधार पर कई स्कूलों को वर्ष 2006 तक की मान्यता बैक डेट में दे दी गई और बोर्ड में भी इतने सालों की फीस वर्ष 2017-18 में जमा करवा ली गई। इसके बाद यही रजिस्टर इस कार्यालय के दूसरे गुट के हाथ लग गया। इस गुट ने पिछले कर्मचारी की कमी का लाभ उठाकर उसी तरीके से दसवीं व बारहवीं तक स्कूलों के लिए भी फर्जी इंट्री शुरू कर दी। करीब 12 साल पहले की इंट्री रजिस्टर में करके फर्जी मान्यता प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है। इसके लिए कई प्रमाण पत्रों में तो सेवानिवृत्त अधिकारियों तक की सेवाएं ली गईं और सालों पहले के प्रमाण पत्र के लिए उनसे घर जाकर हस्ताक्षर करवाए गए। कई अधिकारियों के हस्ताक्षर फर्जी भी करवा दिए गए।
बचाव के लिए जवाब भी सोच रखा है : सूत्रों ने बताया कि स्कूल संचालकों को बिना किसी आवेदन फाइल, स्कूल का निरीक्षण किए बिना ही यह मान्यता प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। सवाल उठता है कि इतनी दिलेरी से कुछ कर्मचारी इस काम को कैसे अंजाम दे रहे हैं? इसका जवाब खुद कर्मचारियों ने ही सोच रखा है। उनका कहना है कि पकड़े तो तब जाएंगे, जब कोई फाइल मिलेगी। फाइल है ही नहीं तो मिलेगी कहां से? इतने सालों पुराना रिकॉर्ड कौन और कहां से लाएगा। इसी बात का फायदा उठाकर ये फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार कैथल जिले में इस फर्जीवाड़े में करीब 30 से 35 प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।
ऐसे स्कूलों को मिल रही है मान्यता, जो नियमों पर खरे नहीं उतरते : इस खेल में 2 से 3 कमरों में चल रहे स्कूलों को भी मान्यता दी जा रही है। जो नियमों पर खरे नहीं उतरते। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि एक दो स्कूल तो ऐसे हैं, जो वर्ष 2006 में थे ही नहीं, उन्हें भी मान्यता का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इस पूरे मामले की बारीकि से जांच के बाद ही पर्दा उठ सकता है।
जिला शिक्षा अधिकारी जोगेंद्र हुड्डा ने कहा कि उन्होंने मान्यता संबंधी रिकॉर्ड तलब किया है। यदि कोई गड़बड़ी होगी तो निश्चित तौर पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि यदि कोई गड़बड़ है तो पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी। यदि कोई गलत काम करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह जरूर है कि अब स्कूल को मान्यता देने की क्षमता डीईओ को ही है।