नाबालिग बेझिझक चला रहे हैं बाइक, अभिभावक बोले करेंगे जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सड़क सुरक्षा को लेकर मोटर व्हीकल एक्ट में किए गए बदलावों के बावजूद जिले में नाबालिग बेझिझक बाइक दौड़ाते नजर आते हैं। उनके सिर पर ना हेलमेट होता है और ना ही उनकी स्पीड कम। अभिभावक इस बात से भी वाकिफ नहीं हैं कि यदि उनके लाडले ने कोई एक्सीडेंट किया तो सजा उन्हें भी मिलेगी।
शहर में स्थित कई बड़े स्कूलों में सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी दो पहिया वाहनों पर आते हैं। इस पर स्कूल संचालकों का भी यह कहना है कि वे केवल 18 वर्ष से अधिक आयु वाले बच्चों को उनकी मंजूरी के चलते दो पहिया वाहनों पर आने की अनुमति देते हैं। इस पर भी हेलमेट का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। लेकिन स्थिति यह है कि अधिकतर नाबालिग बच्चे बाइक दौड़ा रहे हैं और उनके सिर पर हेलमेट भी नहीं होता।
यह है नियम
मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार यदि 18 वर्ष से कम आयु का नाबालिग मोटरसाइकिल या स्कूटी से दुर्घटना करता है तो उसके अभिभावकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इसके तहत उन्हें 25 हजार रुपये के जुर्माने से लेकर तीन वर्ष तक की कैद हो सकती है।
बिना हेलमेट नहीं देंगे दो पहिया वाहन
अभिभावक अर्पित बंसल ने कहा कि उसकी बेटी स्कूटी चलाने के दौरान हेलमेट का इस्तेमाल करती है। यदि वह हेलमेट नहीं डालती तो उसे डलवाया जाता है। उसने कहा कि वह अन्य अभिभावकों को भी उनके बच्चों द्वारा हेलमेट पहनने के लिए अपील करेंगे।
अभिभावक मोनिका ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी को हेलमेट दिलवा रखा है। वह रोज डालकर ही वाहन चलाती है। उसने बताया कि सुबह स्कूल के समय से पहले उसने ट्यूशन जाना होता है। इसके लिए उसने उसे स्कूटी चलवाने की अनुमति दी है। लेकिन वह 18 वर्ष से कम आयु पर ड्राइविंग करने के पक्ष में नहीं है। अभिभावक रमेश ने बताया कि उसका बेटा अभी 18 वर्ष से कम आयु का ही है। लेकिन वह ड्राइविंग करना सीख चुका है। उसने कहा कि वह अपने बेटे को बाइक देने के पक्ष में नहीं है। वह नियमों के उल्लंघन के पक्ष में नहीं है। उनका प्रयास रहेगा कि वे बालिग होने पर ही बाइक चलाएं। इसके साथ ही अन्य अभिभावकों को भी इसके प्रति जागरूक किया जाएगा।
हेलमेट न पहनने पर किया जुर्माना
हिंदू कन्या स्कूल की प्रिंसिपल मेनिका शर्मा ने कहा कि स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूल में स्कूटी लाने वाले छात्राओं के लिए हेलमेट अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि जब भी कोई छात्रा हेलमेट नहीं पहनकर आती तो उन पर एक दिन के हिसाब से पांच रुपये का जुर्माना भी लिया जाता है।
दो पहिया वाहन स्कूल में लाने की नहीं दी अनुमति
बीआरडीएम स्कूल के प्रिंसिपल वरुण जैन ने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति समय समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उनके स्कूल में 18 वर्ष के कम आयु वाले विद्यार्थियों को स्कूल में दो पहिया वाहन लाने की अनुमति नहीं है। हालांकि कभी कभार स्कूल में कार्यक्रम के दौरान वे स्कूटी या मोटरसाइकिल ले आते हैं।
पुलिस कार दावा करते है चालान, आरएसओ भी ढीली
18 वर्ष की कम आयु के नाबालिगों की ओर से वाहन चलाने पर ट्रैफिक पुलिस चालान कर उनके अभिभावकों पर कार्रवाई करने का दावा करती है। लेकिन सच्चाई इसे कहीं परे ही है। सड़क सुरक्षा के नाम पर जागरूकता फैलाने वाली आरएसओ भी इस मामले में काफी ढीली है। जबकि आरएसओ भी नाबालिगों को दो पहिया न चलाने के लिए जागरूक करने की बात करती है।
अभिभावकों के किए जा रहे हैं चालान
यातायात पुलिस में कार्यरत सब इंस्पेक्टर दुर्गादास ने कहा कि यदि कोई नाबालिग दोपहिया वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है तो उनके अभिभावक का चालान किया जाता है। साथ ही अभिभावकों से अपील की जाती है कि वे नाबालिग बच्चों को बाइक ना दें। बालिग होने पर उन्हें हेलमेट के साथ ही बाइक चलाने की अनुमति दें।