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गिरने के कगार पर हैं पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक

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गिरने की कगार पर पंचरथ शैली में बने मंदिर
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अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया गए स्मारक बिना संभाल के गिरने के कगार पर पहुंच गए हैं। कपिल सरोवर के किनारे पर स्थित इन शिव मंदिरों की संभाल में कोताही होने के कारण इनके शीर्ष क्षतिग्रस्त हो गए हैं। यदि समय रहते संभाल नही हो पाई तो गौरवपूर्ण अतीत का एक यादगार अहसास धूल धूसरित हो सकता है। अद्भुत एवं विलक्षण मंदिर की जर्जर हुई स्थिति से स्थानीय व दूर दराज से दर्शन को आने श्रद्धालुओं में हालात के प्रति रोष व दुख व्याप्त है। नरेश वर्मा, राधेश्याम भट्ट, जगदीश रायका, रमेश बैरागी, कुंवर रविंद्र सूर्यवंशी, जसवंत भगत आदि का कहना है कि पुरातत्व विभाग ने जब से मंदिर को संरक्षित किया है तब से ही मंदिर के रख रखाव में भारी कमी देखने को मिल रही है।
लापरवाही के चलते संरक्षित स्मारक हो रही है ध्वस्त
परिसर में पंचरथ शैली में बने शिव मंदिर का निर्माण सातवीं शताब्दी में हुआ था। मंदिर के निर्माण में बिना गारे के तराशी गई सुंदर ईंटों का प्रयोग किया गया है जिन पर प्रचूर मात्रा में फूलपत्तियों व अन्य नमूनों का अलंकरण है। इस मंदिर की एक ओर की दीवार कई वर्ष से टूट कर गिरी हुई है। 13 जून 2015 को आर्केलोजिकल टीम के विशेषज्ञ ने कलायत में मंदिरों की संभाल की थी तथा मंदिर के संरक्षण का जिम्मा विभाग के विज्ञान विभाग को सौंपे जाने की बात कही थी। इतना समय बीत जाने के बाद भी पुरातत्व विभाग की ओर से मंदिर के संरक्षण की दिशा में कोई प्रयास तक नहीं किया गया।
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कभी भी गिर सकता है प्राचीन शिव मंदिर का गुंबद
परिसर में ही बने छोटी ईंटों के एक अन्य शिव मंदिर का गुंबद गिरने की कगार पर पहुंच गया। बंदरों द्वारा क्षतिग्रस्त किए गए गुंबद के गिरने से कभी भी भारी नुकसान हो सकता है। स्थानीय निवासी नरेश वर्मा का कहना है कि मंदिर के आस पास अनेक मकान बने हैं तथा भारी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए आते हैं। यदि गुंबद गिर गया तो जान माल का भारी नुकसान हो सकता है। लोगों का कहना है कि यदि पुरातत्व विभाग खंडहर हो रहे मंदिरों की देखभाल नहीं कर सकता तो स्थानीय लोगों को इसका अवसर दे। स्थानीय लोग गिरने वाले एक मंदिर के गुंबद व क्षतिग्रस्त हुई दूसरे मंदिर की दीवार को अपने ही स्तर पर ठीक करवा सकते हैं।
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स्थानीय निवासी सुरेश गोयल का कहना है कि आर्केलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया देश के संरक्षित मोनूमेंट्स पर करोड़ों रुपये खर्च कर उनका वर्चस्व बनाए रखता है पर कलायत में इसके विपरीत कार्य हो रहा है। शक संवत के प्रवर्तक राजा शालिवाहन से संबंधित इस विलक्षण मंदिर को यदि कोई नुकसान होता है तो देश का इतिहास, देश की संस्कृति व देश की अस्मिता तो आहत होगी ही साथ ही मंदिर से जुड़े करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं पर भी कुठाराघात होगा। उन्होंने कहा कि विदेशों में संस्कृति की धरोहर को वर्तमान समय के मोनूमेंट्स से अधिक अधिमान देते हुए संग्रहित किया जाता है पर उनको कलायत के शालीवाहन शिव मंदिर की दुर्दशा देख कर बहुत दुख हुआ।


पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक
परिसर में स्थित पंचरथ शैली में बने मंदिर की एक दीवार हो चुकी है क्षतिग्रस्त
दूसरे शिव मंदिर का गुंबद गिरने की कगार पर
फोटो नंबर- 38
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