फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदहाल हैं जिले भर में ड्रेन व नाले

विज्ञापन
विज्ञापन
कैथल। इस बार प्री-मानसून की बारिश नहीं हुई और अब मानसून भी लेट है। जिस कारण गनीमत है कि ड्रेनों व नालों से पानी ओवरफ्लो नहीं हुआ अन्यथा सिंचाई व जनस्वास्थ्य विभाग के भरोसे रहते और बारिश समय पर हो जाती तो कई इलाकों में जलभराव की स्थिति का सामना करना पड़ता। जिले में काफी सारी ड्रेनों में जलकुंभी का साम्राज्य बना हुआ है। सिंचाई विभाग को तो अभी तक बजट ही प्राप्त नहीं हुआ है। जनस्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ड्रेनों की सफाई की जा रही है। लेकिन स्थिति इसके उलट है। ड्रेनों में गंदगी अटी पड़ी है।
विज्ञापन

जिले से पांच ड्रेनों के जरिये होती है पानी की निकासी:
कैथल जिले में मुख्य रूप से पांच ड्रेनों के जरिये पानी की निकासी की जाती है। इनमें से करीब 35 किलोमीटर लंबी कैथल ड्रेन और 30 किलोमीटर लंबी अमीन ड्रेन तो सिंचाई विभाग के पास है, लेकिन सिल्लाखेड़ा, ग्योंग और मानस ड्रेन का काफी हिस्सा शहर में जनस्वास्थ्य विभाग के अधीन है। कैथल व अमीन दोनों ड्रेनों की क्षमता 400 क्यूसेक से शुरू होकर 2200 क्यूसेक तक है। इसके अलावा ग्योंग ड्रेन की लंबाई करीब पांच किलोमीटर, मानस ड्रेन की छह और सिल्लाखेड़ा ड्रेन की लंबाई तीन किलोमीटर के करीब है। इन्हीं तीन ड्रेनों के जरिये शहर से गंदे पानी की निकासी होती है। विभाग के अनुसार इन ड्रेनों में सफाई करने का कार्य तकरीबन पूरा करवा दिया गया है, लेकिन शहर के लोग सफाई के कार्य को खानापूर्ति करार दे रहे हैं। लोग अभी तक विभाग के कार्यालयों में चक्कर काट रहे है। डिफेंस कॉलोनी व इसके साथ लगती कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि आज भी ड्रेन गंदगी से अटी पड़ी है। कॉलोनीवासी सुरेश कुंडू, ईश्वर नैन, लहना सिंह, चंद्रभान, सतपाल व रमेश कुमार ने बताया कि ड्रेन की सफाई के लिए कुछ समय पहले जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारी लगाए गए थे, लेकिन वे भी अधर में काम छोड़ गए हैं। शहर में ड्रेनों की सफाई के लिए विभाग ने 13 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है, जिसमें से अभी तक करीब आठ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
275 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन:
जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर में बिछाई गई सीवरेज लाइन की लंबाई करीब 275 किलोमीटर है। इसकी पानी निकासी की क्षमता 30 एमएलडी प्रतिदिन की है। पांच डिस्पोजल और तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं। ये डिस्पोजल अनाज मंडी, फ्रांसवाला रोड, खुराना रोड, बालाजी व आरके पुरम कॉलोनी में हैं। इसके अलावा दो एसटीपी मानस रोड पर व एक जींद रोड पर है। विभाग के पास 26 कर्मचारी सीवर की सफाई के लिए हैं और एक मशीन सफाई के लिए है, लेकिन इसके बावजूद शहर की कई कॉलोनियों में सीवरेज व्यवस्था ठप पड़े हैं। कर्मचारी सीवरेज सफाई के लिए आवश्यक उपकरणों की कमी का सामना कर रहे हैं। पिछले पांच साल में जिले में 5 सफाई कर्मियों की सीवरेज में उतरने के बाद जहरीली गैस के प्रभाव के कारण मौत हो चुकी है। इसके बावजूद विभाग इस समस्या की ओर संजीदा नहीं है।
विज्ञापन

इतने जगहों पर होता है जलभराव:
शहर शक्ति नगर, शिवनगर, रामनगर, अर्जुन नगर, पट्टी अफगान, राधास्वामी कॉलोनी, डिफेंस कॉलोनी, जालंधरी मोहल्ला, रेलवे गेट, माता गेट, डोगरा गेट, प्रताप गेट व अंबकेश्वर मंदिर के साथ का क्षेत्र सहित कई कॉलोनियों और मोहल्लों में जल भराव की स्थिति पैदा होती है। इन जगहों पर सीवरेज ठप होने के लिए यहां के लोग भी जिम्मेदार हैं। लोग सीवरेज के मैनहोल में प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें, गोबर व अन्य प्रकार की चीजें डाल देते हैं, जिससे सीवरेज रुक जाते हैं। हालात अभी ये है कि शहर में कई जगहों पर सीवरेज का पानी ओवरफ्लो होकर घरों व दुकानों में घुसा हुआ है।
शहर में नाले भी बंद पड़े हैं:
करनाल रोड पर स्थित दोनों ओर के नालों की सफाई हुए न जाने कितना समय हो गया है। ये पूरी तरह से ब्लॉक पड़े हुए हैं। यही स्थिति शहर के अन्य नालों की है। जहां से बारिश के समय में पानी की निकासी में परेशानी होगी।
जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन वीके गुप्ता ने बताया कि मानसून को देखते हुए ड्रेनेज और सीवरेज की सफाई का कार्य किया जा रहा है। ड्रेनें तकरीबन साफ की जा चुकी हैं। अगर फिर भी कोई कहीं कोई दिक्कत है तो शहरवासी विभाग को अवगत करवाएं। समस्या का प्रमुखता से समाधान किया जाएगा।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन प्रशांत कुमार ने बताया कि विभाग की दोनों ड्रेनों की सफाई का कार्य 85 प्रतिशत तक हो चुका है। जो रहता है उसे भी जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें